May ३०, २०१६ १०:०१ Asia/Kolkata
  • शनिवार - 30 मई

30 मई सन 1778 ईसवी को फ़्रांस के लेखक व दार्शनिक फ़्रान्सवा मैरी औरोए का 84 वर्ष की आयु में निधन हुआ।

1381, इंग्लैंड के एसेक्स में किसानों का विद्रोह शुरु हुआ।

1498, कोलंबस तीसरी बार 6 जहाज़ के साथ अमरीका की यात्रा पर निकला।

1826, उदन्त मार्तण्ड पहली हिन्दी समाचार पत्र की शुरुआत हुई, इसलिए 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस भी मनाया जाता है।

1922, वॉशिंगटन डीसी में लिंकन स्मारक समर्पित किया गया।

1987, गोवा को भारत के राज्य का दर्जा मिला। गोवा भारत का 26वां राज्य बना।

2010, पाकिस्तान के क़बाइली क्षेत्र ओरकज़ई ज़िले के तीन गांवों में तालिबान आतंकवादियों के छह ठिकानों पर सुरक्षा बलों द्वारा किए गए ज़मीनी और हवाई हमलों में कम से कम 15 आतंकवादी मारे गए।

 

अपनी आयु में उन्हें दो बार जेल जाना पड़ा तथा एक बार तीन वर्ष के लिए उन्हें  देशनिकाला देकर ब्रिटेन भेज दिया गया। इन घटनाओं से वाल्टर फ़्रांस सरकार की ओर से और भी निराश व क्षुब्ध हो गये। उन्होंने इसी काल में अपनी पुस्तक ब्रिटिश राष्ट्र के नाम पत्र की रचना की जिसका फ़्रांस में बड़ा स्वागत हुआ। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी हैं। उनकी पुस्तकें 52 प्रतियों पर अधारित हैं। इनमें दर्शनार्थी की त्रास्दी ,राष्ट्रों के विचार एवं परम्परा का अध्ययन सादा ह्रदय आदि आधिक लोकप्रिय हैं।

 

      30 मई सन 1778 ईसवी को फ़्रांस के भौतिक व रसायन शस्त्री जोज़फ गे लुज़ैक का जन्म हुआ। उन्होने अपने जीवन में अनेक अविष्कार और खोज की। उन्होंने सियालोज़न नामक विषैली गैस की खोज की । उन्होंने इसी प्रकार गैस संबंधी एक नियम भी बनाया जो उनके और उनके साथी चार्ल गे लुज़ैक के नाम से जाना जाता है। सन 1850 में उनका निधन हुआ।

 

30 मई सन 1918 ईसवी को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी व संयुक्त सेना के बीच मैरेन नामक युद्ध समाप्त हुआ। संयुक्त सेना में ब्रिटेन, अमरीका और फ़्रांस की सेनाएं शामिल थीं। पूर्वीत्तरी फ़्रांस की मैरेन नदी के निकट होने वाला यह युद्ध 5 दिनों तक चला जिसमें जर्मनी की सेना को विजय प्राप्त हुई थी। इसमें संयुक्त सेना के 55 हज़ार सिपाही बंदी बना लिए गये थे।

 

 30 मई सन 1960 ईसवी को बोरिस पास्टरनेक नामक रुसी लेखक व शायर का निधन हुआ। वे सन 1890 ईसवी में मॉस्को में जन्म थे। उन्होंने कुछ समय तक संगीत क़ानून और दर्शनशास्त्र की शिक्षा प्राप्त की किंतु बाद में शायरी और ड्रामें  लिखने में रुचि लेने लगे और 1930 ईसवी से वे रुस के सबसे बड़े शायर के रुप में पहचाने गये। उनकी सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक डॉक्टर जिवागो है जिसने उन्हें 1958 में साहित्य का नोबल पुरस्कार विजेता बनवाया। किंतु रूस की सरकार ने उनके रूस से निकलने और यह पुरूस्कार लेने पर रोक लगा दी। उनकी दूसरी भी महत्वपूर्ण रचनाएं हैं।

 

 

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10 खुर्दाद सन 1371 हिजरी शम्सी को तेहरान के तकनीकी विश्व विद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर जलाल समीमी को आकाशगंगा के बारे में 20 वर्ष के अध्ययन और गामा किरणों के बारे में प्रयोग के बाद आकाश गंगा के बीच में गामा किरणों के स्रोतों का पता लगाने में सफलता मिली। उल्लेखनीय है कि वे सन 1319 हिजरी शम्सी में ईरान के दक्षिण पूर्वी नगर ज़ाबुल में जन्मे थे उन्होंने भौतिक शास्त्र में डॉक्ट्रेट की डिग्री प्राप्त की। 

 

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7 शव्वाल सन 3 हिजरी क़मरी को मुसलमानों और अनेकिश्वरवादियों के बीच पवित्र नगर मदीना के उत्तर में ओहोद नामक एक पहाड़ के आंचल में इसी नाम की लड़ाई हुई।

बद्र नामक लड़ाई में भारी पराजय का सामना करने के बाद कुरैश के 3 हज़ार नास्तिक बड़ी तैयारी के साथ ओहोद के मैदान में पहुँचे जबकि मुसलमानों की संख्या सात सौ से अधिक नही थी। लड़ाई से पहले पैग़म्बरे इस्लाम स ने पहले की भॉति इस बार भी अपने साथियों से इस बारे में विचार विमर्श किया कि नास्तिकों का मुक़ाबला कैसे किया जाए। अंतत: पैग़म्बरे इस्लाम ने उन लोगों के विचार को स्वीकार किया जो कह रहे थे कि लड़ाई मदीना नगर के बाहर हो। दोनों पक्षों के बीच ओहद पर्वत कें आंचल में लड़ाई हुई। आरंभ में मुसलमानों को सफलताएं मिलीं कुछ मुसलमानों ने पर्वत के एक दर्रे के मुहाने की सुरक्षा पर आधारित पैग़म्बरे इस्लाम स के आदेश की अनदेखी की और लापरवाही से काम लिया जिसके बाद नास्तिक उसी दर्रे से घुस आए और मुसलमानों पर व्यापक आक्रमण कर दिया और उन्हें बड़ी कठिनाई में डाल दिया। उस समय पैग़म्बरे इस्लाम की जान भी ख़तरे में पड़ गयी और पैग़म्बरे इस्लाम स के वीर एवं त्यागी चचा हज़रत हम्ज़ा अ सहित 70 मुसलमान शहीद हो गये। उस जंग में हज़रत अली की वीरता से नास्तिकों को विजय नहीं मिल सकी वे मक्का लौटने पर विवश हो गये।

 

7 शव्वाल वर्ष 306 हिजरी क़मरी को सामानी काल के ईरानी बुद्दिजिवी अहमद बिन जीहानी का देहॉंत हुआ। अब अब्दुल्लाह अहमद बिन जीहानी प्रसिद्ध ईरानी राजनीतिक एवं भूगौल शास्त्री थे और वे अपने मूल्यवान शोधों के कारण इस्लामी जगत में प्रसिद्ध हो गए। इब्ने जीहानी की सब से महत्वपूर्ण रचना, भूगौल के संबंध में अल्मसालिक वल्ममालिक नाम की एक पुस्तक है। भूशास्त्रियों ने अपनी किताब में इस पुस्तक से लाभ उठाया है।