रूस के ख़िलाफ़ पश्चिम की कूटनैतिक जंग में तेज़ी का लक्ष्य
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रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ख़ारोवा ने सोमवार को इस बात का उल्लेख करते हुए कि रूस के पूर्व जासूस सिर्गेई स्क्रीपल के रासायनिक गैस से विषाक्त होने की योजना के पीछे अमरीका और ब्रिटेन का हाथ है, कहा कि हमने रूस के कूटनयिकों को निकालने वाले हर देश के लिए अलग अलग उपाय अपनाए हैं।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Mar २७, २०१८ १७:२० Asia/Kolkata

रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ख़ारोवा ने सोमवार को इस बात का उल्लेख करते हुए कि रूस के पूर्व जासूस सिर्गेई स्क्रीपल के रासायनिक गैस से विषाक्त होने की योजना के पीछे अमरीका और ब्रिटेन का हाथ है, कहा कि हमने रूस के कूटनयिकों को निकालने वाले हर देश के लिए अलग अलग उपाय अपनाए हैं।

सोमवार को अमरीका ने 60 रूसी कूटनयिकों को निकालने का एलान किया जिनमें 12 संयुक्त राष्ट्र संघ में रूसी कार्यालय के कर्मचारी हैं। योरोपीय संघ के 17 देशों ने कैनडा, ऑस्ट्रेलिया और युक्रेन के साथ लंदन के समर्थन में रूस के कुछ कूटनयिकों को निकाल दिया। कुल मिलाकर अब तक निकाले गए रूसी कूटनयिकों की संख्या 100 तक पहुंच गयी है। ब्रिटेन ने बिना सुबूत के कुछ दिन पहले रूस के 23 कूटनयिकों को निकाल दिया।

मॉस्को की नज़र में पश्चिमी देशों का यह क़दम पूर्व नियोजित है कि जिसका लक्ष्य रूस पर दबाव डालना और उसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग करना है।

टीकाकार दिमित्री इगोरचेन्कोफ़ का मानना है कि जासूस स्क्रीपल का मामला नेटो में विस्तार और रूस के ख़िलाफ़ पाबंदियों को बढ़ाना है।  इगोरचेन्कोफ़ की नज़र में अमरीका योरोप को रूस के ख़िलाफ़ जंग का अग्रिम मोर्चा समझता है।

मॉस्को इस बात पर बल देता है कि लंदन स्क्रीपल और उसकी बेटी के रासायनिक गैस से विषाक्त होने के मामले में रूस के सरकारी कर्मचारियों या सरकार के लिप्त होने के बारे में कोई ठोस सुबूत पेश नहीं कर सका है।

रासायनिक मामलों के विशेषज्ञ लियोनिड रिन्क का मानना है कि रूस को स्क्रीपल को गैस से विषाक्त करने से कोई फ़ायदा होने वाला न था क्योंकि मॉस्को रूस में राष्ट्रपति पद के चुनाव और फ़ुटबाल विश्व कप जैसी संवेदनशील परिस्थिति इस तरह का क़दम नहीं उठा सकता।(MAQ/T)