निज़ामी गन्जवी-5
हमने यह बताया था कि “मख़ज़नुल असरार” नैतिक कहानियों का एक संग्रह है।
हमने यह बताया था कि “मख़ज़नुल असरार” नैतिक कहानियों का एक संग्रह है। इसमें निज़ामी गंजवी ने मनुष्य की अंतर्रात्मा को संबोधित करते हुए इस बात का प्रयास किया है कि उसे वास्तविकता से अवगत करवाया जाए। इस प्रकार से उन्होंने मानव को ईश्वरीय पहचान तक पहुंचने का प्रयास किया है।
“मख़ज़नुल असरार” के बाद अन्य रचनाओं में निज़ामी की शैली में परिवर्तन आया है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि निज़मी ने “मख़ज़नुल असरार” में जो शैली अपनाई थी उससे उन्होंने दूरी बना ली। इस प्रकार “ख़ुसरो व शीरीन” “लैला व मजनू” “हफ़्त पैकर” और “सिकंदर नामे” जैसे उनके पध संकलनों के अध्ययन से यह बात स्पष्ट रूप में समझ में आती है कि निज़ामी ने “मख़ज़नुल असरार” की रचना में जो शैली अपनाई थी उससे वह बहुत दूर हो चुके हैं।
इससे यह पता चलता है कि बात को सीधे ढंग से कहने की तुलना में धुमाफिरा के कहना अधिक पसंद करते हैं। एक समकालीन जानेमाने साहित्यकार डा. कामिल अहमद नेज़ाद का कहना है कि यह बात निज़ामी की होशियारी को दर्शाती है। डा. अहमद नेजाद ने नेज़ामी की “ख़म्से नेज़ामी” नामक रचना की कई आयामों से समीक्षा भी की है।
इसके बाद से निज़ामी ने इस बात का प्रयास किया कि संबोधन की अचछी से अच्छी शैली को परिचित कराया जाए। इस प्रकार से उन्होंने अपने विचारों और अपनी आस्था को समझाने का प्रयास किया है। निज़ामी का यह मानना था कि जीवन और सृष्टि का केन्द्र, प्रेम है। एसा प्रेम जिसमें तत्वदर्शिता और दर्शन का मिश्रण हो।
निज़ामी ने “मख़ज़नुल असरार” की रचना के बाद अपना पूरा जीवन, आदर्श नगर के ढूंढने में व्यतीत किया। इस दौरान उन्होंने जो कविताएं कही हैं उनमें जीवन के संघर्ष और समाजिक संघर्ष तथा शासकों की अज्ञानता और उनके भोग विलास जैसी बातों को स्थानांतरित करने के प्रयास किये गए हैं। इस प्रकार से निज़ामी यह चाहते थे कि कविताओं के माध्यम से संसार की अच्छी छवि को लोगों के सामने पेश किया जाए।
निज़ामी के समस्त रचनाओं में इस बात का भरसक प्रयास किया गया है कि अन्याय और समस्याओं से मुक्त संसार की छवि को पेश किया जाए। अपने दृष्टिगत संसार की खोज में वे विभिन्न चरणों से गुज़रे। ऐसे में उनके प्रत्येक पध संकलन को निज़ामी के प्रयास का एक चरण भी कहा जा सकता है। अपने प्रत्येक पध संकलन में वे अपने इच्छित या दृष्टिगत संसार से निकट होते गए हैं।
निज़ामी प्रेम की सहायता से अपने मार्ग पर बढ़ते रहे हैं। “मख़ज़नुल असरार” के बाद निज़ामी ने ख़ुसरो व शीरीन तथा लैला और मजनू नामक दो पध संकलनों की रचना की। उनकी यह दोनों रचनाएं, प्रेम पर आधारित हैं। इनमें से एक की समाप्ति मिलन पर होती है जबकि दूसरे की समाप्ति अलगाव या जुदाई पर होती है।
इन दोनों रचनाओं की संयुक्त बात यह है कि दोनो के मुख्य पात्र अंत में मर जाते हैं। ख़ुसरो और शीरीन नामक गध रचना में दोनों की शादी हो जाने के बाद ख़ुसरो की हत्या उसी का बेटा शीरूये कर देता है। इस प्रकार इस कहानी के दोनो मुख्य पात्रों की मृत्यु के साथ कहानी भी ख़त्म हो जाती है। लैला और मजनू नामक पध संकलन में भी नेज़ामी ने उनके आपसी प्रेम क उल्लेख किया है किंतु दोनों का आख़िर तक मिलन नहीं हो पाता और वे भी मर जाते हैं।
इन दोनो पध संकलनों अर्थात ख़ुसरो व शीरीन तथा लैला और मजनू में पूरी कहानियां दो महिलाओं के व्यक्तित्व पर आधारित है। इसमें उनके जीवन की विशेषताओं का उल्लेख किया गया है। नेज़ामी ने जिस समाज की कल्पना की थी उस आदर्श समाज की पहली झलक इनमें दिखाई देती है। दूसरे शब्दों में उनकी इस कल्पना का आरंभ ही यहीं से होता है। अपनी इन दोनों कहानियों में निज़ामी ने महिलाओं को विशेष महत्व दिया है। उनका मानना है कि महिला, महान व्यक्तित्व की स्वामी है और मनुष्यों की परिपूर्णता महिला के बिना संभव नहीं है। ख़ुसरो और शीरीन नामक कहानी में शीरीन, निज़ामी के निकट एक आदर्श महिला है। उनके हिसाब से शीरीन में महिलाओं में पाई जाने वाली समस्त विशेषताएं पाई जाती हैं। निज़ामी ने शीरीन को इतना महत्व दिया है कि उसके मरने पर उन्होंने दुखद शेर कहे हैं। उनका यह मानना है कि जो भी शीरीन की कहानी पढ़ेगा वह उससे प्रभावित होकर रो देगा।
निज़ामी ने इन दोनों पध संकलनों की रचना के बाद अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कल्पना का सहारा लिया है। उन्होंने अपनी कल्पनाओं को “हफ़्त पैकर” नामक पध संकलन में पेश किया है। हफ़्त पैकर वास्तव में सासानी शासक बहराम गूर के जीवन की कहानी है। बहराम की बीवियां, बहराम से संबन्धित जो बातें बताती हैं वे बातें ही वास्तव में इस पध संकलन का मुख्य भाग हैं।
ईरान के एक तत्कालीन शोधकर्ता डा. अब्दुल हुसैन ज़र्रीन कूब का मानना है कि हफ़्त पैकर नामक संकलन में हकीम अबू मुहम्मद इलियास निज़ामी गंजवी की कविता कहने तथा कल्पना को कहानी माध्यम से बताने की योग्यता को स्पष्ट ढंग से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें उन्होंने अपनी कला को बहुत ही उच्च स्तर से पेश किया है। इसमें उन्होंने जिस संसार का उल्लेख किया है वह निष्क्रिय नहीं बल्कि सक्रिय संसार है। निज़ामी का कहना है कि हालांकि संसार सक्रिय है किंतु उसमें रहने वाले अधिकांश लोग परिपूर्णता तक पहुंचने के लिए प्रयास करते दिखाई नहीं देते। नेज़ामी ने परिपूर्ण संसार को प्राप्त करने के उद्देश्य से सिंकवर जीवन को पेश किया है। इस उद्देश्य से उन्होंने सिकंदरनामे नामक अपने पद्ध संकलन में इस बात का प्रयास किया है कि वे लोगों को अपने दृष्टिगत संसार के निकट ले जा सकें।
सिकंरदर नामे वास्तव में सिकंदर महान के जीवन पर आधारित एक पध संकलन है जिसे पूर्व के एक कवि ने संकलित किया है। जिस सिंकदर का उल्लेख निज़ामी ने अपने सिकंदर नामे में किया है वह यूनान के सिकंदर, यूनान से बिल्कुल अलग है। जिस सिकंदर का उल्लेख निज़ामी ने अपने सिकंदरनामे में किया है वह वास्तव में युद्धों, रक्तपात या लड़ाई झगड़े के प्रयास में न रहकर एक बुद्धिमान विचारक है। वह तत्वदर्शियों और दार्शनिकों के साथ उठता बैठता है। वे धर्म को मानता है और धार्मिक कार्यों को करता है। दूसरे शब्दों में वह धर्म पर पूरी आस्था रखता है।
वह संसार का भ्रमण तो करता है किंतु संसार में घटने वाली घटनाओं से पाठ भी लेता है। यह सिकंदर अंततः आबे हयात या अमृत की तलाश में निकलता है और निज़ामी के अनुसार इस प्रकार वह परिपूर्णता तक पहुंचता है। इस संसार में जो वास्तव में निज़ामी का आदर्श संसार है, न युद्ध है और न ही धोखाधड़ी, न झूठ है और न ही अन्याय। यह बुराई रहित संसार है। यहां पर न्याय का बोलबाला है और इस संसार के वासी शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं।
नेज़ामी ने सिकंदरनामे के माध्यम से जिस आदर्श संसार को प्रस्तुत किया है उसके माध्यम से वे लोगों से यह अपेक्षा करते हैं कि वे इस प्रकार के संसार की तलाश में रहें। नेज़ामी का मानना है कि इस प्रकार के आदर्श संसार को पाने के लिए मनुष्य को नैतिक शिक्षाओं और अच्छे आचरण से सुसज्जित होना होगा।