रोहिंग्या मुसलमानों को बेघर करने का नया हथकंडा
रोहिंग्या मुसलमानों की दयनीय स्थिति पर ध्यान देने और उनके विरुद्ध जारी हिंसा को ख़त्म करने के लिए म्यांमार की सरकार पर क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबाव पड़ रहा है लेकिन इसके बावजूद कुछ चरमपंथी सरकारी अधिकारियों ने रोहिंग्या मुसलमानों को बेघर करने के लिए एक नया हथकंडा अपनाया है।
राख़ीन प्रांत के उत्तर में स्थित मंगदू शहर के बौद्ध महापौर ने म्यांमार सरकार की जातिवादी और भेदभावपूर्ण नीतियों को जारी रखते हुए रोहिंग्या मुसलमानों से कहा है कि उन्हें इस स्थान पर रहने के लिए कर प्रदान करना होगा। उन्होंने इसी तरह धमकी दी है कि अगर रोहिंग्या मुसलमानों ने कर नहीं दिया तो वे सेना और सुरक्षा बलों को बुला कर उन्हें प्रताड़ित करेंगे। बौद्ध चरमपंथियों ने वर्ष 2012 से ही राख़ीन प्रांत के रोहिंग्या मुसलमानों को उनके घरों से निकालने के लिए उन्हें यातनाएं देने, प्रताड़ित करने, उनकी महिलाओं का बलात्कार करने और उनका जनसंहार करने की पाश्विक नीतियां अपना रखी हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में अनेक चरमपंथी बौद्ध गुटों ने हथियारों के साथ मंगदू शहर और कई अन्य क्षेत्रों में मुसलमानों के घरों पर हमले किए हैं। इस प्रकार से सरकार और ग़ैर सरकारी स्तर पर रोहिंग्या मुसलमानों को बेघर करने के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।
वास्तविकता यह है कि राख़ीन प्रांत के चरमपंथी बौद्ध एक सोचे-समझे कार्यक्रम के अंतर्गत मुसलमानों को उनके घरों से निकलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका लक्ष्य इस प्रांत की आबादी के ढांचे को बदलना है क्योंकि यहां पर मुसलमान बड़ी संख्या में हैं। हालांकि अब तक मुसलमान बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से बौद्धों के साथ रहते आए हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से चरमपंथी बौद्धों ने रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ विषैले प्रचार करके माहौल ख़राब कर दिया है। यद्यपि क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हल्क़ों ने सदा ही रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ बौद्धों की चरमपंथी कार्यवाहियों की निंदा की है लेकिन अब तक इन कार्यवाहियों को रोकने के लिए कोई व्यवहारिक क़दम नहीं उठाया गया है और इसी बात ने म्यांमार के कुछ सरकारी अधिकारियों और बौद्ध चरमपंथियों को अपने अपराध जारी रखने के लिए अधिक दुस्साहसी बना दिया है। (HN)