परमाणु वरीयता पर आधारित ट्रंप का दावा एक काल्पनिक दावा हैःरूस
रूस परमाणु क्षमता को कम किये जाने का पक्षधर है।
रूसी संसद ड्यूमा के कुछ सांसदों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया जताई है जिसमें उन्होंने परमाणु श्रेष्ठता की बात की है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नये बयान में परमाणु हथियारों के उत्पादन में अमेरिकी क्षमता में कमी की ओर हुए बल देकर कहा कि वह इस स्थिति को बदलेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर रूस की ओर से तीव्र प्रतिक्रिया जताई गयी है। मॉस्को को डोनाल्ड ट्रंप के सत्ताकाल में अमेरिका और रूस के संबंधों के बेहतर होने की अपेक्षा थी पर इस समय उसे इस अपेक्षा के विपरीत वास्तिकता का सामना है।
20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सत्ता की बागडोर संभालने के बाद परमाणु क्षमता में वृद्धि एक विषय रहा है जिस पर ट्रंप ध्यान देते रहे हैं जबकि रूस परमाणु क्षमता को कम किये जाने का पक्षधर है।
इस बात में कोई संदेह नहीं कि परमाणु क्षमता से सम्पन्न होना रूस अपनी सुरक्षा के लिए रेड लाइन समझेगा और इस देश के अधिकारी इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे और इस संबंध में हर प्रकार की मांग पर रूस कड़ी प्रतिक्रिया दिखायेगा।
जैसाकि रूसी संसद डयूमा में विदेश संबंध समिति के प्रमुख ने डोनाल्ड ट्रंप के उस चुनावी नारे की ओर संकेत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि हम एक बार फिर अमेरिका को महान बनायेंगे। रूसी संसद डयूमा में विदेश संबंध समिति के प्रमुख ने कहा कि अगर इस नारे का अर्थ परमाणु श्रेष्ठता है तो वह इस कार्य से एक बार फिर विश्व को वर्ष 1950-60 के परमाणु प्रतिस्पर्धा के बुरे दौर में पहुंचा देंगे।
उन्होंने कहा कि रूस के संबंध में ट्रंप का यह बयान सबसे कष्टदायक रहा है। रूस के अनुसार ट्रंप ने जिस परमाणु वरियता की बात की है अधिकांतः वह एक काल्पनिक दावा है।
साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान से रूस और अमेरिका के मध्य परमाणु हथियारों को कम करने के संबंध में होने वाली “स्टार्ट टू” संधि पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है। बहरहाल परमाणु श्रेष्ठता के संबंध में डोनाल्ड ट्रंप का बयान विश्व में नई परमाणु होड़ आरंभ होने का कारण बन सकता है। MM