दोनों कोरियाओं के बीच शांति के मार्ग में मुख्य रुकावट
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए इन ने न्यूयॉर्क में अमरीकी विदेश संबंध परिषद की बैठक में कहा कि दोनों कोरिया एक देश हैं और कोरिया प्रायद्वीप में शांति व सुरक्षा चाहते हैं।
उन्होंने बल दिया कि दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया की जनता एक दूसरे लिए अजनबी नहीं है बल्कि 5000 साल से एक साथ जीवन बिता रही है।
मून जाए इन जो अभी हाल में उत्तर कोरिया गए थे, दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपतियों के विपरीत दोनों कोरियाई देशों के बीच एकता के लिए गंभीर हैं और उनका मानना है कि दोनों कोरियाई देश अपनी क्षमता के मद्देनज़र एजकुट देश के रूप में क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मामलों में प्रभावी रोल निभा सकते हैं।
इस दृष्टिकोण के अनुसार, सैन्य दृष्टि से मज़बूत उत्तर कोरिया और आर्थिक दृष्टि से मज़बूत दक्षिण कोरिया के बीच अगर एकता हो जाए तो वे क्षेत्र का अहम देश बन सकते हैं। इसी वजह से दोनों देशों की जनता दोनों देशों के बीच मित्रता चाहती है।
इस बात के मद्देनज़र कि पूर्वी एशिया और कोरिया प्रायद्वीप में अमरीका अपनी मौजूदगी और चीन पर सैन्य, आर्थिक व राजनैतिक दबाव को जारी रखने के लिए उत्तर कोरिया को हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करता है, किसी भी स्थिति में दोनों कोरियाई देशों के बीच एकता नहीं चाहता और उसने दोनों कोरियाई देशों के बीच तनाव को ख़त्म करने के लिए छह पक्षीय बातचीत सहित क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कोशिशों को नाकाम बनाने के लिए हमेशा कोशिश की है ताकि इस तरह दक्षिण कोरिया और जापान में अपनी मौजूदगी का औचित्य दर्शाए।
रूस के सुदूर पूर्व अध्ययन केन्द्र के अधिकारी एलेक्सान्द्र जेबेन का मानना है कि अमरीका कोरिया प्रायद्वीप में संकट के जारी रहने का इच्छुक है और उसके तथा उसके घटकों की ओर से उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ की गयी एकपक्षीय कार्यवाही का लक्ष्य ही दोनों कोरियाओं को एक दूसरे के निकट आने से रोकना है।(MAQ/T)