क्या यह ट्रम्प की वसूली है?!!!
अरब कूटनयिक सूत्रों के हवाले से मीडिया में ख़बरें आई हैं कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कुवैत के नरेश को 9 अरब डालर अदा करने का आदेश दिया है।
यह रक़म वह वर्ष 1991 में कुवैत से इराक़ी सेनाओं को बाहर निकालने और कुवैत को आज़ाद करवाने में अमरीका की भूमिका के बदले में मांग रहे हैं। यदि यह रिपोर्ट सही है तो इसका मतलब यह है कि इस तरह की और भी मांगें ट्रम्प की ओर से सामने आएंगी और फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों से वसूली की जाएगी।
रिपोर्ट में यह बताया गया है कि ट्रम्प ने कुवैत नरेश शैख़ सबाह अलअहमद से टेलीफ़ोनी बातचीत में जब यह मांग रखी तो कुवैत नरेश ने उनसे कहा कि युद्ध के समय कुवैत ने अमरीकी राष्ट्र कोष को वह सारी रक़म दे दी थी जो अमरीका की ओर से मांगी गई थी और यह रक़म लगभग 100 अरब डालर थी मगर ट्रम्प अपनी मांग पर अड़े रहे जिसके कारण कुवैत नरेश बहुत परेशान हैं।
अभी यह नहीं पता चल सका है कि ट्रम्प ने सऊदी नरेश सलमान बिल अब्दुल अज़ीज़ और अबू ज़हबी के क्राउन प्रिंस शैख़ मोहम्मद बिन ज़ाएद से अपनी टोलीफ़ोनी बातचीत में इसी प्रकार की मांगें रखी हैं या नहीं, लेकिन लक्षणों से तो यही लगता है कि ट्रम्प ने इन दोनों देशों के सामने भी अपनी मांग रखी है। इन लक्षणों में टेलीफ़ोनी वार्ता के तत्काल बाद सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री डाक्टर ख़ालिद फ़ालेह की वह घोषणा है जिसमें उन्होंने कहा कि उनका देश अमरीका के शेल आयल के क्षेत्र में पूंजीनिवेश का इरादा रखता है।
ट्रम्प ने पत्रकार सम्मेलन में खुलकर कहा था कि फ़ार्स खाड़ी की अरब सरकारों के पास धन के अलावा और कुछ नहीं है और उनका अस्तित्व अमरीका की कृपा पर निर्भर है।
ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ़्लेन और न्याय मंत्री जेफ़ सेशन्ज़ के त्यागपत्र के बाद और नए इमीग्रेशन आदेश के बाद वाइट हाउस में ट्रम्प की स्थिति का कमज़ोर होना तय है। इन हालात में अमरीका के इनफ़्रास्ट्रक्चर को मज़बूत बनाने के लिए ट्रम्प को सैकड़ों अरब डालर की ज़रूरत पड़ेगी और यह पैसे वह फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों से वसूलने की कोशिश करेंगे ताकि अपनी स्थिति मज़बूत करें वरना रूसी सूत्रों का यहां तक कहना है कि अमरीका में रूस के राजदूत के पास जिस प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारियां हैं उनके सामने आ जाने की स्थिति में ट्रम्प के लिए भी अपनी कुर्सी बचा पाना मुश्किल हो जाएगा।
साभार रायुलयौम