संसार में परमाणु त्रासदी की संभावना बढ़ी
संयुक्त राष्ट्रसंघ ने आशंका व्यक्त की है कि विश्व में परमाणु त्रासदी हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्रसंघ की निश्सत्रीकरण संस्था का कहना है कि वर्तमान स्थितियों को देखते हुए इस बात की प्रबल संभावना पाई जाती है कि विश्व में परमाणु त्रासदी हो सकती है।
UNIDIR की रिपोर्ट के अनुसार विश्व की परिस्थितियां यह बताती हैं कि परमाणु शस्त्रों के प्रयोग की संभावना बढ़ती जा रही है जिससे ख़तरे का आभास हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 70 वर्षों से संसार, को परमाणु युद्ध का सामना रहा है। हालांकि एक काल खण्ड एेसा ही आ चुका है जिसमें विश्व की दो बड़ी शक्तियों के बीच परमाणु युद्ध का ख़तरा बहुत बढ़ गया था। बड़ी शक्तियों के पास परमाणु शस्त्रों की मौजूदगी और कोरिया प्रायःद्वीप की स्थिति को देखते हुए परमाणु त्रासदी की संभावना बढ़ती जा रही है।
परमाणु अप्रसार संधि के लागू होने के साथ ही संयुक्त राष्ट्रसंघ ने परमाणु निशस्त्रीकरण को अपनी कार्यसूचि में शामिल कर लिया। परमाणु शस्त्र के स्वामी देशों ने इस संधि को कोई विशेष महत्व नहीं दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि एनपीटी के पूर्ण रूप से लागू होने का मुख्य कारण परमाणु संपन्न देशों का इस संधि के प्रति कटिबद्ध न होना रहा है। एनपीटी द्वारा परमाणु शस्त्रागारों को कम करने के प्रयासों के बावजूद, विश्व की बड़ी शक्तियां, अपने परमाणु शस्त्रों के आधुनिकीकरण में लगी हुई हैं। आरंभ में परमाणु शक्ति संपन्न देशों में 5 देशों का नाम लिया जाता था अमरीका, रूस, चीन, फ़्रांस और ब्रिटेन किंतु इस सूचि में कुछ अन्य देशों के नाम भी जुड़ गए हैं जैसे भारत, पाकिस्तान, उत्तरी कोरिया और अवैध ज़ायोनी शासन। विडंबना यह है कि परमाणु शक्ति संपन्न देश न केवल यह कि एनपीटी की परमाणु निशस्त्री करण नीति को अपना नहीं रहे हैं बल्कि अपने शस्त्रों का आधुनिकीकरण भी कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्रसंघ की निश्सत्रीकरण संस्था UNIDIR की रिपोर्ट के अनुसार यदि किसी भी स्थिति में परमाणु त्रासदी घटती है तो उससे संसार में एेसी विनाशलीला जन्म लेगी जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती।