म्यांमार की सरकार रोहिंग्या मुसलमानों के अधिकारों पर ध्यान देः ओआईसी
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कुछ टीकाकारों का मानना है कि म्यांमार में अपने हितों के कारण पश्चिम रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या पर चुप है
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug ०४, २०१७ १५:३३ Asia/Kolkata

कुछ टीकाकारों का मानना है कि म्यांमार में अपने हितों के कारण पश्चिम रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या पर चुप है

इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी के महासचिव यूसुफ़ बिन अहमद अलअसिमीन ने म्यांमार की सरकार का आह्वान किया है कि वह इस देश में रोहिंग्या मुसलमानों के अधिकारों पर ध्यान दे।

उन्होंने बांग्लादेश की राजधानी ढ़ाका में बल देकर कहा कि म्यांमार की सरकार से अपेक्षा है कि वह रोहिंग्या मुसलमानों के अधिकारों को मान्यता प्रदान करेगी।

यह मांग उस समय की जा रही है कि जब अभी हाल ही में म्यांमार में बौद्धधर्म के मानने वाले अतिवादी तत्वों ने राख़ीन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों पर हमला किया जिसमें कुछ मुसलमान मारे गये।

म्यांमार की सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को अपना घर बार, खेत और कार्य स्थल आदि छोड़ देने और उन पर कब्ज़ा कर लेने के लक्ष्य से 60 के दशक से अपने दबावों को गम्भीर रूस से आरंभ कर दिया और वर्ष 2012 से उसके इस दबाव ने राजनीतिक और सुरक्षा रूप धारण कर लिया जिसमें अब तक हज़ारों रोहिंग्या मुसलमान मारे जा चुके हैं।

म्यांमार की सरकार न केवल रोहिंग्या मुसलमानों के अधिकारों को मान्यता नहीं प्रदान कर रही है बल्कि वह उन्हें बंगाली मूल का मानती है और वह चाहती है कि रोहिग्या मुसलमान बांग्लादेश चले जायें जबकि रोहिंग्या मुसलमान सैकड़ों साल से म्यांमार में रह रहे हैं और एक समय वह था जब उनके पास राजशाही व्यवस्था भी थी।

इस आधार पर रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या और उनके खिलाफ जो दूसरी कार्यवाहियां की जा रही हैं उन सबको म्यांमार में बौद्धधर्म के मानने वाले अतिवादी तत्वों की ओर से की जाने वाली कार्यवाही माना जाना चाहिये और उसका मूल लक्ष्य जातीय और धार्मिक सफाया है जबकि कुछ टीकाकारों का मानना है कि म्यांमार की सरकार वर्षों से इस देश में मुसलमानों के नस्ली सफाये की नीति अपनाये हुए है ताकि वह बौद्धधर्म के आधार पर एक देश का गठन कर सके।

बहरहाल रोचक बिन्दु यह है कि मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले पश्चिमी संगठनों व संस्थाओं ने अब भी म्यांमार में मुसलमानों के जनसंहार पर अर्थपूर्ण मौन धारण कर रखा है और वे म्यांमार की सरकार को मुसलमानों के अधिकारों को मान्यता दिलाने की दिशा में किसी प्रकार का कोई प्रयास नहीं कर रही हैं।

इस संबंध में कुछ टीकाकारों का मानना है कि म्यांमार में पश्चिमी सरकारों के हित हैं जिसके कारण उन्होंने इस देश में मुसलमानों की हत्या पर मौन धारण कर रखा है। MM