उत्तरी अमरीका में इस्लामोफ़ोबिया के घातक परिणाम
अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प के सत्ता संभालते ही उत्तरी अमरीका में इस्लामोफ़ोबिया की लहर में बहुत तेज़ी आ गई है। कनाडा की एक मस्जिद में हुई गोलीबारी में कम से कम 6 नमाज़ियों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हो गए हैं।
क्वेबेक इस्लामिक कल्चरल सेंटर में रविवार शाम को दर्जनों लोग नमाज़ के लिए इकट्ठा हुए थे, तभी वहां कुछ बंदूक़धारियों ने अंधाधुंध फ़ायरिंग शुरू कर दी।
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडू ने इस घटना की निंदा की है और इसे मुसलमानों के ख़िलाफ़ चरमपंथी हमला बताया है।
पुलिस का कहना है कि चरमपंथी हमले की जांच जारी है और इसी सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इस चरमपंथी घटना से पता चलता है कि इस्लाम और मुसलमान विरोधी दुष्प्रचार का परिणाम कितना घातक हो सकता है। हालांकि कनाडा में अमरीका की तुलना में इस्लाम विरोधी दुष्प्रचार कम है। लेकिन क्वेबेक में मस्जिद पर हमले से स्पष्ट होता है कि इस दुष्प्रचार से समाज में कितना ज़हर घुल रहा है।
इससे पहले भी कनाडा में मस्जिदों पर हमले हो चुके हैं। लेकिन यह हमला ऐसे समय में हुआ है कि जब हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मुसलमान विरोध आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रम्प के इस आदेश की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है और ख़ुद पश्चिम में इसका कड़ो विरोध हो रहा है। इसके बावजूद, अमरीका और यूरोप में इससे चरमपंथी शक्तियों को काफ़ी बल मिला है।
ट्रम्प की नीतियों के विपरीत कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि जो लोग अत्याचार, आतंकवाद और जंग से भाग रहे हैं, कनाडा उनका स्वागत करेगा, भले आप किसी भी मज़हब को मानने वाले हों। विविधता ही हमारी ताक़त है। ट्रूडो के इन विचारों के बावजूद, उत्तरी अमरीका में मुसमलानों के विरुद्ध हमलों में लगातार वृद्धि हो रही है।