अमरीका में नस्लभेद के विरुद्ध प्रदर्शन
अमरीका में कई स्थानों पर हज़ारों लोगों ने नस्लभेद के विरुद्ध प्रदर्शन किये।
बोस्टन में हज़ारो अमरीकियों ने इस देश में बढ़ रहे नस्लभेद के विरोध में प्रदर्शन किये हैं। यह विरोध प्रदर्शन, श्वेत श्रेष्ठतावादियों की प्रस्तावित रैली के विरोध में किये गए। फ़्रांस प्रेस के अनुसार पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध बल प्रयोग की भी सूचना है। बहुत से प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर नस्लभेद के समर्थन का आरोप लगाया है। पिछले दो सप्ताहों के भीतर अमरीका में होने वाले सामाजिक और राजनैतिक परिवर्तनों ने बहुत से समीकरणों को बिगाड़ दिया है। शार्लोट्स्विले घटना के संबन्ध में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रतिक्रिया को एक राजनैतिक भूकंप के रूप में देखा जा रहा है। राजनैतिक टीकाकार, शार्लोट्स्विले घटना को अमरीका में नस्लभेद के पुनः भड़कने के आरंभ के रूप में देख रहे हैं।
टीकाकारों का कहना है कि अमरीका एेसा देश है जहां पर कम से कम पिछली दो शताब्दियों से नस्लभेद पाया जाता है और इस देश में नस्लभेद की जड़ें बहुत ही मज़बूत हैं। इस हिसाब से कहा जा सकता है कि अमरीका में जातिवाद या नस्लभेद कोई नई बात नहीं है। शार्लोट्स्विले घटना और इस घटना के बाद जो कुछ हुआ उसने अमरीका के भीतर नस्लभेद के आधार पर समाज के अंदर पाए जाने वाले मतभेदों को स्पष्ट किया है। वर्जीनिया में श्वेत श्रेष्ठतावादियों की रैली में जातिवादियों के हर वर्ग की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि ट्रम्प के वाइट हाउस पहुंचने से अमरीका में जातिवादियों को शक्ति मिली है। इस बारे में अमरीकी पत्रिका न्यूयार्कर के उस लेख कीओर संकेत किया जा सकता है जिसमें कहा गया है कि वर्तमान समय में अमरीका के भीतर कम से कम 900 गुट सक्रिय हैं। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि नस्लभेद के समर्थक इन गुटों यदि जल्दी नियंत्रित नहीं किया गया तो अमरीका के भीतर अल्पसंख्यकों विशेषकर अफ्रीकी मूल के लोगों का रहना दूभर हो जाएगा। इन्ही बातों के दृष्टिगत संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव ने शार्लोट्स्विले घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। एन्टोनियो गुटेरस ने अमरीका में जारी हिंसा की निंदा करते हुए कहा है कि इस देश में बढ़ता जातिवाद, सामाजिक वातावरण को दूषित कर रहा है। कुछ राजनैतिक टीकाकारों का यह कहना है कि जबतक नस्लभेद के समर्थकों की ओर से ट्रम्प का समर्थन जारी रहेगा उस समय तक अमरीका में सरकार की ओर से नस्लभेद के विरुद्ध किसी भी कार्यवाही की अपेक्षा करना व्यर्थ है।