ग्वांतानामों की जेल को बाकी रहना चिंताजनक हैः रूस
मानवाधिकार का विषय अपने प्रतिस्पर्धी और विरोधी देशों पर दबाव डालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी हथकंडा बन गया है।
संयुक्त राष्ट्रसंघ की मानवाधिकार परिषद परिषद की बैठक में रूसी विदेशमंत्री सरगेई लावरोफ़ ने कहा है कि ग्वांतानामों की जेल को बाकी रखने हेतु अमेरिकी सरकार का निर्णय चिंताजनक है और इस जेल में आरोपियों को मुकद्दमा चलाये बिना रखा जा रहा है।
साथ ही उन्होंने मानवाधिकारों के हनन के बारे में कहा कि कुछ देश अधिकतर दूसरे देशों पर एक पक्षीय आर्थिक प्रतिबंध के लगाने के लिए मानवाधिकार के हनन का प्रयोग एक हथकंडे के रूप में करते हैं।
मानवाधिकार का विषय अपने प्रतिस्पर्धी और विरोधी देशों पर दबाव डालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी हथकंडा बन गया है।
साथ ही संयुक्त राष्ट्रसंघ मानवाधिकार परिषद की ओर से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका विश्व में सबसे अधिक मानवाधिकारों का हननकर्ता है।
रोचक बात है कि अमेरिकी विदेशमंत्रालय अपनी वार्षिक रिपोर्टों में अधिकांशतः मानवाधिकार के संबंध में रूस के क्रिया- कलापों पर प्रश्न चिन्ह लगाता है जबकि इसके जवाब में रूस भी मानवाधिकार के संबंध में अमेरिकी क्रिया- कलापों पर सवाल उठाता है और वह ग्वांतानामों की जेल बाकी रखने को मानवाधिकारों के एक हनन के चिन्ह के रूप में देखता है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बारमबार ग्वांतानामों की जेल के बारे में चेतावनी दी है और कहा है कि 780 लोगों को इस जेल में वर्ष 2002 से बंदी बना कर रखा गया है। राष्ट्रसंघ के विशेषज्ञों ने बारमबार ग्वांतानामों की जेल को बंद करने का आह्वान किया है परंतु अमेरिकी अधिकारी न तो इस आह्वान पर कोई ध्यान देते हैं और न ही इस भयावह जेल को बंद कर रहे हैं।
यद्यपि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस जेल को बंद करने का वचन दिया था परंतु इस संबंध में उन्होंने कुछ नहीं किया।
बराक ओबामा ने कहा था कि ग्वांतानामों की जेल को बाक़ी रखना अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि को आघात पहुंच रहा है।"
बहरहाल ग्वांतानमों की भयावह जेल का बाकी रहना मानवाधिकार के संबंध में मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले देश अमेरिका के क्रिया- कलापों का एक नमूना है। MM