मंगलवार - 5 मई
5 मई सन 1818 ईसवी को जर्मनी के दार्शनिक और मार्कसिज़्म विचारधारा के संस्थापक कार्ल मार्क्स का जन्म हुआ।
5 मई सन 1818 ईसवी को जर्मनी के दार्शनिक और मार्कसिज़्म विचारधारा के संस्थापक कार्ल मार्क्स का जन्म हुआ। उन्होंने पहले कानून और फिर दर्शनशास्त्र एवं इतिहास की शिक्षा प्राप्त की। वे कुछ समय तक एक पत्रिका के संपादक रहे और सन 1848 में अपने एक साथी फ़्रिडरेश ऐंगलस के साथ मिलकर उन्होंने एक पुस्तक में अपने विचारों और दृष्टिकोणों को प्रस्तुत किया। राजनैतिक गतिविधियों के कारण उन्हें दो वर्ष बाद जर्मनी से देश निकाला दे दिया गया। जिसके बाद अंतिम आयु तक वे ब्रिटेन में रहे । उनकी महत्वपूर्ण पुस्तकों में कम्युनिस्ट मेनिफ़ेस्टो और दास कैपिटल है। उनका मानना था कि विश्व में पूंजीवाद का पतन होगा और मज़दूर वर्ग की सरकार बनेगी जो वर्गरहित समाज के लिए कार्य करेगी। मार्क्स सन 1883 में मर गये किंतु उनका दृष्टिकोण बाद तक चर्चा में रहा सन 1990 में पूर्व सोवियत संघ के विघटन के पश्चात मार्क्स की भविष्यवाणियों की पोल खुलती गयी।
- 5 मई सन् 1260 में कुबलाई खां मंगोल साम्राज्य का राजा बना।
- 5 मई सन् 1762 में रूस और प्रशा (अब जर्मनी का एक स्टेट) ने सेंट पीटर्सबर्ग शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया।
- 5 मई सन् 1809 में मैरी किज यूएस पेटेंट कराने वाली पहली महिला बनीं।
- 5 मई सन् 1836 में बेल्जियम में यूरोप की पहली रेल लाईन शुरू हुई थी।
- 5 मई सन् 1883 में भारत के सुरेन्द्र नाथ बनर्जी जेल जाने वाले पहले पत्रकार बने।
- 5 मई सन् 1912 में स्वीडन के स्टॉकहोम में पाँचवें ओलंपिक खेलों की शुरुआत हुई। तभी से ओलम्पिक खेलों के उद्घाटन समारोह और समापन समारोह की परम्परा बनी।
- 5 मई सन् 1919 में पेरिस में रेडक्रॉस सोसाइटी की स्थापना हुई।
- 5 मई सन् 1926 को पहली बार जर्मनी में आइन्सटीन की फिल्म बैटलशिप पोटेमकिन दिखाई गई।
- 5 मई सन् 1932 में जापान और चीन ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये।
- 5 मई सन् 1936 में इटली के सैनिकों ने इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा पर कब्ज़ा किया।
- 5 मई सन् 1944 में महात्मा गांधी को जेल से रिहा किया गया।
- 5 मई सन् 1951 में ब्रिटेन में वह पहला कम्प्यूटर प्रदर्शित किया गया था, जो खेलने के लिए बनाया गया था।
- 5 मई सन् 1961 को कमांडर एलन शेफर्ड अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अमेरिकी बने।
- 5 मई सन् 1980 में लंदन में स्थित ईरानी दूतावास को कुछ हमलावरों से आज़ाद कराया गया था।
- 5 मई सन् 1984 में फु दोरजी बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय बने।
- 5 मई सन् 1988 को एवरेस्ट की चोटी से पहला टेलीविज़न प्रसारण किया गया।
5 मई सन 1821 ईसवी को फ़्रांस के शक्तिशाली तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट का निधन हुआ। वे सन 1769 ईसवी में जन्में और सन 1789 नवासी में फ़्रांस की क्रान्ति के पश्चात उन्होंने सत्ता संभाली और अधिकांश योरोपीय देशों के साथ युद्ध करके फ़्रांस को विजय दिलाई। अपनी सीमाओं के विस्तार और उपनिवेश की संख्या में वृद्धि की लालच में इस फ़्रांसीसी तानाशाह ने बहुत से देशों पर युद्ध थोपा और योरोप के बड़े भाग को अपने अधिकार में कर लिया। सन 1812 में नेपोलियन ने रुस पर आक्रमण किया और रुस ब्रिटेन तथा ऑस्ट्रिया की सेना से मुकाबले में पराजित होने के बाद बोनापार्ट की शक्ति क्षीण होना आरंभ हो गयी और सन 1814 ईसवी में उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी। उन्हें देश निकाला देकर एल्बा नामक द्वीप भेज दिया गया और वहॉं का शासन भी बोनापार्ट के हवाले कर दिया गया किंतु वो इस द्वीप में अधिक दिनों तक न ठहरे और भाग कर फ़्रांस चले गए और 100 दिनों तक दोबारा फ़्रांस पर शासन किया। उनका यह शासन वाटरलू नामक लड़ाई के बाद समाप्त हुआ और ब्रिटेन की सेना ने नेपोलियन को कैद कर लिया और देश निकाला देकर उन्हें सेन्ट हेलन द्वीप भेज दिया जहॉं ६ वर्ष के बाद बोनापार्ट की मृत्यु हो गयी।

5 मई वर्ष 1913 ईसवी को अफ़्रीक़ी देश गिनी पर फ़्रांसीसी सेना का नियंत्रण हो गया किन्तु सन 1946 में गिनी ने अपनी स्वाधीनता की घोषणा कर दी और अंततः वर्षों के प्रयास के बाद वर्ष 1958 में इस देश ने पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त कर ली और अहमद सोकोतूरे इस देश के पहले राष्ट्रपति बने।
5 मई वर्ष 1930 ईसवी को ब्रिटिश महिला एमी जानसन ने संसार की पहली महिला विमान चालक होने का श्रेय प्राप्त किया। एमी जानसन ने जिस जहाज़ से यह कारनामा अंजाम दिया वह (Single engine) विमान था। उन्होंने लंदन के निकट क्रायोडोन(croyodon) के स्थान से अपनी यात्रा आरंभ की और तुर्की व बग़दाद होते हुए पाकिस्तान के कराची नगर पहुंची। कराची से एक कठिन पहाड़ी मार्ग से वह रंगून पहुंची और अंततः जावा सी को पार करते हुए आस्ट्रेलिया के नगर डारविन पहुंची जहां उनका भरपूर स्वागत किया गया। एमी जानसन ने अपनी पहली यात्रा का आरंभ पांच मई वर्ष 1930 को किया था वह 24 मई वर्ष 1930 को डारविन पहुंची। वर्ष 1941 में उनका देहान्त हो गया।
5 मई सन 1981 ईसवी को आयरलैंड की संघर्षकर्ता बॉबी सैन्ड्रज़ सप्ताहों के संघर्ष और ब्रिटेन की जेल में 66 दिन की भूख हड़ताल के बाद मर गयीं। जेल में सैन्ड्रज़ और उनके कुछ साथियों की भूख हड़ताल में मौत होने पर ब्रिटेन के साम्राज्य का इस देश के भीतर और बाहर कड़ाई से विरोध किया गया। इसी प्रकार इन नेताओं की मृत्यु से आयरलैंड का संकट और गहराया।

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16 उर्दीबहिश्त सन 324 हिजरी शम्सी को आले बूये शासन श्रंखला के एक शासक रूकनुद्दौला दौलती का निधन हुआ। आले बूये शासन श्रंखला ईरान का प्रसिद्ध मुसलमान परिवार है जिसने इस्लामी ज्ञान और संस्कृति की उल्लेखनीय सेवाएं की। आले बूये शासन के राजा अपने काल के विद्वानों और साहित्यकारों का बहुत सम्मान व आदर किया करते थे और अपने लिए विदान मंत्रियों का चयन किया करते थे। इस परिवार के राजाओं ने बहुत सी यादगार चीज़ें छोड़ी हैं जिनमें बग़दाद का अज़ोदी अस्पताल और दसियों अन्य अस्पतालों और धार्मिक शिक्षा केन्द्रों व स्कूलों का नाम लिया जा सकता है। इसी प्रकार इस श्रृंखला के राजा महाराजाओं ने धार्मिक संस्कारों पर भी विशेष ध्यान दिया।
16 उर्दीबहिश्त सन 1280 हिजरी शम्सी को ईरान के एक प्रसिद्ध धर्मगुरू आयतुल्लाह रूहुल्लाह कमालवंद, ख़ुर्रमाबाद में जन्मे। आरंभिक शिक्षा ख़ुर्रमाबाद में ग्रहण करने के बाद वह बुरूजर्द गये और वहां उन्होंने प्रसिद्ध व महान धर्मगुरू सैयद हुसैन बुरूजर्दी से ज्ञान प्राप्त किया। उसके बाद उन्होंने अराक में आयतुल्लाह शैख़ अब्दुल करीम हायरी से ज्ञान प्राप्त किया। फिर वह अपने गुरू के साथ पवित्र नगर क़ुम गये। क़ुम में आयतुल्लाह बूरूजर्दी के आने के बाद आयतुल्लाह कमालवंद दोबारा उनसे ज्ञान प्राप्त करने लगे। इस्लामी क्रांति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी और आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद रज़ा गुलपायगानी उनके सहपाठी थे। वर्ष 1330 हिजरी शम्सी में वह ख़ुर्रमाबाद के लोगों के बहुत अधिक अह्वान पर अपने पैतृक गांव लौट गये जहां उन्होंने धार्मिक शिक्षा के केन्द्र की स्थापना की और अंतिम सांस तक धर्म के प्रचार व प्रसार का दायित्व निभाते रहे। 63 वर्ष की आयु में उनका स्वर्गवास हो गया। उन्हें क़ुम में हज़रत इमाम रज़ा की बहन हज़रत मासूमा क़ुम के मक़बरे के प्रांगड़ में दफ़्न किया गया।
16 उर्दीबहिश्त सन 1354 हिजरी शम्सी को ईरान के मुजाहेदीन खल्क संगठन के सदस्य मजीद शरीफ़ वाक़ेफ़ी को इस संगठन के ही कुछ सदस्यों ने मार दिया। यह संगठन सन 1344 हिजरी शम्सी में शाह के शासन से सशस्त्र संघर्ष करने के लिए कुछ युवाओं द्वारा बनाया गया। किंतु इस संगठन के कुछ कमज़ोर ईमान वाले सदस्य धीरे - धीरे मार्कसिस्ट विचारधारा से प्रभावित होते गये और इस संगठन का नेतृत्व हथियाने के लए उन्होंने संगठन में इस्लामी रुझान रखने वालों की हत्या आरंभ कर दी। सन 1357 हिजरी शम्सी में ईरान में इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद उस गुट के नेता जो सत्ता के लिए लालायित थे इस्लामी क्रान्ति के विरुद्ध गतिविधियों में संलग्न हो गये और 1360 हिजरी शम्सी से इस संगठन ने ईरानी अधिकारियों के विरुद्ध अंधाधुध आतंकवादी कार्रवाइया आरंभ कर दीं। इसी प्रकार सड़कों और गलियों में आम लोगों की हत्याएं भी होने लगीं। किंतु ईरानी अधिकारियों और जनता की सूझ बूझ वाली कार्यवाहियों के बाद इस संगठन को ईरान छोड़ देना पड़ा।
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11 रमज़ान सन 853 हिजरी क़मरी को मिस्र के विख्यात इतिहासकार साहित्यकार और धर्मगुरु इब्राहीम कर्की का क़ाहेरा नगर में निधन हुआ। आरंभिक शिक्षा के पश्चात वे उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विभिन्न शिक्षा केद्रों में गए और इस प्रकार उन्होंने विभिन्न विषयों का व्यापक ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं हैं जिनमें ऐराबुल मुफ़स्सल का नाम लिया जा सकता है जो कुरआन के विषय में लिखी गई है।