ट्रंप ने अब अल्पसंख्यों की स्थिति पर घड़ियाली आंसू बहाया
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ईरान में मान्यता प्राप्त धार्मिक अल्प संख्यकों को वह समस्त अधिकार प्राप्त हैं जो दूसरे ईरानी नागरिकों को प्राप्त हैं और ईरानी संविधान में धार्मिक अल्प संख्यकों के अधिकारों पर बल दिया गया है और ईरानी संसद में 5 अल्प संख्यक सांसद भी हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २०, २०१८ ११:४६ Asia/Kolkata

ईरान में मान्यता प्राप्त धार्मिक अल्प संख्यकों को वह समस्त अधिकार प्राप्त हैं जो दूसरे ईरानी नागरिकों को प्राप्त हैं और ईरानी संविधान में धार्मिक अल्प संख्यकों के अधिकारों पर बल दिया गया है और ईरानी संसद में 5 अल्प संख्यक सांसद भी हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सुर में सुर मिलाते हुए इस देश के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने ईरान में धार्मिक अल्पसंख्यों की स्थिति पर घड़ियाली आंसू बहाया है।

ईरानी संसद मजलिसे शुराये इस्लामी में धार्मिक अल्प संख्यक सांसदों ने एक बयान जारी करके बल देकर कहा है कि ईरान में धार्मिक अल्प संख्यकों के अधिकारों के बारे में अमेरिकी विदेशमंत्री का हालिया बयान मौजूद वास्तविकताओं से मेल नहीं खाता है और उसे केवल राजनीतिक कारणों से दिया गया है।

ईरानी संसद मजलिसे शुराये इस्लामी में धार्मिक अल्प संख्यक सांसदों की ओर से जारी की गयी विज्ञप्ति में कहा गया है कि धार्मिक कार्यों को अंजाम देने की दृष्टि से पूर्णरूप से ईरान में धार्मिक एवं सामाजिक आज़ादी प्राप्त है और विभिन्न धर्मों के लोग शांतिपूर्ण ढंग से एक दूसरे के साथ रह रहे हैं।

ईरान में मान्यता प्राप्त धार्मिक अल्प संख्यकों को वह समस्त अधिकार प्राप्त हैं जो दूसरे ईरानी नागरिकों को प्राप्त हैं और ईरानी संविधान में धार्मिक अल्प संख्यकों के अधिकारों पर बल दिया गया है और ईरानी संसद में 5 अल्प संख्यक सांसद भी हैं।

अमेरिका ऐसी स्थिति में ईरान में धार्मिक अल्प संख्यकों की स्थिति पर चिंता जता रहा है जब उसने मानवाधिकारों की रक्षा की आड़ में अपने वास्तविक चेहरे को छिपा रखा है।

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ अता बहरामी इस संबंध में कहते हैं कि बड़े खेद की बात है कि कुछ अमेरिकी गिरजाघरों में नस्लीभेद भाव और काले व अश्वेत लोगों के अधिकारों के कम होने को स्वीकार कर लिया गया है जबकि इन गिरजाघरों को एकेश्वरवाद और समानता की बात करनी चाहिये।

रोचक बात यह है कि इस्लामी मानवाधिकार में रंग, जाति, भाषा आदि किसी प्रकार के भेदभाव का कोई स्थान नहीं है और समस्त इंसान एक सृष्टि के स्वामी हैं और सबको समान अधिकार प्राप्त हैं।

वास्तविकता यह है कि अमेरिकी समाज में नस्लीभेद मौजूद होने के बावजूद इस देश की सरकार स्वयं को मानवाधिकारों की रक्षक समझती है और अमेरिकी सरकार और मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले, ईरानी संविधान पर एक दृष्टि भी डालने के लिए तैयार नहीं हैं जिसमें लोगों के अधिकारों और समस्त ईश्वरीय धर्मों के सम्मान पर बल दिया गया है।

बहरहाल जो चीज़ पूछी जानी और उसकी आलोचना की जानी चाहिये वह सऊदी अरब, बहरैन,यमन और ग़ज़्जा पट्टी में नस्ली सफाया और बच्चों एवं महिलाओं की हत्या पर अमेरिका की अर्थपूर्ण चुप्पी और अमेरिका द्वारा नस्लभेदी इस्राईल का समर्थन है और उसके क्रिया- कलाप इस बात के सूचक हैं कि अमेरिकी राजनेता मानवाधिकारों के सिद्धांतों के प्रति कटिबद्ध नहीं हैं। MM