रोहिंग्या समस्या अब म्यांमार की आंतरिक समस्या नहीं है” ओआईसी
अक्तूबर वर्ष 2016 से अब तक 87 हज़ार मुसलमान अपना घर बार, कार्य स्थल और खेत छोड़कर चले गये हैं।
अब किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन या संस्था से यह बात छिपी नहीं है कि म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या एक आंतरिक समस्या नहीं है बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है। इस आधार पर म्यांमार के मुसलमानों की समस्या का समाधान विश्व समुदाय के सामूहिक प्रयास में नीहित है।
संयुक्त राष्ट्रसंघ के मानवाधिकार गुट की रिपोर्ट में आया है कि म्यांमार सरकार का दबाव रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध यथावत जारी है। इस अंतरराष्ट्रीय गुट की रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर वर्ष 2016 से अब तक 87 हज़ार मुसलमान अपना घर बार, कार्य स्थल और खेत छोड़कर चले गये हैं।
रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध हिंसक कार्यवाहियों में म्यांमार की सेना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है परंतु कहना चाहिये कि रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध हिंसा और उनकी हत्या में इस देश की सरकार की भी उल्लेखनीय भूमिका है और इसके लिए वह बौद्धधर्म के अतिवादियों के साथ मिलकर कार्यवाही कर रही है और यह वह विषय है जो राष्ट्रसंघ, मानवाधिकार संगठन या इस्लामी सहयोग संगठन से छिपा नहीं है।
यद्यपि म्यांमार के उत्तरी क्षेत्रों में राष्ट्रसंघ की ओर से रोहिंग्या मुसलमानों को सहायता पहुंचाई जा रही है पर प्रतीत यह हो रहा है कि अपने दायित्वों के निर्वाह के लिए इस अंतरराष्ट्रीय संघ के पास आवश्यक शक्ति नहीं है क्योंकि वह म्यांमार सरकार से यह नहीं कह सकती कि वह रोहिंग्या मुसलमानों को सहायता पहुंचाने में विघ्न उत्पन्न न करे।
म्यांमार में मुसलमानों के विरुद्ध होने वाली हिंसा से संयुक्त राष्ट्रसंघ, इस्लामी सहयोग संगठन, जनसंगठन और इस्लामी जगत चिंतित है और इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी ने मुसलमानों के विरुद्ध होने वाली हिंसा को नस्ली सफाये का नाम दिया है।
म्यांमार की यात्रा पर जाने वाले ओआईसी के विशेष दूत हामिद अलबार ने स्पष्ट किया है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या के समाधान के लिए प्रयास किया जाना चाहिये क्योंकि अब यह केवल आंतरिक समस्या नहीं है। MM