दुनिया में और घातक हो रहा है परमाणु हथियारों का भंडार
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स्टाकहोम इंटरनैशनल पीस स्टडी इन्सटीट्यूट ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया में परमाणु हथियारों के अधुनिकीकरण के लिए पूंजीनिवेश में वृद्धि हुई है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ०४, २०१७ १५:५८ Asia/Kolkata

स्टाकहोम इंटरनैशनल पीस स्टडी इन्सटीट्यूट ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया में परमाणु हथियारों के अधुनिकीकरण के लिए पूंजीनिवेश में वृद्धि हुई है।

संस्था का कहना है कि वर्ष 2016 में परमाणु हथियारों की संख्या में कुछ कमी हुई लेकिन इन हथियारों के आधुनिकीकरण पर निवेश बढ़ा है।

इस समय अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तरी कोरिया और ज़ायोनी शासन के पास परमाणु हथियारों के भंडार हैं जिनमें वर्ष 2017 तक रखे परमाणु वारहेड की संख्या 14 हज़ार 395 थी। वर्ष 2016 में यह संख्या 15 हज़ार 395 थी। इससे लगता है कि परमाणु अस्त्रों की संख्या तो घटी है और यह कमी रूस और अमरीका के बीच समझौते के आधार पर हुई। इन दोनों देशों के पास दुनिया के परमाणु हथियारों के भंडार का 93 प्रतिशत भाग है। लेकिन जहां हथियारों की संख्या में कुछ कमी हुई है वहीं परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण की प्रतिस्पर्धा तेज़ हो गई है।

संस्था के विशेषज्ञ शानोन केल ने बताया कि परमाणु अप्रसार के विषय पर वार्ता में होने वाली प्रगति के बावजूद 9 परमाणु शक्तियों ने अपने परमाणु हथियार स्थापित कर दिए हैं या स्थापित करने के कार्यक्रम पर काम कर रही हैं।

परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण पर बहुत बड़ा बजट ख़र्च होता है। रूस वर्ष 2020 तक अपने परमाणु हथियारों के भंडार के 70 प्रतिशत भाग का आधुनिकीकरण करना चाहता ह। अमरीका ने तो इस उद्देश्य के लिए बहुत बड़ा कार्यक्रम बना रखा है और उसने अपने परमाणु हथियारों के भंडार के आधुनिकीकरण के लिए दस साल की अवधि में 350 अरब डालर का बजट ख़र्च करने की योजना बनाई है।

परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण का कार्यक्रम पूर्व राष्ट्रपति बाराक ओबामा की सरकार ने शुरू किया था और वर्तमान ट्रम्प प्रशासन उस कार्यक्रम को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। पेंटागोन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्रतिरोधक परमाणु शक्ति अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है और अमरीकी रक्षा मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।

रूस और अमरीका के अलावा चीन, फ़्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भी आधुनिक परमाणु हथियार बना रहे हैं। कोई भी परमाणु शक्ति परमाणु हथियारों की संख्या घटाने के मामले में गंभीर नहीं है।