May २३, २०१६ ०७:४६ Asia/Kolkata

23  मई 1947  को ब्रिटेन की कैबिनेट ने भारत को दो देशों में विभाजित करने के लार्ड माउन्टबेटन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया  

23  मई 1420 में  आस्ट्रिया और सीरिया से यहूदियों को निकाला गया।

23 मई 1846   में मेक्सिको के राष्ट्रपति ने अमरीका के खिलाफ अनौपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा कर दी।

23 मई 1915 में इटली पहले विश्व युद्ध से जुड़ा

23  मई 1947  को ब्रिटेन की कैबिनेट ने भारत को दो देशों में विभाजित करने के लार्ड माउन्टबेटन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया  

23 मई 1949  पश्चिम जर्मनी औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया।

23 मई  2001 - पाकिस्तान का भारत को एम.एफ़.एन. का दर्जा देने से पुन: इंकार।

 

23 मई सन 1618 ईसवी को चेक गणराज्य के प्रोटिस्टेंट ईसाइयों ने तत्कालीन रोमी सम्राट फ़र्डीनंड द्वितीय की ओर से उनकी आज़ादी सीमित किए जाने के कारण उनके दो दूतों की हत्या कर दी जिसके बाद योरोप में तीस वर्षीय धार्मिक युद्ध छिड़ गया। यह युद्ध मुख्य रूप से जर्मनी में लड़ा गया जो उतार चढ़ाव से भरा था। इस युद्ध में फ़्रांस, स्वीडन और डेनमार्क प्रोटिस्टेंट ईसाइयों के समर्थन में और स्पेन तथा रोमन साम्राज्य कैथोलिक इसाइयों के समर्थन में युद्ध में कूदे। यह युद्ध 1648 ईसवी में वेस्टफ़ाली संधि के साथ ख़त्म हुआ किन्तु स्पेन और फ़्रांस के बीच युद्ध जारी रहा जो 1659 में पीरनीज़ संधि पर दस्तख़त के साथ समाप्त हुआ।

 

23 मई 1891 ईसवी को स्वीडिश कवि व ड्रामा लेखक पार लागर्कविस्ट का जन्म हुआ। वे युवावस्था में पेरिस गए और उन्हीं दिनों उनकी पहली रचना प्रकाशित हुयी जिसके शीर्षक का अनुवाद है ” बातचीत की कला।“

उन्हें 1951 में साहित्य का नोबल पुरस्कार मिला। 1974 में उनका निधन हुआ।

 

23 मई वर्ष 1960 ईसवी को भारतीय उपमाहाद्वीप के प्रसिद्ध पहलवान रूस्तमे ज़मा गामा का निधन हुआ उनका असली नाम ग़ुलाम हुसैन था और वे सन 1882 ईसवी में पैदा हुए। उनको पहले रूस्तमें पंजाब और बाद में रूस्तमें हिंद की उपाधि दी गयी। उन्होंने देश के कई प्रसिद्ध पहलवानों को धूल चटाने के बाद वर्ष 1910 में अंतर्राष्ट्रीय मुक़ाबलों में क़दम रखा और लंदन के विश्व कुश्ती मुक़ाबलों में भाग लिया। यहां गामा पहलवान का मुक़ाबला फ़ाइनल में यूरोप के चैंपियन स्टैन्ली ज़िबैस्को से हुआ जो ढाई घंटे तक जारी रहा किन्तु हार जीत का फ़ैसला न हो सका। यह मुक़ाबला एक सप्ताह के लिए टाल दिया गया । अगले सप्ताह ज़िबैस्को मैदान में नहीं आया और गामा पहलवान ने रूस्तमे ज़मा की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 1928 में पटियाला राज्य में ज़िबैस्को और गामा का दोबारा मुक़ाबला हुआ जिसमें गामा ने तीस सेकेन्ड के अंदर ज़िबैस्को को चारों ख़ाने चित कर दिया और फिर वे निरंतर अंतर्राष्ट्रीय मुक़ाबलों में जीत दर्ज करते रहे। गामा पहलवान ने तीस वर्ष के दौरान लगभग 12 सौ पहलवानों से मुक़ाबला किया और एक बार भी पराजित नहीं हुए। गामा पहलवान आयु के अंतिम दिनों में रक्तचाप की बीमारी में ग्रस्त हो गये थे और अंततः इसी बीमारी में वह इस संसार से चले गये।

 

23 मई वर्ष 2009 को भारतीय प्रधानमंत्री ने एस एम कृष्णा को केन्द्रीय कैबिनेट में शामिल किया और उन्हें विदेशमंत्रालय की ज़िम्मेदारी सौंपी। उनका जन्म वर्ष 1932 ईसवी में हुआ था। उनका पूरा नाम सोमनाहल्ली मल्लैया कृष्णा है। वह वर्ष 1999 से वर्ष 2004 तक  कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और वर्ष 2004 से वर्ष 2008 तक  महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे। उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई मैसूर के महाराजा कालेज में पूरी की और फिर बैंगलोर के कालेज से कानून की डिग्री प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका गए। वहां से स्नातक करने के बाद उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून में शिक्षण शुरू किया। अमेरिका में ही उनका राजनीति के प्रति लगाव आरंभ हुआ । वहां उन्होंने जान एफ़ कैनेडी के राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार किया। कर्नाटक लौटने के बाद वर्ष 1962 में उन्हें कर्नाटक विधानसभा का सदस्य चुना गया।  एसएम कृष्णा, मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल के एक मात्र ऐसे मंत्री थे जो मंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और तीन बार केंद्रीय मंत्री का पद संभाल चुके थे।

 

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3 खुर्दाद सन 1361 हिजरी शमसी को ईरानी संघर्षकर्ताओ ने देश के दक्षिणी नगर खुर्रमशहर को इराक़ की अतिक्रमण कारी सेना के नियंत्रण से स्वतंत्र करा लिया। तीन आबान सन 1359 हिजरी शम्सी को इराक़ की सेना ने इस क्षेत्र का परिवेष्टन कर लिया किंतु खुर्रमशहर के आम नागरिकों ने हल्के हथियारों से ही इराक़ की भारी शस्त्रों से लैस सेना का मुकाबला किया। यह झड़प कई दिनों तक जारी रही किंतु अंतत: इराक़ी सेना ने इस शहर पर कब्जा कर लिया। यह नगर 20 महीनों तक इराक़ी सेना के अतिग्रहण में रहा और सददाम शासन इसे अपना अजेय दुर्ग समझने लगा था किंतु ईश्वर पर विश्वास रखने वाले ईरान के संघर्षकर्ताओं ने अपनी भूमि को स्वतंत्र करा लिया।

आज के दिन को इस्लामी गणतंत्र ईरान  में प्रतिरोध एवं सफलता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

 

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29 रमज़ान सन 807 हिजरी क़मरी को मिस्र के प्रसिद्ध वक्ता इतिहासकार और धर्मगुरु इब्ने फ़ोरात का निधन हुआ। वे सन 735 हिजरी क़मरी में क़ाहेरा में पैदा हुए। उन्हें इतिहास से विशेष लगाव था। वे हमेशा इस विष्य में अध्ययन में व्यस्त रहते। उन्होंने इस विषय में कई पुस्तकें लिखीं जिनमें तारीख़े फ़ोरात और तारीख़ुद्दोवल वल मुलूक आदि का नाम लिया जा सकता है।