May २५, २०१६ ०९:३८ Asia/Kolkata

25 मई वर्ष 1816 को अर्जन्टाइना ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा करते हुए लोकतंत्र सरकार के गठन की घोषणा की।

इस धरती का जून वर्ष 1515 में पता लगाया गया और एक वर्ष बाद यह आधिकारिक रूप से स्पेन के नियंत्रण में चली गयी। 1808 में फ़्रांस ने अर्जन्टाइना में तैनात स्पेन के सैनिकों पर आक्रमण करके इस धरती पर क़ब्ज़ा करने का प्रयास किया किन्तु उसे जनता के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर अर्जन्टाइना की छापामार सेना और स्वतंत्रता प्रेमी गुटों ने इस अवसर से लाभ उठाते हुए अर्जन्टाइन के स्पेन के शासक को निकाल बाहर किया और इस तरह इस देश को स्वतंत्रता मिली। अर्जन्टाइना दक्षिणी अमरीका के दक्षिण पूर्व में स्थित है और इसकी सीमाएं बोलेविया,  पैराग्वे, ब्राज़ील और चिली से मिलती है।

 

25 मई सन 1945 ईसवी को जर्मनी के गुप्तचर संगठन गशतापू के प्रमुख हाइनरिश हैमलर ने आत्महत्या कर ली। हैमलर सन 1934 ईसवी में 34 वर्ष की आयु में गश्तापू का प्रमुख बना। वह नाज़ी दल के अत्यंत क्रूर नेताओ में था। उसने भारी संख्या में लोगों को मौत की नींद सुलाया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हैमलर को गिरफ़तार करके नोरनबर्ग शिविर में मृत्युदंड सुनाया गया किंतु यह दंड पाने से कुछ ही समय पहले उसने साइनाइड खाकर आत्महत्या कर ली।

 

 

25 मई वर्ष 1968 को भारतीय उप महाद्वीप के प्रसिद्ध पत्रकार अल्ताफ़ हुसैन का निधन हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा ढाका विश्वविद्यालय में पूरी की और फिर वहीं अध्यापक बन गये। अलताफ़ हुसैन ने पाकिस्तानी आंदोलन में बढ़चढ़ कर भाग लिया। वे दिल्ली से प्रकाशित होने वाले समाचार डान के 20 वर्षों तक संपादक रहे। पाकिस्तान बनने के बाद वर्ष 1951 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तानी प्रतिनिधि मंडल का सदस्य बनाया गया। वर्ष 1959 में उन्हें उल्लेखनीय सेवाएं करने पर हेलाले क़ायदे आज़म के सम्मान से सम्मानित किया गया।

 

 

25 मई वर्ष 1968 को भारतीय उप महाद्वीप के प्रसिद्ध पत्रकार अल्ताफ़ हुसैन का निधन हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा ढाका विश्वविद्यालय में पूरी की और फिर वहीं अध्यापक बन गये। अलताफ़ हुसैन ने पाकिस्तानी आंदोलन में बढ़चढ़ कर भाग लिया। वे दिल्ली से प्रकाशित होने वाले समाचार डान के 20 वर्षों तक संपादक रहे। पाकिस्तान बनने के बाद वर्ष 1951 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तानी प्रतिनिधि मंडल का सदस्य बनाया गया। वर्ष 1959 में उन्हें उल्लेखनीय सेवाएं करने पर हेलाले क़ायदे आज़म के सम्मान से सम्मानित किया गया।

 

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2 शव्वाल सन 584 हिजरी क़मरी को इराक़ के शायर और साहित्यकार इब्ने तआवीज़ी का निधन हुआ। वे 219 हिजरी क़मरी में पैदा हुए। युवाकाल में कुछ  समय तक वे न्यायिक कामों में व्यस्त रहे किंतु उन्होंने अपना अधिक समय शायरी में बिताया। उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों के बारे में बहुत सुंदर शेर लिखे हैं। इबने तआवीज़ी बाद में नेत्रहीन हो गये थे किंतु उन्होंने शायरी जारी रखी।