ईरान परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहा हैः ट्रम्प
अमेरिकी विदेशमंत्री रेक्स टिलरसन ने इस देश के राष्ट्रपति के साथ अपने मतभेदों की बात स्वीकार की है कि ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते पर भी उनके साथ मतभेंद हैं।
रेक्स टिलरसन ने डोनाल्ड ट्रम्प के साथ कुछ मतभेद होने की ओर संकेत के साथ कहा कि हमारे और उनके मध्य परमाणु समझौते जैसे कुछ विषयों को लेकर इस बारे में मतभेद हैं कि किस प्रकार इन विषयों का प्रयोग किया जाये।
इससे पहले अमेरिकी संचार माध्यमों ने ट्रम्प और विदेशमंत्रालय में उनके सलाहकारों के मध्य परमाणु समझौते को लेकर मतभेद की सूचना दी थी।
फॉरेन पालिसी ने एक लेख में लिखा है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने वाइट हाउस में अपने विश्वास पात्र कर्मचारियों के एक गुट को यह ज़िम्मेदारी सौंपी है कि वह इस बात को सिद्ध करने की कोशिश करे कि ईरान परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध नहीं रहा है।
यह वही कार्य है जिसकी ज़िम्मेदारी ट्रम्प ने इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को सौंपी थी।
बहरहाल अमेरिका के कूटनयिक व सुरक्षातंत्र परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने पर बल दे रहे हैं। इन हल्कों का मानना है कि अगर अमेरिका इस बहुपक्षीय समझौते से एकपक्षीय रूप से निकल जायेगा तो वह अलग- थगल पड़ जायेगा और वाशिंग्टन और उसके यूरोपीय व एशियाई घटकों के मध्य दराड़ उत्पन्न होने का कारण बनेगा।
साथ ही जो धड़े अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने के पक्षधर हैं वे अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते से निकल जाने की स्थिति में ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया से भी चिंतित हैं।
बहरहाल ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते के संबंध में अमेरिका में मुख्य रूप से दो धड़े पाये जाते हैं।
एक धड़े का मानना है कि परमाणु समझौते को फाड़ देना चाहिये। इस धड़े का मानना है कि पेरिस समझौते की भांति यह समझौता अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के लिए ख़तरा है जबकि दूसरे धड़े का मानना है कि अमेरिका को परमाणु समझौते के प्रति वचनबद्ध रहना चाहिये।
इसी कारण परमाणु समझौते के खिलाफ कई बार बात करने के बावजूद ट्रम्प ने अब तक दो बार ईरान द्वारा परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने की पुष्टि की है और साथ ही अमेरिका की ओर से परमाणु समझौते के जारी रहने की घोषणा की है।
इसके बावजूद यह विषय अमेरिकी सरकार के भीतर गहरे मतभेद का कारण बना है। MM