लज्जाजनक पराजय उसके बावजूद पीठ थपथपा रहा है अमरीका बहादुर...
अफ़ग़ानिस्तान से अपने देश के सैनिकों की वापसी की पहली वर्षगांठ पर अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने दावा किया कि अफ़ग़ानिस्तान के संबंध में अमीरीका के "आतंकवाद विरोधी प्रयास" अभी भी समाप्त नहीं हुए हैं।
रक्षा विभाग के कर्मियों को भेजे गए एक नोट में ऑस्टिन ने पहली बार कहा कि अमरीका 2001 में, 11 सितम्बर 2001 के आतंकी हमलों के जवाब में "आत्मरक्षा के लिए एक आवश्यक युद्ध छेड़ने" के लिए अफ़ग़ानिस्तान गया था लेकिन तब से अब तक पेंटागन द्वारा अपने नागरिकों को आतंकवादी ख़तरों से बचाने के लिए किए गये प्रयासों के कारण कोई भी दुश्मन हमारी मातृभूमि पर फिर से ऐसा हमला करने में सक्षम नहीं है।
रक्षा सचिव ने कहा कि हालांकि हम जानते हैं कि ऐसा नहीं किया गया है, हमें आतंकवाद से लड़ने पर अपना निरंतर ध्यान बनाए रखना चाहिए और हम करेंगे।
जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में 11 सितम्बर 2001 के हमलों के बाद, अमरीका ने आतंकवाद के ख़िलाफ तथाकथित वैश्विक लड़ाई और तालेबान सरकार को उखाड़ फेंकने के बहाने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया और इस देश पर कब्जा कर लिया जिस पर उसने अलक़ायदा के साथ सहयोग करने का आरोप लगाया था। 2011 में इस क़ब्ज़े के चरम के दौरान इस देश में अमरीकी और नैटो बलों की संख्या भी 1 लाख 40 हज़ार से अधिक लोगों तक पहुंच गई थी।
हालांकि पिछले 20 वर्षों में इस युद्धग्रस्त देश में अमरीकी और नैटो बलों की उपस्थिति के परिणामस्वरूप असुरक्षा, ग़रीबी, नशीली दवाओं के उत्पादन और तस्करी व आतंकवाद के प्रसार में वृद्धि हुई है। तालेबान के फिर से सत्ता में आने और शांति समझौते के साथ जिसे ट्रम्प प्रशासन ने दोहा में इसके ग्रुप के साथ अंजाम दिया, अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बिना कोई परिणाम प्राप्त किए तुरंत इस क़ब्ज़े को समाप्त कर दिया जो कि वियतनाम युद्ध की तुलना में कहीं अधिक ख़राब विफलता थी।
मंगलवार, 31 अगस्त, 2022 अमरीकी इतिहास के सबसे लंबे युद्ध को समाप्त करते हुए अफ़ग़ानिस्तान से अंतिम अमरीकी सैनिक की वापसी की पहली वर्षगांठ थी। यह जल्दबाज़ी में वापसी और वास्तव में अमरीकी सैनिकों का पलायन, बाइडेन सरकार के लिए एक बड़ा झटका बन गया और उसके बाद सामने आने वाले बयानों बयानों और रिपोर्टों से यह साबित हो गया कि अफ़ग़ान सरकार का पतन अमरीकियों की वजह से हुआ जिसके बाद बिगड़ते हालात का फ़ायदा उठाते हुए तालेबान ने सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया।
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