रविवार - 17 मई
17 मई सन 1426 ईसवी को पुर्तगाल में जल यात्रा की कला सिखने के लिए एक स्कूल खोला गया।
इस कला की शिक्षा का यह पहला स्कूल था जिस की स्थापना का उददेश्य नाविकों को प्रशिक्षित करके अधिक भौगोतिक खोज में उन्हें प्रयोग करना था। उस समय के बहुत से पुर्तगाली नाविक और खोजकर्ता इसी स्कूल से प्रशिक्षित थे। बाद में धीरे धीरे दूसरे देशों में भी इस प्रकार के स्कूल खोले गये।
- 17 मई सन् 1498 में पुर्तगाल का प्रसिद्ध खोजी नाविक वास्कोडिगामा पहली बार कालीकट के निकट पहुंचा।
- 17 मई सन् 1540 में हरदोई में हुई कन्नौज की लड़ाई में शेरशाह सूरी ने हुमांयू को हराया।
- 17 मई सन् 1756 में ब्रिटेन ने फ्रांस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की।
- 17 मई सन् 1769 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के कपड़ा उद्योग को बर्बाद करने के लिए बुनकरों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए।
- 17 मई सन् 1857 में बहादुर शाह द्वितीय मुग़ल सम्राट घोषित हुए।
- 17 मई सन् 1865 में विश्व संचार दिवस मनाने की शुरुआत हुई।
- 17 मई सन् 1884 में अलास्का अमेरिका का हिस्सा बना।
- 17 मई सन् 1928 में नौवें आधुनिक ओलंपिक खेलों की एम्स्टर्डम में शुरुआत हुई।
- 17 मई सन् 1970 में थोर हेयरडाल ने इसी दिन मोरक्को से यात्रा की शुरुआत की और अटलांटिक महासागर को 57 दिनों में पार कर लिया।
- 17 मई सन् 1978 में मशहूर कॉमेडियन चार्ली चैपलिन का चुराया हुआ ताबूत खोज लिया गया। चार्ली की मौत स्विटज़रलैंड में 1977 में हुई और उन्हें जेनेवा झील के पास दफनाया गया। लेकिन दो चोरों ने उनके ताबूत को चुराकर उसके बदले चार लाख पाउंड की मांग की थी।
17 मई सन 1865 ईसवी को पेरिस में बीस देशो के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संचार के क्षेत्र में अंतर्राष्टीय समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अंतर्राष्टीय टेलीग्राफ संघ की स्थापना हुई तथा इसका घोषणापत्र भी तैयार किया गया। इसी लिए आज के दिन को अंतर्राष्ट्रीय संचार दिवस घोषित किया गया है। सन 1932 में मेड्रिड कांफ़्रेन्स में लिए गये निर्णय के अनुसार अंतर्राष्टीय टेलीग्राफ संघ का नाम बदल कर अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ रख दिया गया। सन 1947 से यह संघ संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़ गया।

17 मई सन 1939 ईसवी को ब्रिटेन की सरकार ने जिसने फिलिस्तीन पर अधिकार कर रखा था वाइट बुक नामक एक पुस्तक प्रकाशित करवा कर अवैध जायोनी शासन के गठन की दिशा में एक और कदम उटाया। इस पुस्तक में फिलिस्तीन समस्या के लिए एक समाधान सुझाया गया था जिसके अनुसार 10 वर्ष बाद अरब और यहूदी राष्ट्रों की स्थापना होनी थी। इस पुस्तक में यह भी कहा गया था कि वर्ष 1944 तक एक लाख से अधिक यहूदी विभिन्न जगहो से पलायन करके फिलिस्तीन जाएंगे और फिर उसके बाद यहूदियों का पलायन इस क्षेत्र के मूल निवासियों अर्थात फ़िलीस्तीनियों की अनुमति के साथ होगा। फिलिस्तीनियों ने जो ब्रिटेन द्वारा जायानियों के समर्थन का पूरा ज्ञान रखते थे ब्रिटेन के उक्त सुझाव को रदद कर दिया ।

17 मई सन 1946 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध के एक वर्ष बाद इटली के लोगों ने एक जनमत संग्रह में भाग लेकर इस देश में प्रजातांत्रिक शासन की मांग की । वर्ष 1945 में इटली की संसद के निर्णय से इस देश के नरेश अमानोएल त्रितीय अपने पद से हटे और उनके पुत्र ओमबर्टोए द्वितीय ने उनका स्थान लिया किंतु जनता ने एक वर्ष बाद लोकतंत्रिक सरकार का समर्थन करके ओमबर्टोए के शासन का भी अंत कर दिया।
17 मई सन 1510 ईसवी को विख्यात चित्रकार सैंड्रो बोटी चेली का निधन हुआ। वह इटली के नगर फ़्लोरेन्स में पैदा हुए। हालांकि वह प्रख्यात चित्रकार फ़लिप्पो लिप्पी के शिष्य थे किंतु दो और चित्रकारों से भी बहुत अधिक प्रभावित थे। बोटी चेली ने सन 1447 में अपनी दो प्रख्यात पेंटिंगें बनाईं जिनमें से एक का नाम स्प्रिंग था। यह पेंटिंग 15वीं शताब्दी की प्रख्यात पेंटिंगों में गिनी जाती हैं। इन पेंटिंगों में प्राचीन शायरी और उस काल की लेखन कला का प्रतिबिंबन भी देखा जा सकता है। यह पेंटिंग्स फ़्लोरान्स के संग्रहालय में रखी हुई हैं। सन 1481 के आस पास बोटी चेली रोम चले गए जहां उन्होंने सस्टाइन चैपल की दीवारों पर भी चित्र बनाए। 15वीं शताब्दी के अंतिम बीस वर्षों में उन्होंने मैडोनाज़ के नाम से अनगिनत पेन्टिंग्स बनाईं जिन्हें बेच बेच कर उन्होंने अपना जीवन बिताया।
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28 उर्दीबहिश्त सन 1356 हिजरी शम्सी को अंतर्राष्ट्रीय संग्राहालय के 12वें प्रस्ताव के आधार पर आज के दिन को संग्रहालय दिवस घोषित किया गया। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था का उद्देश्य, पूरे विश्व में संग्रहालयों से समस्त संग्रहालयों की व्यापक सहकारिता स्थानीय संसकृति के विनाश को रोकना और अजनबी संसकृतियों के मुकाबले में स्थानीय संस्कृतियों को सुद्दढ़ बनाना हैं।
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23 रमज़ान सन 220 हिजरी क़मरी को सीरिया और मिस्र में तूलूनी शासन श्रृंखला के संस्थापक अहमद बिन तूलून का जन्म हुआ। तूलूनी मिस्र की पहली शासन श्रृंखला थी इसने सीरिया को भी अपने अधिकार में कर लिया था। तूलून एक दास का नाम था जिसे कुछ उपहारो के साथ बुखारा के शासक ने अब्बासी ख़लीफ़ा के पास भेजा था। तूलून के बेटे अहमद ने अपनी तेज़ बुद्धि के प्रयोग से इस नाम से शासन श्रृंखला की आधार शिला रखी।