नैटो के अस्पष्ट भविष्य की ओर से इसके महासचिव की चेतावनी
जेन्स स्टोलेनबर्ग ने ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे से मुलाक़ात के बाद नैटो से अमरीका के निकलने की संभावना के बारे में कहा कि कोई भी यह बात निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि यह सैन्य गठजोड़ हमेशा बाक़ी रहेगा लेकिन इस संगठन के सभी 29 सदस्य इसे बाक़ी रखने व मज़बूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने नैटो के शिखर सम्मेलन के अवसर पर इस संगठन के सदस्य देशों के बीच समरसता की ज़रूरत पर बल दिया और आशा जताई कि व्यापार, पेरिस जलवायु समझौते, जेसीपीओए और नैटो के बजट में सदस्य देशों की भागीदारी जैसे विषयों के बारे में अन्य सदस्यों से अमरीका का मतभेद नैटो को कमज़ोर नहीं बनाएगा और सदस्य देश सुरक्षा व प्रतिरक्षा मामलों में एकजुट रहेंगे। उन्होंने यह आशा भी जताई कि यूरोप से अमरीका का व्यापारिक युद्ध इस संगठन को कमज़ोर नहीं पड़ने देगा। अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सन 2016 में चुनाव अभियान के दौरान और उसके बाद वाइट हाउस में पहुंचने के बाद कई बार नैटो के सदस्य देशों से मांग की है कि वे अपना सैन्य बजट बढ़ाएं और अगर उन्होंने एेसा नहीं किया तो उनके साथ कड़ाई से पेश आया जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा है कि नैटो एक बेकार हो चुका सैन्य संगठन है।
इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था कि नैटो के 29 सदस्यों में से 23 देशों ने अब भी अपने सकल घरेलू उत्पाद का दो प्रतिशत भी सैन्य मामलों के लिए विशेष नहीं किया है। ट्रम्प का इशारा सबसे अधिक जर्मनी की ओर है जिसे यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था समझा जाता है। हालांकि जर्मन चांसलर एंगला मर्कल ने अपने देश का सैन्य बजट बढ़ाने की बात की है लेकिन व्यवहारिक रूप से जर्मनी ने इस संबंध में कुछ नहीं किया है। बहरहाल ट्रम्प के कड़े रवैये पर नैटो के महासचिव ने भी प्रतिक्रिया दिखाई है और संगठन के अस्पष्ट भविष्य की ओर से चेतावनी दी है जिससे पता चलता है कि वे नैटो के बारे में ट्रम्प की बातों से असंतुष्ट हैं। (HN)