अंततः संयुक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार का नोटिस लिया
म्यांमार में कई साल से रोहिंग्या मुसलमानों के जारी जनसंहार, महिलाओं के बलात्कार और उनके घरों को आग लगाने की घटनाओं के पिछले कुछ महीनों में तेज़ी आने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी एक रिपोर्टर को म्यांमार भेजा है।
रोयटर्ज़ के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्टर यांग ली रविवार को यांगून पहुंचीं। म्यांमार सरकार का दावा है कि रोहिंग्या मुसलमानों के एक गुट ने 9 अक्तूबर 2016 को बांग्लादेश की सीमा के निकट कुछ चौकियों पर एक साथ हमला किया जिसमें 9 पुलिस कर्मी मारे गए। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, इस घटना के बाद 86 रोहिंग्या मुसलमानों का जनसंहार हो चुका है और 34000 रोहिंग्या मुसलमान, जो म्यांमार में अल्पसंख्यक हैं, अपना घर-बार छोड़ कर बांग्लादेश फ़रार होने पर मजबूर हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्टर यांग ली राख़ीन राज्य, आर्थिक राजधानी यांगून, म्यांमार की राजधानी नायपीदा और उत्तरी राज्य काचीन का दौरा करेंगी जहां सेना काचीन जाति के छापामारों के ख़िलाफ़ कार्यवाही कर रही हैं। ये छापामार स्वाधीनता चाहते हैं।
ग़ौर तलब है कि राख़ीन राज्य में म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की अधिक संख्या रहती है। रोहिंग्या मुसलमान, म्यांमार की सेना को जनसंहार, बलात्कार, अंधाधुंध गिरफ़्तारी और घरों को आग लगाने के लिए ज़िम्मेदार मानते हैं। शांति का नोबल पुरस्कार पाने वाली आंग सान सूकी के नेतृत्व में म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुसलमानों के दमन का इन्कार करती है और कहती है कि सेना विद्रोहियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी संघर्ष कर रही है। (MAQ/N)