Jun ०८, २०२४ १९:०६ Asia/Kolkata
  • साम्राज्यवाद से जन्मा, इस्राईल, पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति की हक़ीक़ी औलाद है
    साम्राज्यवाद से जन्मा, इस्राईल, पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति की हक़ीक़ी औलाद है

वाइट हाउस लगातार कहता रहा है कि हमें इस्राईल को समय देना चाहिए और अभी फ़ैसला करना जल्दबाजी होगा और अगर कुछ भी बुरा होता है तो इस्राईल की जांच पड़ताल कर जवाब देना चाहिए, एक ख़तरनाक हत्यारे को मोहलत देना।

पार्सटुडे - एक बच्चे या बच्ची का जला हुआ शरीर, खंडहर से बाहर निकाला गया था जो अभी भी जल रहा था। यह वह घटना थी जो ग़ज़ा और फ़िलिस्तीन में कई बार दोहराई जा चुकी है।

शायद यह सबसे बड़ा नरसंहार है जिसका वादा इस्राईल के उप युद्धमंत्री मतान विल्नाई (Matan Vilnai) ने 2008 में ग़ज़ा से किया था।

एक और मंज़र, रेत पर एक कमज़ोर और दुबला पतल गधा लंगड़ा हुआ ग़ज़ा के एक परिवार की गाड़ी खींचने की कोशिश कर रहा था, वह बच्चों जैसा दुबला-पतला, भूखा-प्यासा लग रहा था।

आख़िरकार, ग़ज़ा के गधों के पास कई पश्चिमी नेताओं की तुलना में जगहों की अच्छी और बेहतर पहचान है।

बेशक इस बार गधे का बोझ हल्का था, शायद उसके मालिक की पत्नी या बच्चे की मौत की वजह से। वही परिवार फिर से एक इस्राईल द्वारा बताए गये एक "सुरक्षित" क्षेत्र से दूसरे "सुरक्षित" क्षेत्र की ओर जा रहा है।  सुरक्षित क्षेत्र जो केवल वादा था और है, लेकिन व्यवहार में एक बूचड़खाना है।

जानवर तक इस इलाक़े की ओर मर्ज़ी से नहीं जा रहे थे, यहां तक कि गधा भी नहीं, कुछ ऐसा जो, जो बिडेन को अभी तक समझ नहीं आया था, या वह समझ गये: ग़ज़ा में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है।

बेशक, भूखे गधे में जो बिडेन, इमैनुएल मैक्रॉन, ऋषि सोनक, जस्टिन ट्रूडो और ओलाफ़ शुल्त्स की तुलना में अधिक जज़्बात पाए जाते थे।

क्योंकि यह पश्चिमी सभ्यता के "मूल्यों" से प्रशिक्षित गधा नहीं है। वह 2,000 पाउंड का बम नहीं बनाता है और उसे जेबालिया कैंप जैसे ज़मीन पर सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र पर नहीं गिराता है, न ही उसके पास इस्राईल के लिए नरसंहार की फैक्ट्री बनाने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस या एआई का इस्तेमाल करने की मानसिक क्षमता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गधा ग़ैर-श्वेत संस्कृतियों के प्रति गहरे पश्चिमी नस्लभेद की तलाश में नहीं रहता।

अमेरिकी अधिकारी आमतौर पर किसी इस्राईली की हत्या की निंदा करने में संकोच नहीं करते हैं लेकिन मिसाल के तौर पर रफ़ह में इस्राईलियों की हत्या के बारे में एक सवाल के जवाब में, अमेरिकी विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने बच्चों को जलाने को उचित ठहराया और इसका औचित्य पेश किया।

जॉन किर्बी ने वाइट हाउस में एक रिपोर्टर के सवाल के जवाब में जिसने पूछा कि उसे और कितने जले हुए शव देखने हैं?" नाराज़ हो गए।

वाइट हाउस लगातार कहता रहा है कि हमें इस्राईल को समय देना चाहिए और अभी फ़ैसला करना जल्दबाजी होगा और अगर कुछ भी बुरा होता है तो इस्राईल की जांच पड़ताल कर जवाब देना चाहिए, एक ख़तरनाक हत्यारे को मोहलत देना। रफ़ह के बारे में बाइडन और पश्चिमी नेताओं का भी कहना है कि इस्राईल ने अभी तक रेड लाइन पार नहीं की है।

जिस तरह इस्राईली टैंक रफ़ह के केंद्र तक पहुंच गए हैं, जिससे यूएनआरडब्ल्यूए और वर्ल्ड किचन सेंटर (डब्ल्यूकेसी) को अपने खाद्य सहायता अभियान रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है, फ़िलिस्तीनी नागरिकों के जले हुए शवों के ढेर लग रहे हैं।

हालांकि इस्राईल ने अभी तक जो बाइडेन की रेड लाइन पार नहीं की है, इस्राईल ने पिछली हत्याओं की जांच की है, जैसे कि WCK सहायता कर्मियों की हत्याओं की, और दावा किया है कि हत्याएं जानबूझकर नहीं की गई थीं।

इस्राईली सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ हर्ज़ी हलेवी ने इसे "बड़ी ग़लती" क़रार दिया। नेतन्याहू ने रफ़ह में ताज़ा नरसंहार का भी इसी भाषा में वर्णन किया और इसे महज़ एक "दुखद घटना" क़रार दिया।

मारे गए पत्रकारों की बड़ी संख्या यानी लगभग 140 के बारे में बताते हुए, इस्राईली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि वे जानबूझकर कभी भी पत्रकारों को निशाना नहीं बनाते हैं।

जहां तक 1 लाख से अधिक फ़िलिस्तीनी नागरिकों की हत्या और घायल होने का सवाल है, इस्राईल का दावा है कि ये अनजाने में हुई मौतें थीं क्योंकि वह नागरिकों को कम नुक़सान पहुंचान के लिए सभी संभव उपाय करता है।

पिछले सात महीनों में, उनके ही कथनानुसार इस्राईल ने 225 से अधिक सहायता कर्मियों को "ग़लत तरीके से" मार डाला।

इसके अलावा 700 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी मारे गए हैं और ग़ज़ा पट्टी में खाद्य सहायता की ट्रकों की प्रतीक्षा में सैकड़ों भूखे लोगों की मौत हो गई।

इन सभी मामलों में इस्राईल ने अपनी संलिपत्ता से इनकार किया है और पीड़ितों को ही उनकी मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है।

एक ओर जहां पश्चिम इस्राईल को मारने के लिए घातक बम देता है वहीं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय दबाव को कम करने के लिए ग़ज़ा के लोगों को खाद्य सहायता देता है, इतना मक्कार, धूर्त और अपराधी।

इन सब बातों से यह नतीजा निकाला जा सकता है कि ग़ज़ा न केवल भूखे बच्चों के लिए क़ब्रगाह बन गया है, बल्कि पश्चिमी सभ्यता के मूल्यों के लिए भी कब्रिस्तान में तब्दील हो चुका है।

स्रोत:

Kanj, Jamal. 2024. Gaza: The Donkey and the Fate of Western Civilization. Counterpunch.

 

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