अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता टकराव, ऊंट किस करवट बैठेगा?
https://parstoday.ir/hi/news/world-i96562-अमेरिका_और_चीन_के_बीच_बढ़ता_टकराव_ऊंट_किस_करवट_बैठेगा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में चीन और अमेरिका के संबंधों में पैदा हुई कड़वाहट के बारे में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि जो बाइडेन के सत्ता संभालने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ती दूरियों में कुछ कमी आएगी लेकिन हालिया दिनों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा दिए गए बयानों से उस उम्मीदों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar २२, २०२१ ०९:४८ Asia/Kolkata
  • अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता टकराव, ऊंट किस करवट बैठेगा?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में चीन और अमेरिका के संबंधों में पैदा हुई कड़वाहट के बारे में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि जो बाइडेन के सत्ता संभालने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ती दूरियों में कुछ कमी आएगी लेकिन हालिया दिनों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा दिए गए बयानों से उस उम्मीदों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है।

वॉशिंग्टन और बीजिंग के बीच बातचीत की जैसी शुरुआत हुई है उससे लगता चीन के विदेश मंत्री वांग यी और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के प्रमुख यांग जेइची की अमेरिका यात्रा दोनों देशों के संबंधों में और कड़वाहट घोल देगी। अमेरिका के अलास्का प्रांत के एंकरेज में अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकेन और राष्ट्रपति जो बाइडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सलीवान के साथ चीनी नेताओं की मुलाक़ात रूखे माहौल में हुई। दोनों पक्षों के बीच यह तय था कि बैठक की शुरुआत वह बारी-बारी से मीडिया को दो-दो मिनट के वक्तव्य देकर करेंगे, लेकिन बात यहीं से बिगड़ने लगी। अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन ने चीनी सरकार के द्वारा हाल में उठाए कुछ क़दमों पर चिंता जताई जिसमें शिनजियांग, ताइवान और हांगकांग में मानवाधिकार उल्लंघनों का उल्लेख भी था। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन से लगातार अमेरिका की सरकारी संस्थानों और कंपनियों पर साइबर हमले हो रहे हैं और अमेरिका इन बातों से चिंतित है क्योंकि यह घटनायएं नियमबद्ध अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को चोट पहुंचा रही हैं। हालांकि इसमें कुछ नया नहीं था क्योंकि ट्रम्प सरकार की तर्ज़ पर ही बाइडेन सरकार भी इन मुद्दों को पूरी ताक़त से उठाती आ रही है, लेकिन वहीं चीनी इन आरोपों का खंडन करता आया है और अब एक बार फिर अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उसपर इस तरह के आरोप लगाए जाने से वह नाराज़ हो गया है।

कूटनीति में बिन बात तैश में आने का कोई काम नहीं मगर चीनी पक्ष को ब्लिंकेन की बात नागवार गुज़री और जवाब में चीन के नेता यांग जेइची ने अमेरिकी नीतियों की मुंहतोड़ जवाब देते हुए काफी कुछ कह डाला। उन्होंने कहा कि अमेरिका का ख़ुद का इतिहास मानवाधिकार उल्लंघनों से भरा है, ख़ास तौर पर अश्वेत अमेरिकी नागरिकों को लेकर। दो मिनट के बजाय लगभग आठ मिनट के इस लम्बे वक्तव्य में यांग जेइची ने अमेरिकी सरकार को मानवाधिकार मुद्दे पर पहले अपने गिरेबान में झांकने की नसीहत दी और साथ ही यह भी कह डाला कि अमेरिकी लोकतंत्र में भी खामियां बहुत हैं और अब तो अमेरिकी नागरिक भी इससे असंतुष्ट हैं। जानकारों का मानना है कि अमेरिका और चीन के अधिकारियों के बीच इस तरह के टकराव किसी भी मंत्री स्तरीय वार्ता के लिए काफ़ी बुरी शुरुआत है। जानकारों के मुताबिक़, विश्व राजनीति के दो धुरंधरों की बैठक में ऐसा क्या हुआ कि बात इतनी बिगड़ गई? सबसे पहली बात तो यही है कि चीन ने सोचा था कि अब जब कि डोनल्ड ट्रम्प सत्ता में नहीं रहे और जो बाइडेन सत्ता में आ चुके हैं, बीजिंग और वॉशिंग्टन के बीच सब कुछ ठीक हो जायेगा। बाइडेन सरकार की ओर से चीन पर आ रहे वक्तव्यों को चीन ने गंभीरता से नहीं लिया, अमेरिकी शासन व्यवस्था के किताबी ज्ञान के अनुसार तो रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सरकारों की विदेश नीतियों में व्यापक अंतर होने चाहिए लेकिन बाइडेन सरकार ने कुछ भी नहीं बदला है।

उल्लेखनीय है कि, चीन और अमेरिका के बीच पिछले काफी समय से तनातनी बनी हुई है जिसकी शुरुआत लगभग तीन साल पहले ट्रम्प के कार्यकाल में ही हो गयी थी। ट्रम्प के राष्ट्रपति रहते ही अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध छिड़ा जो समय के साथ और ज़्यादा तल्ख़ होता चला गया। पिछले 2-3 वर्षों में अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर जहां इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को मज़बूत प्रयास किया है वहीं अमेरिका ने भारत, जापान, अमेरिका और आस्ट्रेलिया के साझा सामरिक सहयोग के मंच क्वाड को भी मज़बूती देने का काम किया है। साथ ही चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताक़त को भी अन्देखा नहीं किया जा सकता, जिस बात को ट्रम्प नहीं समझ रहे थे उसको बाइडेन समझ तो रहे हैं लेकिन हाल के दिनों में दोनों देशों की ओर से आने वाले बयानों ने एक बार फिर से बीजिंग और वॉशिंग्टन के बीच बढ़ते टकराव को दुनिया के सामने ला दिया है और दुनिया की इन दो महाशक्तियों के बीच बढ़ती कड़वाहट जहां उनके लिए अच्छी ख़बर नहीं है वहीं विश्व की शांति व स्थिरता के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। (RZ)

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए