उत्तरी कोरिया की ओर से अमरीका को दो टूक जवाब
अमरीकी विदेशमंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा है कि उत्तरी कोरिया ने अपनी परमाणु क्षमता में 60 से 70 प्रतिशत की कमी करने के वाशिंग्टन के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।
अमरीकी विदेशमंत्री ने कहा कि हमें उत्तरी कोरिया की ओर से 60 से 70 प्रतिशत परमाणु निशस्त्रीकरण स्वीकार है मगर उत्तरी कोरिया के नेता ने इसे स्वीकार नहीं किया ।
कुछ टीकाकारों का कहना है कि कीम जोंग ऊन के पिता के साथ किये समझौते का बिल क्लिंटन द्वारा उल्लंघन इस बात का कारण बना है कि इस समय उत्तरी कोरिया, अमरीका पर भरोसा न करे।
वास्तव में अमरीका और उत्तरी कोरिया के मध्य वार्ता अच्छी तरह से आगे नहीं बढ़ रही है और वाइट हाउस को वार्ता प्रक्रिया की ओर से कड़ी चिंता है। इसी के साथ अमरीकी विदेशमंत्री के बयान से यह भी सिद्ध होता है कि अमरीका , उत्तरी कोरिया के सम्पूर्ण निशस्त्रीकरण की अपनी शर्त से पीछे हट गया है। उत्तरी कोरिया के खिलाफ धमकियों का जारी रहना, कोरिया प्रायद्वीप में अमरीका और उसके घटकों के सैन्य अभ्यास, उत्तरी कोरिया के खिलाफ अमरीकी अधिकारियों के अपमानजनक बयान और इन सब से अधिक महत्वपूर्ण, ईरान के मामले में अमरीका की ओर से उल्लंघन और जेसीपीओए से निकलना, वह घटनाएं हैं जिनमें से एक ही घटना, अमरीका पर अविश्वास और वार्ता बीच में में ही छोड़े जाने का कारण हो सकती है। टीकाकारों के अनुसार उत्तरी कोरिया के नेता कीम जोंग ऊन ने जेसीपीओए के बारे में अमरीकी व्यवहार की वजह से भी इस देश के साथ वार्ता का विचार छोड़ दिया। अमरीका के वरिष्ठ सेनेटर बेन कार्डेन के अनुसार अमरीका पर भरोसा न करने की ईरान की दलील का सही होना, अमरीका के जेसीपीओए से निकलने के बाद साबित हो गया।
दर अस्ल जेसीपीओए और परमाणु समझौते से संबंधित जो घटनाक्रम था और उस पर ईरानी अधिकारियों की ओर से दी जाने वाली चेतावनियों की वजह से उत्तरी कोरिया सचेत हो गया और इसके बाद उत्तरी कोरिया की ओर से कई सकारात्मक क़दमों के बाद भी अमरीका ने कोई सकारात्मकता नहीं दिखायी इस लिए वह इस निष्कर्ष पर पहुंच गया कि वार्ता को उसी दशा में आगे बढ़ाएगा जब द्वपक्षीय क़दम निश्चित होंगे। एेसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रम्प की अंतरराष्ट्रीय नीतियां पूरी तरह से विफल हो चुकी हैं। (Q.A.)