ट्रम्प, युद्धोन्मादी राष्ट्रपति का युद्ध के लिए वीटो
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यमन युद्ध में अमरीकी सहयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले क्रांगेस के बिल को वीटो कर दिया और इस तरह से एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि अमरीका, यमन में सऊदी अरब के सभी अपराधों में पूरी तरह से भागीदार है।
ट्रम्प ने एक बयान जारी करके, कांग्रेस के बिल को, अपने अधिकार कम करने की खतरनाक और अनावश्यक कोशिश बताया है। हालांकि अमरीका और उसके पश्चिमी घटकों ने यमन के खिलाफ सऊदी गठबंधन के युद्ध के आरंभ से ही पूरी तरह से सहयोग किया है किंतु सऊदी पत्रकार, जमाल खाशुक़जी की हत्या के बाद विश्व स्तर पर और स्वंय अमरीका के भीतर जिस प्रकार से सऊदी अरब के खिलाफ माहौल बना उसकी वजह से यमन युद्ध में सऊदी अरब के साथ अमरीका के सहयोग पर भी गंभीरता के साथ सवाल उठाए जाने लगे और यही वजह है कि कांग्रेस, ने यमन में अमरीकी सहयोग रोके जाने का बिल तैयार किया है। अमरीकी कांग्रेस की प्रमुख नेन्सी प्लोसी ने इस बात पर बल देते हुए कि यह विवाद को यहीं पर खत्म हो जाना चाहिए कहा कि , संसद, राष्ट्रपति से यह चाहता है कि शांति को नीतियों में प्राथमिकता दें और इस संकट के अंत और इन्सानों की प्राणों की रक्षा में हमारे साथ सहयोग करें। एमेनेस्टी इन्टरनेश्नल ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि पश्चिमी देशों को, हथियार बेचने से होने वाले लाभ के बजाए, यमन केक लाखों आम नागरिकों और उनके प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को प्राथमिकता देना चाहिए। इन हालात में ट्रम्प ने कांग्रेस को याद दिलाया है कि युद्ध जारी रखने के बारे में फैसला, राष्ट्रपति का अधिकार है और कांग्रेस में इस में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यह एेसी हालत में है कि बिल तैयार करने वालों का कहना है कि यमन युद्ध में अमरीका का सहयोग, संविधान का उल्लंघन है क्योंकि संविधान के अनुसार किसी युद्ध में अमरीका के भाग लेने के लिए राष्ट्रपति नहीं बल्कि, कांग्रेस की अनुमति ज़रूरी होती है। अमरीका में भले ही विरोध हो रहा है किंतु, अमरीका के अरब घटकों ने ट्रम्प के इस क़दम का स्वागत किया है। यूएई के विदेशमंत्री अनवर क़रक़ास ने ट्रम्प द्वारा बिल को वीटो किये जाने को सही समय पर रणनीतिक फैसला बताया और कहा है कि यमन में अरब गठबंधन का, ट्रम्प द्वारा समर्थन, सकारात्मक संकेत है। (Q.A.)