ट्रम्प के काल में अमरीका-रूस संबंध का भविष्य
ट्रम्प के काल में अमरीका-रूस संबंध का भविष्य
रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पूतिन ने एक बार फिर अमरीका के साथ अपने देश के संबंध सामान्य करने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात की तत्परता दर्शायी है। पूतिन ने कहा कि मॉस्को-वॉशिंग्टन के बीच संबंध के सामान्य होने की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ रूस पर नहीं है बल्कि इस संदर्भ में अमरीकी पक्ष को अपना योगदान देना होगा।
अमरीका के नए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने हाल में रूस के साथ संबंध सामान्य होने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। ट्रम्प चाहते हैं कि रूस आतंकवाद के ख़िलाफ़ कथित संघर्ष में वॉशिंग्टन की मदद करे, अपने परमाणु हथियार कम करे और युक्रेन के संबंध में अपनी नीति पर पुनर्विचार करे। इसी परिप्रेक्ष्य में ट्रम्प ने हाल में कहा कि रूस के ख़िलाफ़ पाबंदियां ख़त्म होने की बात करना अभी जल्दबाज़ी होगी। इसके अलावा मॉस्को की ओर से आलोचना के बावजूद नेटो द्वारा रूस के ख़िलाफ़ दायरा तंग करने के परिप्रेक्ष्य में हालिया हफ़्तों में अमरीकी सैन्य उपकरण पूर्वी योरोप के क्षेत्र में तैनात हो गए हैं।
ये चुनौतियां दर्शाती हैं कि अमरीका-रूस के बीच संबंध के सामान्य होने के रास्ते में अभी बहुत रुकावटें हैं और ट्रम्प पूर्व शर्त के ज़रिए अपने रूसी समकक्ष से ज़्यादा से ज़्यादा विशिष्टता लेना चाहते हैं। यह ऐसी हालत में है कि पूतिन नहीं चाहते कि अमरीका के साथ संबंध सामान्य होने के चक्कर में रूस के हित बलि चढ़ जाएं। इसलिए रूसी राष्ट्रपति इस बात पर बल दे रहे हैं कि अमरीका को रूस के साथ संबंध सामान्य करने में अपना रोल निभाना चाहिए।
दरअस्ल अमरीका में प्रशासनिक ढांचा रूस विरोधी है। यह विषय इसलिए भी अहम है क्योंकि पूर्व सोवियत संघ के विघटन और शीत युद्ध के अंत के बाद दोनों देशों ने अपने विवादों के निपटारे के लिए किसी प्रकार का सुरक्षा तंत्र नहीं बनाया। ऐसी स्थिति में अगरचे ट्रम्प और पूतिन कुछ हद तक अमरीका-रूस संबंध को बेहतर कर सकते हैं लेकिन दो बड़ी परमाणु शक्तियों के बीच भूराजनीति के क्षेत्र में मतभेद व प्रतिस्पर्धा जारी है और इसी चीज़ के मद्देनज़र रूस-अमरीका के बीच संबंध का सामान्य होना इतना आसान नहीं है। (MAQ/T)