बुधवार - 13 मई
13 मई वर्ष 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के शासनकाल में भारतीय वैज्ञानिकों ने पोखरण मे परमाणु परिक्षण किया।
1648, दिल्ली में लाल क़िले का निर्माण पूरा हुआ।
1830, इक्वाडोर गणराज्य की स्थापना हुई, जुआन जोस फ्लोरेंस पहले राष्ट्रपति बने।
1905, भारत के राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद का जन्म हुआ।
1952, स्वतंत्र भारत की संसद का पहला सत्र शुरू हुआ।
1958, जॉर्डन और इराक़ ने अरब फ़ैडरेशन की स्थापना की।
1989, चीन में लगभग 2000 छात्रों ने थियान अन मन चौक पर भूख हड़ताल शुरू की।
1998, भारत ने पोखरण में दो परमाणु परीक्षण किए।
भारतीय वैज्ञानिकों ने 11 मई से 13 मई के दौरान पांच परमाणु परीक्षण किए। पाकिस्तान ने भी प्रतिक्रिया स्वरूप 28 मई, 1998 में छह परमाणु परीक्षण कर डाले। नाभिकीय अस्त्र परीक्षण या परमाण परीक्षण उन प्रयोगों को कहते हैं जो डिज़ाइन एवं निर्मित किये गये नाभिकीय अस्त्रों की प्रभाविकता, उत्पादकता एवं विस्फोटक क्षमता की जाँच करने के लिये किये जाते हैं। परमाणु परीक्षणों से कई जानकारियाँ प्राप्त होतीं हैं ; जैसे - ये नाभिकीय हथियार कैसा काम करते हैं; विभिन्न स्थितियों में ये किस प्रकार का परिणाम देते हैं; भवन एवं अन्य संरचनायों पर इन हथियारों के प्रयोग के बाद क्या प्रभाव पड़ता है। वर्ष 1945 के बाद बहुत से देशों ने परमाणु परीक्षण किये। इसके अलावा परमाणु परीक्षणों से वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सैनिक शक्ति का प्रदर्शन करने की कोशिश भी की जाती है। बीसवीं शताब्दी में कई देशों ने परमाणु परीक्षण किए थे। पहला परमाणु परीक्षण अमरीका ने 16 जुलाई वर्ष 1945 में किया था। अब तक का सबसे बड़ा परमाणु परीक्षण पूर्व सोवियत संघ में 30 अक्तूबर वर्ष 1961 को किया गया था जिसमें 50 मेगाटन के हथियार का परीक्षण किया गया था। विश्व के परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों ने अब तक कम से कम 2000 परमाणु परीक्षण किये हैं।
13 मई वर्ष 1713 ईस्वी को फ़्रांस के गणितज्ञ अलेक्सीस क्लॉवस क्लेरो का पेरिस में जन्म हुआ। उन्हें छोटी आयु में ही गणित में बहुत रूचि थी और 18 वर्ष की आयु में उन्हें फ़ांस के विज्ञान अकदमी की सदस्यता मिली। 23 वर्ष की आयु में उन्हें ध्रुवीय क्षेत्र में शोध के लिए भेजा गया। डिफ़्रेन्शल कैतकुलस के संबंध में क्लेरो के रोध को विश्व ख्याति प्राप्त हुई। इस महान वैज्ञानिक का 1765 में निधन हुआ।

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24 उर्दीबहिश्त वर्ष 1363 हिजरी शम्सी को ईरान के समकालीनल शोधकर्ता, शायर और लेखक हबीब यग़माई का निधन हुआ। वह वर्ष 1316 हिजरी शम्सी में जन्मे थे। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने फ़ारसी साहित्य और इस्लामी शिक्षाओं का गहन अध्ययन किया। उन्होंने 31 वर्ष तक यग़मा के नाम से पत्रिका प्रकाशित की। हबीब यग़माई की पुस्तकों में तसहीहे मजमूअए आसारे सादी और तसहीहे तरजुमये तबरी का नाम मुख्य रूप से लिया जा सकता है।
24 उर्दीबहिश्त वर्ष 1270 हिजरी शम्सी को संघर्षकर्ता और वरिष्ठ धर्म गुरु आयतुल्लाह मिर्ज़ा हसन शीराज़ी ने ब्रिटिश साम्राज्य की लूटपाट और लूट खसोट को रोकने के लिए एक छोटे किन्तु ठोस फ़त्वे के माध्यम से तंबाकू का लाइसेंस समाप्त कर दिया। तत्कालीन क़ाजार शासक नासिरूद्दीन शाह के यूरोप के दौरे के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री के सलाहकार टालबोट के साथ एक समझौता हुआ जिसके अनुसार, ईरान में तंबाकू का उत्पादन, बिक्री और आयात के अधिकार पचास वर्षों के लिए ब्रिटिश कंपनी को दे दिया गया। यह समझौता वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्य के फैलाव और ईरान को लूटने का एक बहाना था। ईरान की सचेत और जागरूक जनता और धर्मगुरुओं ने इस समझौते का कड़ा विरोध किया। तंबाकू को वर्जित करने पर आधारित आयतुल्लाह मिर्ज़ा शीराज़ी के फ़त्वे के बाद ईरानी नागरिकों ने अपने हुक़्क़े तोड़ दिए और तंबाकू के क्रय विक्रय का बहिष्कार कर दिया। इस प्रकार नासिरूद्दीन शाह क़ाजार, ब्रिटिश कंपनी को दिए जाने वाले तंबाकू के अधिकार को रद्द करने पर विवश हुआ।
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19 रमज़ान सन 40 हिजरी क़मरी को हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम नामक व्यक्ति ने उस समय तलवार मार कर घायल कर दिय जब वे नमाज़ में व्यस्त थे। इसके तीसरे दिन हज़रत अली अलैहिस्सलाम शहीद हो गये। हज़रत अली का प्रशिक्षण पैग़म्बरे इस्लाम ने किया था और उन्होंने भी अपना पूरा जीवन पैग़म्बरे इस्लाम(स) और इस्लाम धर्म की सेवा में अर्पित कर दिया था। हज़रत अली अलैहिस्सलाम में विभिन्न विशेषताएं एक साथ पायी जाती थीं। वे रणक्षेत्र के महान वीर होने के साथ ही बड़े ही विनम्र दयालु और बड़े ज्ञानी थे। वे अन्याय और अत्याचार के कड़े विरोधी थे और इन बुराइयों का व्यवहारिक रूप से विरोध करते थे। उनका एक कथन है ईश्वर की सौगंध यदि मुझे नंगे शरीर के साथ जंगल के कॉटों पर लिटा दिया जाए या मुझे हथकड़ी बेड़ी पहनाकर ज़मीन पर घसीटा जाए तो यह स्थिति मेरे लिए बेहतर है प्रलय के दिन की उस स्थिति से कि मैं अल्लाह और रसूल से ऐसी हालत में मिलूं कि मैंने ईश्वर के दासों पर अत्याचार किया हो।