May ०८, २०१६ ०६:०० Asia/Kolkata

8 मई सन 1933 ईसवी को महात्मा गांधी ने भारत में ब्रिटेन के अत्याचार के ख़िलाफ़ 21 दिन की भूख हड़ताल शुरू की।

8 मई सन 1945 ईसवी को जर्मनी के जनरल विलहेलम कीटेल ने औपचारिक रूप से घटक देशों के सामने बर्लिन में हथियार डाल दिए। घटक देशों में अमरीका, ब्रिटेन और सोवियत संघ शामिल थे।

8 मई सन 1948 ईसवी को महान क्रिकेटर सर डान ब्रेडमैन ने 174 मिनट में 15 चौकों के साथ धुआंधार 146 रन बनाए।

8 मई वर्ष 1874 ईसवी को आधुनिक शायरी का पहला कवि सम्मेलन आरंभ हुआ। 8 मई वर्ष 1874 ईसवी को आधुनिक शायरी का पहला कवि सम्मेलन आरंभ हुआ। इसका सुझाव मौलाना मुहम्मद हुसैन आज़ाद ने पेश किया। सम्मेलन में मौलाना आज़ाद ने अपना नया दृष्टिकोण पेश किया जिसमें उन्होंने उर्दू शायरी, साहित्यिक मापदंड में क्रांति और शायरों के उद्देश्यों में परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया गया नई शायरी के पहले सम्मेलन ने उत्साह उत्पन्न कर दिया और लोग दूर दूर से इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए आने  लगे। उन्हें ज्ञात ही नहीं था कि नई शायरी के संस्थापकों के प्रयास, प्राचीन दुखद शायरी का बोरिया बिस्तरा ही बांध देंगे।

 

 

8 मई सन 1794 ईसवी को फ़्रांस के वैज्ञानिक एन्टोनिए लावाज़िए को फ़्रांस की क्रान्ति के बाद ग्यूटीन से मृत्यू दंड दे दिया गया। उनका जन्म वर्ष 1743 में हुआ था। वे बड़े होकर फ़्रांस अकादमी के सदस्य बन गए। अपने अनुसंधानों के दौरान लावाज़िए ने हवा का विशलेषण किया तथा उसके तत्वों को चिन्हित किया। उन्होंने पता लगाया कि आक्सीजन गैस तथा आग के जलने में उसका महत्व क्या है। इस अनुसंधान के बाद थर्मोकेमिकल साइंस का आधार रखा गया।

लावाज़िए ने कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें जलप्रकृति, फ़ास्फ़ोरस एवं गंधक का ज्वलन विश्लेषण आदि का नाम लिया जा सकता है।

 

 

8 मई सन 1945 ईसवी को जर्मनी के हथियार डाल देने के साथ ही दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हो गया। दूसरे विश्व युद्ध में वर्ष 1943 से जर्मनी की पराजय का क्रम आरंभ हुआं इस पराजय के बाद रूस ने पूर्वी मोर्चे पर व्यापक हमला किया और जर्मनी के क़ब्ज़े वाले पूर्वी क्षेत्रों को उसके नियंत्रण से बाहर निकाल लिया। रूस पूर्वी यूरोप के भीतर चला गया जबकि पश्चिम से संयुक्त सेना ने अमरीका की सहायता से हमले तेज़ किये। वर्ष 1944 के अंत तक दोनों मोर्चों पर यह प्रगति जारी रही। पश्चिमी मोर्चे से संयुक्त सेना राइन नदी से पार हो गई जबकि पूर्वी मोर्चे से रूस आगे बढ़ता हुआ बरलिन तक पहुंच गया। बरलिन पर क़ब्ज़े के अवसर पर हिटलर ने आत्म हत्य कर ली तथा नाज़ी पार्टी के अनेक नेता गिरफ़तार कर लिए गए। दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद लंदन प्रोटोकोल के आधार पर जर्मनी के चार भाग अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस और सोवियत संघ के क़ब्ज़े में चले गए।

 

 

***

19 उर्दीबहिश्त सन 1226 हिजरी शम्सी को ईरान के एक प्रसिद्ध संघर्षकर्ता धर्मगुरू आयतुल्लाह सैयद अब्दुल हुसैन का जन्म हुआ। वह लार में जन्मे और वहीं उन्होंने आरंभिक शिक्षा प्राप्त की। उच्च धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ गये। वहां उन्होंने मिर्ज़ा बुज़ुर्ग शीराज़ी से भी शिक्षा प्राप्त की और मुजतहिद बने। कुछ समय बाद आयतुल्लाह अब्दुल हुसैन मिर्ज़ा शीराज़ी के आदेश पर लारिस्तान की जनता के मार्गदर्शन के लिए लारिस्तान गये। वहां उन्होंने धार्मिक शिक्षा केन्द्र स्थापित किया। लारिस्तान में उनके उपस्थित होने के कारण ईसाई मिशनरियों के प्रभाव कम हुए। उन्होंने ब्रिटिश अतिक्रमण का मुक़ाबला करने वालों का बहुत अधिक साथ दिया। उनकी चालीस से अधिक पुस्तकें हैं। उनका 46 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया। 

 

***

14 रमज़ान सन 542 हिजरी क़मरी को विख्यात धर्मगुरु इब्ने मग़ाज़ली का निधन हुआ। वे सन 457 हिजरी क़मरी में जन्मे थे उन्होंने इराक़ में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश भाग वासित और बग़दाद नगरों में पैग़म्बरे इस्लाम के कथनों के वर्णन में व्यतीत किया। उनकी रचनाओं में केवल एक पुस्तक बची है जो सीरिया के राषट्रीय पुस्तकालय में रखी हुई है।

 

14 रमज़ान वर्ष 1248 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध बुद्धिजिवी एवं विद्वान शमसुद्दीन बेहबहानी का निधन हुआ। उन्होंने युवावस्था में मुहक़क़ेक़ बेहबहानी जैसे महान धर्मगुरु से शिक्षा ग्हण की। बेहबहानी पवित्र धर्मशास्त्री थे और उन्होंने अपनी अधिकतर आयु पुस्तकें लिखने  व शोध कार्य में बिताई। शमसुद्दीन बेहबहानी ने मआलिमुल उसूल नामक पुस्तक की व्यख्या की और त्तवदर्शिता एवं धर्म सिद्धान्त के संबंध में पुस्तिकाएं लिखीं।