क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-814
क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-814
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّقُوا مَا بَيْنَ أَيْدِيكُمْ وَمَا خَلْفَكُمْ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ (45) وَمَا تَأْتِيهِمْ مِنْ آَيَةٍ مِنْ آَيَاتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ (46)
और जब इनसे कहा जाता है कि उस (अंजाम) से डरो जो तुम्हारे आगे आ रहा है और जो तुम्हारे पीछे (गुज़र चुका) है, ताकि शायद तुम पर दया की जाए, (तो ये सुनी अनसुनी कर देते हैं।) (36:45) इनके सामने इनके पालनहार की आयतों में से जो आयत भी आती है, ये उससे मुंह मोड़ने के अलावा कुछ नहीं करते। (36:46)
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ أَنْفِقُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ قَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آَمَنُوا أَنُطْعِمُ مَنْ لَوْ يَشَاءُ اللَّهُ أَطْعَمَهُ إِنْ أَنْتُمْ إِلَّا فِي ضَلَالٍ مُبِينٍ (47)
और जब इनसे कहा जाता है कि ईश्वर ने जो कुछ रोज़ी तुम्हें दी है उसमें से (कुछ ईश्वर के मार्ग में भी) ख़र्च करो। तो ये लोग, जिन्होंने कुफ़्र अपनाया है, ईमान वालों से कहते हैं कि क्या हम उनको खिलाएँ जिन्हें अगर ईश्वर चाहता तो ख़ुद खिला देता? तुम तो बिलकुल ही बहक गए हो। (36:47)
وَيَقُولُونَ مَتَى هَذَا الْوَعْدُ إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ (48) مَا يَنْظُرُونَ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً تَأْخُذُهُمْ وَهُمْ يَخِصِّمُونَ (49) فَلَا يَسْتَطِيعُونَ تَوْصِيَةً وَلَا إِلَى أَهْلِهِمْ يَرْجِعُونَ (50)
और ये लोग कहते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (बताओ कि) प्रलय का यह वादा कब पूरा होगा? (36:48) ये लोग जिस चीज़ की प्रतीक्षा में हैं वह तो बस एक (बड़े धमाके की) आवाज़ है, जो इन्हें अचानक ही उस समय धर लेगी, जब ये (सांसारिक मामलों में) झगड़ रहे होंगे। (36:49) तो उस समय न तो ये कोई वसीयत कर पाएँगे और न अपने घर वालों की ओर लौट सकेंगे। (36:50)