May ३१, २०१६ ११:०० Asia/Kolkata

31 मई सन 1809 ईसवी को ऑस्ट्रिया के संगीतकार जोज़फ़ हाइडन का निधन हुआ।

1774, भारत में पहला डाक सेवा कार्यालय खोला गया।

1867, बंबई में प्रार्थना समाज की स्थापना हुई।

1921, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे को अंगीकार किया गया।

1959, बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को तिब्बत से निर्वासन के बाद भारत में शरण दी गई।

1964, बंबई में इलेक्ट्रिक ट्राम अंतिम बार चली।

1994, दक्षिण अफ़्रीक़ा गुट निरपेक्ष आन्दोलन का 109वां सदस्य राष्ट्र बना।

1996, बेंजामिन नेतान्याहू इस्रायल के नए प्रधानमंत्री चुने बने।

2006, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख मुहम्मद अलबरदेई ने स्पष्ट किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और इससे दुनिया को कोई ख़तरा नहीं।

2007, सैप ब्लेटर तीसरी बार अंतर्राष्ट्रीय फ़ुटबाल संघ के अध्यक्ष बने।

2010, भारत में मान्यता प्राप्त हर प्राइवेट स्कूल में ग़रीब बच्चों के लिए 25 फ़ीसदी सीटें आरक्षित करने का क़ानून बनाया गया।

 

वे सन 1732 ईसवी में जन्में उन्होंने अपनी क्षमता से संगीत के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त की। सन 1781 इसवी में वे अपने काल के विश्व विख्यात संगीतकार मोटसर्ट से परिचित हुए फिर उन्होंने बहुत तेज़ी से संगीत के क्षेत्र में प्रगति की।

 

31 मई वर्ष 1818 को साप्ताहिक समाचार पत्र समाचार दर्पण प्रकाशित हुआ। यह साप्ताहिक समाचार पत्र बंगाली भाषा में प्रकाशित हुआ। इसका महत्त्व यह है कि यह भारतीय उपमहाद्वीप में किसी स्थानीय भाषा में प्रकाशित होने वाला पहला समाचार पत्र था। भारतीय उपमहाद्वीप में पत्रकारिता का आरंभ बंगला गज़ेट और कलकत्ता एडवर्टाइज़र से हुआ। बाद में विभिन्न समाचार पत्रों जैसे मारनिंग पोस्ट, टेलीग्राफ, कलकत्ता कोरियर और ओरियंटल स्टार, इंडिया गज़ेट, एशियायि मिरर और गारजियन इत्यादि ने पत्रकारिता के क्षेत्र में क़दम रखा किन्तु यह सारे समाचार पत्र अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित होते थे। अंततः 31 मई वर्ष 1818 को शामार्श मीन नामक एक पादरी ने बंगाली भाषा में एक साप्ताहिक समाचार पत्र प्रकाशित किया जिसका नाम समाचार दर्पण रखा गया। इसके बाद बंगाली भाषा में बंगाल गज़ेट के नाम से एक और समाचार पत्र प्रकाशित हुआ। फिर सन 1822 ईसवी में उर्दू भाषा में जामे जहां नुमा और फ़ारसी भाषा में अलअख़बार का प्रकाशन हुआ किन्तु भारीय जब भी भारतीय उपमहाद्वीप भारत और पाकिस्तान के पत्रकारिता के इतिहास का वर्णन होगा तो भारत कि किसी स्थानीय भाषा में प्रकाशित होने वाले पहले समाचार पत्र समाचार दर्पण का नाम अवश्य लिया जाएगा।

 

31 मई सन 1887 ईसवी को जर्मनी के विख्यात गणितज्ञ और भौतिकशास्त्री गोस्टाव किरचोफ़ का निधन हुआ। वे सन 1824 ईसवी में जन्मे थे। उन्होंने सूर्यप्रकाश और उसके विश्लेषण के संबंध में गहन अध्ययन किया। कुछ समय बाद वे अपने एक मित्र बोन्सन के साथ मिलकर इस काम में सफल भी हो गये। उन्होंने इसी प्रकार विद्युत की लहरों के बदल जाने के क़ानून का भी वर्णन किया।

 

31 मई सन 1910 ईसवी को अफ़्रीक़ा महाद्वीप में ब्रिटेन के दो उपनिवेशों के विलय के बाद दक्षिण अफ़्रीक़ा देश अस्तित्व में आया और इसे स्वतंत्रता मिली। अफ़्रीक़ा महाद्वीप के बिलकुल दक्षिणी भाग में स्थित होने तथा सोने आदि की खदानों से समृद्ध होने के कारण दक्षिणी अफ़्रीक़ा देश का युरोपियों के निकट बड़ा महत्व रहा है। पुर्तग़ाल के खोजकर्ता डेयाज़ ने इस देश को 1388 में खोजा किंतु 17वीं शताब्दी के मध्य से हॉलैंड और उसके दो  शताब्दियों बाद ब्रिटेन ने उसे अपना उपनिवेश बनाया। सन 1899 में हॉलैंड से पलायन करके दक्षिणी अफ़्रीका जाने वाले हॉलैंड वासियों ने ब्रिटेन के विरुद्ध विद्रोह किया किंतु तीन वर्ष बाद उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा । ब्रिटेन ने 1910 में दक्षिणी अफ़्रीक़ा संघ के गठन पर सहमति जताई। और सन 1931 में उसे पूर्ण रूप से स्वतंत्रता मिली। किंतु इस देश के अल्पसख्यक गोरों ने सत्ता अपने हाथ में रखी। बाद में इस देश के अश्वेतों ने अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए अभियान छेड़ा जिससे सन 1991 में गोरों को भेदभाव छोड़ना पड़ा।

 

31 मई वर्ष 1910 को विश्व की पहली महिला डाक्टर एलिज़ाबेथ का निधन हुआ। वह 3 फ़रवरी वर्ष 1821 ईसवी को ब्रिस्टल के स्थान पर जन्मी थीं। 11 वर्ष की आयु में वे अपने पिता के साथ न्यूयार्क चली गयीं और विभिन्न चिकित्सकीय प्रतिष्ठानों में प्रवेश लेने का प्रयास किया किन्तु हर बार विफल रहीं। उन्होंने अपने प्रयास जारी रख और अंततः 20 अक्तूबर वर्ष 1847 ईसवी को उन्हें यूनीवर्सिटी आफ़ जेनेवा के मेडिकल इन्सीट्यूट में प्रवेश मिल गया और वे 23 जनवरी सन 1849 ईसवी को डाक्टर आफ़ मेडिसिन की डिग्री प्राप्त करने में सफल हो गयीं। डाक्टरी की डिग्री मिलने के बाद जब उन्हें किसी अस्पताल में नौकरी नहीं मिली तो उन्हों ने प्राइवेट क्लिनिक खोल लिया और प्रेक्टिस आरंभ कर दी। उनका यह क्लिनिक बाद में अस्पताल में परिवर्तित हो गया। यह विश्व का पहला अस्पताल था जिसमें काम करने वाली सभी महिलाएं थीं। एलिज़ाबेथ पूरे जीवन कुंआरी रहीं। जब उनका निधन हुआ तो उनकी आयु 89 वर्ष थी।

 

31 मई सन 1919 ईसवी को अफ़ग़ानिस्तान को दोबारा स्वतंत्रता मिली। अतीत में अफ़ग़ानिस्तान विभिन्न जातियों के अधीन रहा। 1747 में अहमद शाह अबदाली ने पहली बार इस देश की स्वतंत्रता की घोषणा की किंतु इसके एक शताब्दी के बाद ब्रिटेन ने अपने उपनिवेश भारत को सुरक्षित रखने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप आरंभ कर दिया जिससे ब्रिटेन से इस देश की पहली लड़ाई हुई। इस युद्ध में ब्रिटिश सेना को भारी क्षति उठाने के बाद पीछे हटना पड़ा। किंतु ब्रिटेन ने इस देश में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए प्रयास जारी रखे। सन 1905 ईसवी में ब्रिटेन को इस उददेश्य में सफलता मिली। 1919 में अमानुल्ला ख़ान ने अफ़गानिस्तान की स्वतंत्रता की घोषणा की जिसके बाद ब्रिटेन ने अफ़ग़ानिस्तान पर आक्रमण किया और  अंतत: अमानुल्ला खान को सत्ता छोड़नी पड़ी। यह देश निरंतर झड़पों संघर्षे और युद्ध का केंद्र रहा है।

 

31 मई वर्ष 1935 ईसवी को पाकिस्तान के नगर कोयटा में भीषण भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता साढ़े सात मापी गयी। यह विश्व का ग्यारहवा सबसे भीषण भूकंप था जो लगभग तीस सेकेन्ड तक जारी रहा। इस भूकंप में लगभग 60 हज़ार लोग मारे गये। कोयटा के सैकड़ों घर और लगभग समस्त महत्त्वपूर्ण इमारतें मिट्टी के ढेर में परिवर्तित हो गयी।

 

***

8 शव्वाल सन 372 हिजरी क़मरी को फ़ार्स के दीयालमे शासन श्रृंखला के दूसरे शासक अज़ुदोद्दौला दैलमी का देहांत हुआ। वे एमादोदौला दैलमी के उत्राधिकारी थे। उन्होंने अपने शासन काल में ईरान, इराक़ तथा पूर्वी तुर्की के बहुत से क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया और इराक़ तथा फ़ार्स में बहुत सी इमारतें बनवाईं। आज ही के दिन बीमारी के कारण अज़ुदोद्दौला दैलमी का देहांत हुआ और उन्हें हज़रत अली अलैहिस्सलाम के रौज़े के निकट इराक़ के नजफ़ नगर में दफ़नाया गया।  

 

8 शौवाल सन 1324 हिजरी क़मारी को ईरान में फ़ार्सी समाचारपत्र मजलिस का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ। यह समाचार पत्र मिर्ज़ा सैयद मोहम्मद सादिक़ तबातबाई नामक संविधान क्रान्ति के नेता द्वारा निकाला गया। वे एक वरिष्ठ क्रान्तिकारी नेता सैयद मोहम्मद ताबातबई के पुत्र थे। उल्लेखनीय है कि सविधान क्रान्ति की घोषणा और प्रेस की स्वतंत्रता के बाद ईरान में समाचार पत्रों की संख्या बढ़ती चली गयी और ईरान के विभिन्न नगरों से दसियों समाचार पत्र निकलने लगे किंतु संविधान क्रान्ति के काल में ईरान में संसद खुलने के बाद पहला समाचार पत्र मजलिस प्रकाशित हुआ। इसमें संसद की बैठकों का ब्योरा विशेष रुप से दिया जाता था।