शनिवार- 9 मई
1540, महाराणा प्रताप का जन्म हुआ, उन्होंने मुग़ल सम्राट जलालुद्दीन अकबर से कई लड़ाईयां लड़ीं, लेकिन इन लड़ाईयों में उनकी हार हुई।
1947, विश्व बैंक ने अपना पहला ऋण फ्रांस को दिया।
1955, पश्चिमी जर्मनी ने नाटो की सदस्यता ग्रहण कर ली।
2000, जाफना प्रायद्वीप के एलीफेंट दर्रे पर क़ब्ज़े के लिए लिट्टे के साथ हुए संघर्ष में श्रीलंका के 358 सैनिक मारे गए।
2004, चेचेन्या में एक विस्फोट में वहां के राष्ट्रपति अख़मद कादरोव का निधन हुआ।
2008, अमरीका ने पाकिस्तान को 8.1 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता देने से इनकार कर किया।
2010, भारत की वंदना शिवा को विकासशील देशों में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के लिए सिडनी शांति पुरस्कार के लिए चुना गया।
9 मई वर्ष 2010 को पाकिस्तान के सिंध प्रांत की सरकार ने सिंध कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की जेल सुधार समिति की बैठक के बाद पांच वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद क़ैदियों को हर तीन महीने बाद पत्नी के साथ एक रात रहने की अनुमति देने का फैसला किया।
9 मई वर्ष 2010 को भारत की वंदना शिवा को विकासशील देशों में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग देने के लिए वर्ष 2010 के सिडनी शांति पुरस्कार के लिए चुना गया। उन्हें चार नवंबर को सिडनी ओपेरा हाउस में यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
9 मई सन 1454 ईसवी को इटली के नाविक और खोजकर्ता अमेरीगो वेसपस का जन्म हुआ। समुद्र यात्रा से गहरे लगाव के कारण उन्होंने यही काम अपना लिया।
अमेरीगो ने चार बार एक ऐसे स्थान तक अपना जहाज़ पहुंचाया जिसका उस समय कोई नाम नहीं था और जिसके बारे में कोई नहीं जानता था। बाद में उन्ही के नाम पर इस भूखंड को अमरीका का नाम दिया गया। इस प्रकार बहुत से इतिहासकार वेसपस को ही अमरीका का असली खोजकर्ता मानते हैं।
सन 1512 ईसवी में उनका निधन हो गया। अमेरीगो का यात्रा वृतांत जर्मनी के भूशास्त्री मूलर द्वारा सन 1507 ईसवी में प्रकाशित हुआ। उन्होंने ही अपनी पुस्तकों में अनुरोध किया कि वेसपस द्वारा खोजे गये भूखंड को अमरीका का नाम दिया जाए।
9 मई सन 1653 ईसवी को भारत की विश्वविख्यात ऐतिहासिक इमारत ताज महल का निर्माण 22 वर्ष के निरंतर परिश्रम के बाद पूरा हुआ। भारत में मुग़ल नरेश शाहजहॉं ने अपनी पत्नी के निधन के बाद उनकी याद में यह इमारत बनवायी। इस इमारत के अंदर बहुत से शिलालेख हैं जिनपर कुरआन की आयतें खुदी हैं तथा दो कब्रें भी हैं जिनमें एक मुगल नरेश शाहजहॉं और दूसरे में उनकी पत्नी मुमताज़ महल दफ़न हैं।
उल्लेखनीय है कि इस इमारत के निर्माण के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गयी जिनमें एक वास्तुकार ईसा इस्फ़हानी भी थे उनके द्वारा बनाया गया इमारत का नक़्शा पसंद किया गया और फिर उसी नक्शे की इमारत बनाई गयी जो आज पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

9 मई सन 1805 ईसवी को जर्मनी के ड्रामा लेखक और कुशल शायर यूहन फ़्रेडरिक शिलर का 46 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्हें बचपन से ही लेखन और शायरी से लगाव था। बाद में वे जर्मनी के विख्यात लेखक गैटे से परिचित हुए। उन्होंने गौट के ही मार्ग पर चलते हुए जर्मन साहित्य में नया पाठ जोड़ा। उनकी रचनाओं का हिंदी अनुवाद राह के लुटेरे हालैंड के पतन का इतिहास, तीस वर्षीय युद्ध का इतिहास मैरी स्टीवर्ट आदि का नाम लिया जा सकता है।

9 मई सन 1992 ईसवी को अरमीनिया की सेना ने आज़रबाइजान गणराज्य पर आक्रमण आरंभ किया। अरमीनिया आज़रबाइजान के क़रे बाग़ क्षेत्र को अपना भाग बनाने के प्रयास में था। ये आक्रमण भी आज़रबाइजान को कमज़ोर करने और क़रेबाग़ के अलगावादियों को शक्तिशाली बनाने के उददेश्य से किया गया था। अर्मीनिया की सेना ने इस आक्रमण में आज़रबाइजान की भूमि का 20 प्रतिशत भाग अपने क़ब्ज़े में कर लिया।
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20 उर्दीबहिश्त सन 1368 हिजरी शम्सी को ईरान के विख्यात बुद्धिजीवी सैयद जवाद मुसतफ़वी का निधन हुआ। उन्हें धार्मिक विषयों का व्यापक ज्ञान था। ईरान में इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद डॉक्टर मुसतफ़वी को मशहद नगर के इस्लामी विश्वविद्यालय का कार्यभार सौंपा गया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। जिनमें अलकाशिफ़ और मिफ़ताहुल वसायल आदि का नाम लिया जा सकता है।
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15 रमज़ान वर्ष 3 हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के नवासे हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम का जन्म हुआ। उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम की देख-रेख में और उनकी प्रिय सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और दामाद हज़रत अली अलैहिस्सलाम की छाया में सादा जीवन बिताया। वर्ष 40 हिजरी क़मरी में अपने पिता हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद मुसलमानों के नेतृत्व और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी संभाली। हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद आरंभ में तो मुसलमानों की एक बड़ी संख्या ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम की बैअत की अर्थात उनके आज्ञापालन का वचन दिया किंतु शाम के तत्कालीन शासक मुआविया ने उनसे शत्रुता और विद्रोह की घोषणा कर दी। इसके बाद हज़रत इमाम हसन मुआविया का मुक़ाबला करने के लिए निकले किंतु उनके बहुत से सिपाहियों ने शत्रु के झूठे वादों में आकर इमाम हसन अलैहिस्सलाम को अकेले छोड़ दिया। इसी दौरान मुआविया ने संधि का प्रस्ताव रखा जिसे इमाम हसन अलैहिस्सलाम ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपनी दूरदृष्टि से काम लेकर स्वीकार कर लिया। उनका यह क़दम समाज में फैली बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष का आरंभ था जिसने मुहर्रम वर्ष 61 हिजरी क़मरी में उनके भाई हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के कर्बला के आंदोलन की भूमि प्रशस्त की और इस्लाम को मुआविया के षड्यंत्रों से मुक्ति दिलाई।
15 रमज़ान वर्ष 966 हिजरी क़मरी को महान विद्वान व फ़क़ीह ज़ैनुद्दीन बिन अली शहीद हुए। वे शहीदे सानी के उपनाम से प्रसिद्ध थे। शहीदे सानी वर्ष 911 हिजरी क़मरी में पैदा हुए और उन्होंने आरंभ में अपने पिता से शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने विभिन्न शहरों की यात्रा की और प्रमुख विद्वानों व धर्मगुरुओं से ज्ञान प्राप्त किया जिसके परिणामस्वरूप वे फ़िक़्ह, हदीस, तर्कशास्त्र और दर्शनशास्त्र में बहुत दक्ष हो गए। उन्होंने लगभग 70 किताबें लिखी हैं। ज्ञान के क्षेत्र में शहीदे सानी का उच्च स्थान उनके शत्रुओं की ईर्ष्या का कारण बना। अंततः उन्हें शहीद कर दिया गया। इस्लामी धर्म शास्त्र के विषय में लिखी गई उनकी किताब रौज़तुल बहिय्या आज भी इस्लामी शिक्षा केंद्रों में पढ़ाई जाती है।