May ०८, २०१६ ०७:१३ Asia/Kolkata

11 मई वर्ष 868 ईसवी को संसार की पहली पुस्तक प्रकाशित हुई।

यूरोप में टाईप की छपाई का आरंभ पंद्रहवीं शताब्दी में हुआ किन्तु इससे बहुत पहले चीन में ठप्पे की छपाई का काम आरंभ हो चुका था। वर्ष 1900 ईसवी में तुर्किस्तान में तान यांग के स्थान पर एक गुफा में एक पुस्तक पायी गयी जिसका नाम साइमंड सूत्रा (simond sutra) था यह पुस्तक गौतम बुद्ध के चित्र और उनकी शिक्षा पर आधारित थी और ठप्पे की सहायता से प्रकाशित हुई थी। यह पुस्तक सात पृष्ठों पर आधारित थी जो आपस में जुड़े हुए थे। हर शीट की लंबाई ढाई फ़िट और चौड़ाई एक फ़ुट थी। पुस्तक के अंत में यह बात लिखी है कि यह पुस्तक 11 मई सन 868 ईसवी को वांग चिये wang chieh ने निःशुल्क वितरित करने के लिए छापी ताकि उसके पिता को सदैव याद किया जाए। इस पुस्तक के एक पृष्ठ पर एक बात और छह पृष्ठों पर गौतम बुद्ध को उनके स्त्री व पुरुष अनुयायियों के मध्य बैठा दिखाया गया है। चित्र में दो बिल्लियां भी दिखाई गयीं थीं, इस प्रकार ग्यारह मई सन 868 ईसवी मानव इतिहास में एक यादगार दिन बन गया क्योंकि इस दिन विश्व की पहली पुस्तक प्रकाशित हुई।

 

11 मई वर्ष 1935 ईसवी को जर्मनी के बर्लिन नगर में संसार के पहले सरकारी टेलीवीजन ट्रांसमीटर ने कार्य करना आरंभ किया। इस टेलीवीजन ट्रांसमीटर का नाम नेप्को था जिसके काम करने के साथ ही टेलीवीजन का दौर आरंभ हुआ। इसी ट्रांसमीटर का नाम टेलीवीजन के आविष्कारकों में से एक वैज्ञानिक पॉल नेप्को के अथक प्रयासों के लिए उनके नाम पर रखा गया। उल्लेखनीय है कि पॉल नेप्को सन 1860 ईसवी में जन्मे थे। उन्होंने भौतिक विज्ञान में अपनी शिक्षा पूरी करने से पहले व्यापक स्तर पर शोध कार्य किए और अंततः चित्रों को लहरों में परिवर्तित करने और लहरों को पुनः चित्रों में परिवर्तित करने के मार्ग को खोजने में वे सफल हो गये। इस प्रकार पॉल नेप्को ने टेलीवीजन का आविष्कार किया जिसका विकसित रूप आज हमारे सामने है। विश्व भर में टेलीवीजन का भरपूर स्वागत हुआ और वैज्ञानिक विकास में भी इसकी भूमिका से इन्कार नहीं किया जा सकता।

 

11 मई वर्ष 1940 ईसवी को फ़्रांस और ब्रिटेन की सेनाएं बेल्जियम में प्रविष्ट हुईं। इन दोनों घटक देशों की सेनाएं, जर्मनी के मुक़ाबले में बेल्जियम के समर्थन में इस देश में प्रविष्ट हुई थीं क्योंकि जर्मनी की नाज़ी सेनाओं ने बेल्जियम पर आक्रमण कर दिया था बेल्जियम की रक्षा, ब्रिटेन और फ़्रांस के मध्य होने वाले एक समझौते में शामिल थी किन्तु फ़्रांसीसी सेनाओं और ब्रिटिश सेना के मौजूद होने के बावजूद, जर्मन सेना ने केवल बेल्जियम ही नहीं बल्कि ब्रिटिश और फ़्रांसीसी सेना को भी पराजित करके पूरे बेल्जियम पर नियंत्रण कर लिया।

 

11 मई सन 1864 ईसवी को ब्रिटेन की लेखिका लिलियन वेनिज का जन्म हुआ। वे 21 वर्ष की आयु में रुस गयीं और रुसी सहित्य की पूर्ण शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने इस भाषा में कई उपन्यास लिखे। जैक डायमंड उनका विख्यात उपन्यास है। सन 1960 ईसवी में उनका निधन हुआ।

11 मई सन 1904 ईसवी को स्पेन की चित्रकार सैलवाडोर डॉलीं का जन्म हुआ। युवाकाल से ही चित्रकाल में उनकी क्षमताएं सामने आयी। और शीघ्र ही उन्हें विश्व ख्याति प्राप्त हो गयी। उन्हें चित्रकारी में क्यूबिइज्म का जनक कहा जाता है वर्ष 1989 में उनका निधन हुआ।

 

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22 उर्दीबहिश्त सन 1349 हिजरी शम्सी को संयुक्त राष्टृसंघ की सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव क्रमांक 278 पारित करके बहरैन में जनमत संग्रह के लिए भेजे गये संयुक्त राष्टृसंघ के दूत की रिपोर्ट की पुष्टि की और यह देश स्वतंत्र हो गया। दो सप्ताह के कालांतर में संयुक्त राष्टृसंघ के दूत ने बहरैन के बड़े कबीलों के सरदारों और दूसरे प्रभावी लोगों से वार्ता करके यही निष्कर्ष निकाला कि इस देश को स्वतंत्र कर दिया जाना चाहिए। बहरैन इस्लाम के उदय से पूर्व , ईरान का हिस्सा था किन्तु इस्लाम के विस्तार से बहरैन पर मुसलमान हुकूमतों ने शासन किया। सातवीं हिजरी शम्सी के आरंभ में बहरैन एक बार फिर ईरान का हिस्सा बना।

 

वर्ष 1162 हिजरी शम्सी को फ़ार्स की खाड़ी में स्थित बहरैन का शासन ऐसे लोगों के हाथों में चला गया जो कुवैत से आए थे किंतु फ़ार्स की खाड़ी में ब्रिटेन का प्रभाव बढ़ने के बाद बहरैन के शासकों ने ब्रिटेन के साथ समझौते किए और अंतत: प्रथम विश्व युद्ध के अवसर पर सन 1293 हिजरी शम्सी में ब्रिटेन ने बहरैन पर पूर्ण अधिकार कर लिया किंतु ईरान ने बहरैन के स्वामित्व को लेकर सदैव ही ब्रिटेन के अतिग्रहण का विरोध किया। 1350 हिजरी शम्सी में ब्रिटेन को अपनी आंतरिक कठिनाइयों के करण फ़ार्स की खाड़ी से पीछे हटना पड़ा जिसके बद इस देश की स्वतंत्रता की भूमिका प्रशस्त हुई और संयुक्त राष्टृसंघ ने एक जनमत संग्रह कराने के बाद इस देश को स्वतंत्र घोषित कर दिया।

 

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17 रमज़ान सन 1318 हिजरी क़मरी को मुसलमानों के बड़े धर्मगुरु मोहम्मद हाशिम ख़ान्सारी का इस्फ़हान में देहान्त हुआ। उन्होंने आरंभिक धार्मिक शिक्षा पूरी करने के पश्चात अपने समय के बड़े धर्मगुरुओं से लाभ उठाया और व्यापक अध्ययन व शोध के पश्चात फ़िक्ह, फ़िक़ह के सिद्धांत, हदीस और क़ुरआन की व्याख्या जैसे ज्ञानों में दक्षता प्राप्त की और फिर शिक्षा देने व किताबें लिखने में व्यस्त हो गए। मन्ज़ूमई दर फ़िक़्ह व उसूल और जवाहेरुल उलूम उनकी उल्लेखनीय किताबें हैं।

 

17 रमज़ान 1322 हिजरी क़मरी को चौदहवी हिजरी क़मरी के बड़े धर्मगुरु आयतुल्लाह मोहम्मद फ़ाज़िल शरबियानी का देहान्त हुआ। ईरान के पश्चिमोत्तरी भाग में उनका जन्म हुआ था। वे उसुलेफ़िक़ह के बहुत बड़े उस्ताद थे और धर्म शास्त्र के नियमों से निष्कर्ष निकालने में भी दक्ष थे। इसी प्रकार आयतुल्लाह शरबियानी तफ़सीर और हदीस के ज्ञान में भी बहुत दक्ष थे। आज़रबाइजान और कॉकेशिया में वे मुसलमानों के सबसे बड़े धर्मगुरू थे। आयतुल्लाह शरबियानी ने प्रसिद्ध धर्मगुरु शैख़ मुर्तज़ा अंसारी की प्रसिद्ध किताब अर्रसाएल वल मकासिब की 9 जिल्दों में व्याख्या लिखी जो उनकी यादगार के रूप में मौजूद है।