बुधवार- 27 मई
27 मई 1910 ईसवी को जर्मनी के प्रसिद्ध चिकित्सक रॉबर्ट कोख़ का निधन हुआ।
चिकित्साशास्त्र का अध्ययन समाप्त करने के पश्चात रॉबर्ट कोख़ने टीबी, महामारी और एंथ्रेक्स जैसी बीमारियों के कारणों की खोज आरंभ की और उन्होंने इन बीमारियों का गहन अध्ययन किया। कोख़ने ने रोगों एवं उनके कारक जीवों का पता लगाने के लिए कुछ परिकल्पनाएं की थीं जो आज भी प्रयोग की जाती हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में राबर्ट कोख़ने को 1905 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सूक्ष्मजैविकी के क्षेत्र में राबर्ट कोख़ने, युगपुरूष माने जाते हैं।
- 27 मई सन् 1153 में मेलकॉलम IV स्कॉटलैंड के राजा बने।
- 27 मई सन् 1199 में जॉन की इंग्लैंड के राजा के रूप में ताजपोशी की गई।
- 27 मई सन् 1813 में अमेरिका ने फ़ोर्ट जार्ज, कनाडा पर क़ब्ज़ा किया।
- 27 मई सन् 1895 में ब्रिटिश अविष्कारक बर्ट एक्रेस ने फ़िल्म कैमरा/प्रोजेक्टर का पेटेंट कराया।
- 27 मई सन् 1921 में ब्रिटेन के नियंत्रण के 84 बरस बाद अफगानिस्तान को संप्रभुता मिली।
- 27 मई सन् 1941 में जर्मन युद्धक जहाज़ बिस्मार्क को ब्रिटिश नौसेना ने डुबोया।
- 27 मई सन् 1948 में महात्मा गांधी की हत्या का मुक़दमा शुरू हुआ।
- 27 मई सन् 1964 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ।
- 27 मई सन् 1994 में नोबेल साहित्य पुरस्कार विजेता रूसी लेखक एलेक्ज़ेंडर सोल्केनित्सिन पश्चिम में 20 वर्ष का निर्वासन समाप्त कर स्वदेश लौटे।
- 27 मई सन् 2005 में दक्षिण अफ़्रीका की राजधानी प्रिटोरिया का नाम बदलकर श्वाने करने का निर्णय लिया गया।
- 27 मई सन् 2006 को इंडोनेशिया में आये विनाशकारी भूकम्प में कम से कम 6,600 लोग मारे गये और हज़ारों लोग घायल हुए।
- 27 मई सन् 2010 में भारत ने उड़ीसा के चांदीपुर में बालसोरा ज़िले में परमाणु तकनीक से लैस धनुष और पृथ्वी 2 मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
27 मई 1926 ईसवी में फ़्रांसीसी और स्पैनिश सामाज्यवाद के विरुद्ध मुसलमानों के आन्दोलन को मोरक्को में पराजय का मुंह देखना पड़ा। इस आन्दोलन का नेतृत्व अब्दुल करीम रीफ़ी कर रहे थे जिन्होंने वर्षों स्पेन के विरुद्ध संघर्ष किया था। उन्होंने कई अवसरों पर सफलताएं भी अर्जित की थीं। स्पेन की सेना के विरुद्ध उनकी विजय ने फ़्रांस को अचंभित कर दिया था। रीफ़ क्षेत्र के आन्दोलन को फैलने से रोकने के लिए 1924 के आरंभ में फ़्रांसीसी सेना ने स्पेन की सहायता से आन्दोलन कारियों के विरुद्ध चौतरफ़ा आक्रमण किया। इस प्रकार इस आन्दोलन के नेताओं को गिरफ़्तार करने और क्षेत्र के हज़ारों लोगों का जनसंहार करने के पश्चात फ़्रांस और स्पैन के सैनिकों ने मोरक्को के इस जनान्दोलन का दमन कर दिया।

27 मई वर्ष 1332 ईसवी को प्रसिद्ध इतिहासकार इब्ने ख़लदून का जन्म हुआ। उनका नाम अब्दुर्रहमान है उन्हें अबू ज़ैद की उपाधि से याद किया जाता है। इब्ने ख़लदून ने कम उम्र में ही पवित्र क़ुरआन, हदीस, धर्मशास्त्र, दर्शनशास्त्र, तर्क शास्त्र, साहित्य और इतिहास में दक्षता प्राप्त कर ली थी। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में तारीख़े इब्ने ख़लदून है जो उन्होंने अपने देश ट्यूनीशिया से दूर मिस्र की धरती पर लिखी। इब्ने ख़लदून का 16 मार्च 1406 ईसवी को स्वर्गवास हो गया और उन्हें क़ाहिरा में दफ़न किया गया।
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7 ख़ुर्दाद सन 1359 हिजरी शम्सी को ईरान में इस्लामी क्रान्ति के बाद पहली संसद ने अपना कार्य आरंभ किया। ईरानी संसद का जिसे मजलिसे शूराए इस्लामी कहा जाता है, यह पहला चरण अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ था। इस विधायिका का दायित्व क़ानून बनाना और सरकार तथा राष्ट्रपति के कियाकलापों पर नज़र रखना है। ईरानी संसद में 290 सीटें है और सभी सांसद सीधे रुप से जनता द्वारा चुने जाते हैं। देश के हर शहर की जनसंख्या के अनुपात के अनुसार उसके लिए संसद में सीटें विशेष की गयी हैं। ईरान में धार्मिक अल्पसांख्यकों के लिए संसद में प्रतिनिधित्व रखने के लिए उनकी संख्या डेढ़ लाख होनी चाहिए। किंतु यह संख्या पूरी न होने के बावजूद अल्पसांख्यकों को संसद में प्रतिनिधित्व प्राप्त है। संसद में होने वाली चर्चा का रेडियो द्वारा सीधा प्रसारण होता है।
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4 शव्वाल सन 1260 हिजरी क़मरी को भारत के प्रसिद्ध धर्मगुरु सैयद मोहम्मद दिलदारी का जन्म हुआ। उन्होंने पहले अपने पिता फिर त्तकालीन प्रसिद्ध बुद्धिजीविसों और धर्मगुरुओं से शिक्षा ली। उन्होंने इस्लामी ज्ञान से संबंधित कई पुस्तकें लिखीं।
4 शव्वाल सन 351 हिजी क़मरी को मोहम्मद हसन दार क़ुत्नी नामक साहित्यकार और मुस्लिम धर्मगुरु का निधन हुआ। वे कुरआन के प्रसिद्ध विवरणकर्ताओं में थे। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं।