डाॅ हेमन्त कुमार
May ०७, २०१६ १५:०६ Asia/Kolkata
सहमी सी हैं तितलियां सभी
सहमी सी हैं तितलियां सभी
खौफ में हर परिन्दा है
नकाब इन्सां का चेहरे पे
यहांहर शख्स दरिन्दा है
निर्भया माफ कर देना
कि हम बहुत शर्मिन्दा है
बेटीयों घर से निकलना ना
कि अभी अफरोज जिन्दा है
काश "बाल बलात्कारी" की रिहाई के विरोध में भी कोई एक बुद्धिजीवी अपना अवार्ड लौटा देता..
- काश कोई असहिष्णु इस पर भी होता..
कहाँ गए सारे ?