Jun ०२, २०१६ ०९:५३ Asia/Kolkata

2 जून सन 1942 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के मार्शल आरविन रुमैलो ने उत्तरी अफ़्रीक़ा में ब्रिटेन की सेना के विरूद्ध भीषण आक्रमण आरंभ किया।

इस आक्रमण से पहले ब्रिटिश सैनिकों ने लीबिया पर आक्रमण करके उसे जर्मनी की सेना के अधिकार से निकाल लिया था किंतु रुमैलो ने भीषण आक्रमण करके ब्रिटेन की सेना से लीबिया को वापस लेने के साथ ही मिस्र की इस्कन्दरिया बंदरगाह तक उसे पीछे ढकेल दिया। यदि जर्मन सेना इसी प्रकार आगे बढ़ती रहती तो अत्यंत महत्वपूर्ण स्वेज नहर भी संयुक्त सेना के कब्ज़े से निकल जाती किंतु ब्रिटेन की सेना ने भी कड़ा संघर्ष किया और नवम्बर सन 1942 में जर्मन सेना को पराजित कर दिया।

  • 2 जून सन् 1746 में रूस और ऑस्ट्रिया ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किये थे।
  • 2 जून सन् 1780 में कैथोलिक विरोधी प्रदर्शनकारियों ने लंदन में पार्लियामेंट पर हमला कर दिया था।
  • 2 जून सन् 1896 में गुगलिएलमो मार्कोनी ने रेडियो को अपने नाम पर पेटेंट कराने के लिये आवेदन दिया जो बाद में दो जुलाई 1897 को स्वीकार कर लिया गया।
  • 2 जून सन् 1947 को लार्ड लुई माउंटबेटन ने भारत के विभाजन की घोषणा की।
  • 2 जून सन् 1953 में ब्रिटिश राजगद्दी पर महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की ताजपोशी हुई।
  • 2 जून सन् 1966 में अमेरिका ने अपने पहले ही प्रयास में चांद पर अंतरिक्षयान उतारा।
  • 2 जून सन् 1974 में माली ने अपना संविधान अपनाया।
  • 2 जून सन् 1996 को यूक्रेन अपने अंतिम परमाणु युद्धास्त्र रूस को सौंपने के साथ ही परमाणु मुक्त देश बना।
  • 2 जून सन् 2011 को तत्कालीन भारत सरकार ने शहरी क्षेत्रों में झुग्गी झोपडियों से मुक्ति दिलाने और गरीबों को अपने घर का सपना पूरा कराने में सहायता के लिए राजीव गांधी आवास योजना के पहले चरण को मंजूरी दी।

2 जून सन् 2012 में मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को 2011 की अरब क्रांति के दौरान प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश देने के आरोप में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।
 

2 जून सन 1963 ईसवी को तुर्की के विख्यात शायर नाज़िम हिकमत का निधन हुआ। वे सन 1902 ईसवी में जन्मे और 12 वर्ष की आयु से शायरी आरंभ की। शिक्षा प्राप्ति के बाद वे सेना में भर्ती हो गये किंतु सन 1920 ईसवी में नाज़िम हिकमत का राजनीति की ओर झुकाव हुआ जिसके के कारण सेना से उन्हें निकाल दिया गया। वे उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए मॉस्को चले गये जहॉ शिक्षा पूरी करने के बाद वे स्वदेश लौटे और अतातुर्क की तत्कालीन सरकार की आलोचना में शेर लिखने लगे जो पश्चिम की ओर झुकाव रखती थी। उनकी शायरी का जनता और सेना की ओर से भारी स्वागत हुआ जिससे सरकार को भय हुआ और उसने नाज़िम हिकमत को जेल में डाल दिया। 12 वर्षों तक जेल में रहने के बाद वे स्वतंत्र हुए किंतु अपने लिए ख़तरों का आभस करके वे दोबारा मॉस्को चले गये और चूंकि अतातुर्क सरकार ने उन्हें तुर्की की नागरिकता से वंचित कर दिया था इस लिए वे 1963 में अपनी मृत्यु तक मॉस्को में ही रहे।

2 जून सन 1969 ईसवी को ऑस्ट्रेलिया का विमानवाहक जलपोत अमरीकी जहाज़ से टकरा गया जिससे 73 अमरीकी नाविक मारे गये। यह दुर्घटना दक्षिणी चीन के जल क्षेत्र में हुई।

2 जून 1997 ईसवी को तिमोथी मैकवे नामक व्यक्ति को ओकलाहोमा सिटी की आतंकवादी घटना का दोषी घोषित किया गया। इस घटना में 168 व्यक्ति मारे गये थे। आज ही के दिन अमरीका की टेनिस खिलाड़ी हेलेन जैकब्स की 88 वर्ष की आयु में मृत्यु हुई। उन्होंने 1936 ईसवी में विम्बल्डन प्रतियोगिता में जीत दर्ज कराके विश्व की नम्बर एक टेनिस खिलाड़ी का ख़िताब जीता था।

 

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13 ख़र्दाद सन 1342 हिजरी शम्सी को ईरान की इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक स्वर्गीय ईमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने आशूरा के दिन ईरान की शाही सरकार के विरुद्ध ऐतिहासिक भाषण दिया। शाह की गंबीर धमकियों के बावजूद इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने पवित्र नगर क़ुम के धार्मिक शिक्षा केंद्र , मदरसए फ़ैज़िया, में भारी संख्या में लोगों की उपस्थिति में यह भाषण दिया। इसमें इमाम ख़ुमैनी ने शाह की विश्वासघाती कार्यवाहियों की तीखी आलोचना की और उसके घिनावने क्रियाकलापों को जनता के समक्ष स्पष्ट किया। इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने अपने इस भाषण के एक भाग में शाह की अत्याचारी सरकार की ओर संकेत करते हुए कहा था: यह लोग इस्लाम और धर्मगुरुओं के विरोधी हैं और उन्हें ख़त्म करना चाहते हैं। हे लोगो हमारा इस्लाम और हमारा देश खतरे में है। हमें नेताओं की स्थिति को लेकर बड़ी चिंता और बड़ा खेद है।

13 ख़ुरदाद वर्ष 1348 हिजरी शम्सी को इस्लाम धर्म के महान विद्वान और वरिष्ठ नेता सैयद मोहसिन हकीम का 84 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हुआ। वह 1264 हिजरी शम्सी में जन्म थे। आयतुल्लाह सैयद मोहसिन हकीम ने बाल्यावस्था में ही पूरा पवित्र क़ुरआन याद कर लिया। उसके बाद उन्होंने धार्मिक शिक्षा आरंभ की और उन्होंने महान धर्मगुरूओं से ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने वरिष्ठ धर्म गुरू बनने के बाद पढ़ाना आरंभ किया। आयतुल्लाह सैयद मोहसिन हकीम ने अरब-ज़ायोनी शासन के मध्य होने वाले छह दिवसीय युद्ध के बाद इस्लामी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को टेलीग्राफ़ भेजा जिसमें अपने विवाद दूर करने और इस्लामी समाज के बारे में चिंतन मनन करने की अपील की गयी थी। उन्होंने इस संदेश में ज़ायोनिज़्म का मुक़ाबला करने के लिए समस्त मुसलमानों की एकता पर बल दिया था। उन्होंने इराक़ और अन्य इस्लामी देशों में बहुत से धार्मिक शिक्षा केन्द्रों और मस्जिदों का निर्माण कराया। इसके अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न पुस्तकें भी लिखी हैं जिनमें मुस्तमसिक अलउरूवतुल वुस्क़ा, हक़ाएक़ुल उसूल और नहजुल फ़क़ाहत का उल्लेख मुल्य रूप से किया जा सकता है।

 

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10 शौवाल सन 328 हिजरी क़मरी को इराक़ के प्रसिद्ध धर्मगुरु लेखक और लिपिकार अबू अली बिन अब्दुल्ला बग़दादी का निधन हुआ। वे इराक़ के बग़दाद नगर में पैदा हुए और उस समय के विख्यात लोगों से शिक्षा प्राप्त की। अब्बासी शासकों ने उन्हें अपना मंत्री बनाया था। किंतु उन्होंने जब अब्बासी शासकों के अत्याचारों का कड़ाई से विरोध किया तो उनसे यह पद छीन लिया गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया। शासक के आदेश पर पहले उनके हाथ और ज़बान काटी गयी फिर उनकी हत्या कर दी गयी।

वे अपनी विशेष लिपि के लिए भी प्रसिद्ध थे वे अंको के रुप में अक्षर लिखते थे। उन्होंने अरबी भाषा में कई लिपियों का आविष्कार किया। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं।