गुरुवार- 4 जून
14 ख़ुर्दाद सन 1368 हिजरी शम्सी को ईरान की इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ने संसार से विदा ली।
- 14 ख़ुर्दाद सन 1368 हिजरी शम्सी को इमाम ख़ुमैनी का स्वर्गवास हुआ।
- 14 ख़ुर्दाद सन 1368 हिजरी शम्सी को ही आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई को इस्लामी क्रान्ति का वरिष्ठ नेता चुना गया।
- 4 जून वर्ष 1988 को ऊर्दू के प्रसिद्ध आलोचक और साहित्यकार मजनूं गोरखपुरी का निधन हुआ।
- 4 जून सन 1989 को बीजिंग के तियान आन मन नामक स्क्वेयर पर छात्रों का जनसंहार हुआ।
4 जून सन 1989 ईसवी को चीन की राजधानी बीजिंग के तियान आन मन नामक स्क्वेयर पर छात्रों के बिरुद हिसा की घटना हुई। इस दिन हज़ारों चीनी छात्र इस स्क्वेयर पर एकत्रित हुए थे और खुले राजनैतिक वातावरण कम्युनिष्ट पार्टी के अधिकारों में कमीं संसद की शक्ति और अधिकारों में वृद्धि तथा सांसदों के निर्वाचित होने की मांग कर रहे थे। सरकार ने बार बार चेतावनी दी किंतु प्रदर्शन जारी रहे और अंतत:पुलिस और सेना के जवानों ने छात्रों के प्रदर्शनों को बुरी तरह कुचला।
छात्रों और पुलिस की इस झड़प से चीन के विरूद्ध पश्चिमी देशों को अच्छा बहाना मिल गया और उन्होंने इस घटना पर खूब हो हल्ला मचाकर चीन की सरकार पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया और उस पर दबान बनाने का प्रयास किया।
4 जून सन 1944 ईसवी को संयुक्त सेना ने रोम को नाज़ी जर्मनी के सैनिकों से छुड़ाया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया था।
4 जून सन 1961 ईसवी को पूर्व सोवियत संघ के नेता निकिता ख़ोरोशचेव ने तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ़ केनेडी को एक शांति कॉन्फ़्रेन्स का प्रस्ताव दिया ताकि जर्मनी के बर्लिन नगर को एक स्वतंत्र नगर घोषित किया जाए।
चार जून वर्ष 1988 ईसवी को ऊर्दू के प्रसिद्ध आलोचक और साहित्यकार मजनू गोरखपुरी का निधन हुआ। उनका पूरा नाम अहमद सिद्दिक़ था। वह दस जून वर्ष 1904 ईसवी को भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के ज़िला बस्ती में जन्मे किन्तु चूंकि अधिकतर आयु उन्होंने अपनी नानी के यहां बिताया इस लिए गोरखपुर उनके नाम का एक भाग बन गया। उन्होंने बीए तक की शिक्षा गोरखपुर में प्राप्त की। उसके बाद गोरखपुर में एवाने एशाअत के नाम से संस्था का गठन किया और एवान के नाम से एक पत्रिका प्रकाशित की। फिर उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में एमए किया और उसके बाद कोलकाता विश्वविद्यालय से ऊर्दू साहित्य में एमए किया। वर्ष 1966 में भारत से पाकिस्तान चले गये जहां कराची विश्वविद्यालय से उर्दू विभाग से जुड़ गये। मजनू गोरखपुरी के लघुकथा “सोगवार शबाब” को बहुत ख्याति प्राप्त हुई और उनकी आलोचनात्मक बातों को साहित्य के हल्क़ों में विशेष स्थान प्राप्त है।
4 जून सन 1988 ईसवी को पूर्वी मॉस्को में एक ट्रेन में धमाके से 91 लोग मारे गये।
4 जून सन 1994 ईसवी को बांग्लादेश सरकार ने दिगभ्रमित लेखिका तसलीमा नसरीन को गिरफ़तार करने का आदेश जारी किया। उसने ईश्वरीय पुस्तक कुरआन मजीद में परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता की बात कही थी।
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15 ख़ुरदाद वर्ष 1342 हिजरी शम्सी को ईरान की जनता ने स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की गिरफ़्तारी की सूचना मिलने के बाद शाह की सरकार के विरुद्ध व्यापक प्रदर्शन किए। शाही सरकार के पिट्ठुओं ने क़ुम नगर के मदरसये फ़ैज़िया में शाह के विरुद्ध भाषण देने के बाद इमाम ख़ुमैनी को गिरफ़्तार कर लिया जिसके बाद जन प्रदर्शनों का क्रम जारी हो गया। सरकारी अधिकार्रियों ने इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए प्रदर्शनकारियों पर पाश्विक आक्रमण किया जिसमें कई प्रदर्शनकारी शहीद और घायल हुए। ईरान की जनता के 15 ख़ुरदाद के एतिहासक धरना प्रदर्शन वास्तव में विदेशियों की पिट्ठु पहलवी सरकार के विरुद्ध जनक्रांति का आरंभिक बिन्दु बन गया। 15 ख़ुरदाद 1342 के बाद शाह और उसकी सरकार के चेहरे से धोखे की नक़ाब उतर गयी और उसकी इस्लाम और जनविरोधी प्रवृत्ति खुलकर सामने आ गयी। इस के बाद हज़रत इमाम ख़ुमैनी के नेतृत्व में ईरान की जनता ने अपनी क्रांति जारी रखी और 22 बहमन 1357 को इस्लामी क्रांति सफल हो गयी
15 ख़ुरदाद सन 1299 हिजरी शम्सी को ईरान के स्वतंत्रता प्रेमियों ने मिर्ज़ा कूचिक ख़ान जंगली के नेतृत्व में मुहम्मद अली शाह क़ाजार की अत्याचारी सरकार और ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध इतेहादे इस्लामी कमेटी के नेतृत्व में क्रांति आरंभ की। इतेहादे इस्लामी कमेटी, सैयद जमालुद्दीन असदाबादी, सैयद अब्दुर्रहमान कवाकिबी और शैख़ मुहम्मद अब्दोह जैसे सुधारकों और विचारकों के विचारों और दृष्टिकोणों के परिणाम में अस्तित्व में आई और उसका उद्देश्य विभिन्न इस्लामी देशों में राजनैतिक एकता के लिए इस्लामी देशों से विदेशी शक्तियों के प्रभाव और तानाशाही के विरुद्ध संघर्ष करना था। मिर्ज़ा कूचिक ख़ान जंगली भी जिन्हें ईरान की स्थिति पर चिंता थी और ईरान को विदेशियों के हाथों में देख रहे थे, इतेहादे इस्लामी कमेटी के विचारो से सहमत हो गये और सैन्य ढांचा बना कर अत्याचार और साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष करने लेगे। मिर्ज़ा कूचिक ख़ान जंगली का जंगल आंदोलन उस समय के महत्त्वपूर्ण आंदोलनों में समझा जाता था किन्तु नेतृत्व में मतभेद और विदेशी साम्राज्य के षडयंत्रों के कारण यह आंदोलन धीरे धीरे समाप्त हो गया।
15 ख़ुरदाद सन 1284 हिजरी शम्सी को आयतुल्लाह शैख़ अब्दुस्सत्तार इस्लामी का जन्म हुआ। वह बारह वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ इराक़ के पवित्र नगर नजफ गये और वहां उन्होंने लगभग बीस उस्तादों से ज्ञान प्राप्त किया और वरिष्ठ धर्म गुरू बन गये। अपने पिता के स्वर्गवास के बाद वह ईरान के नगर आबादान वापस आ गये और धर्म के प्रचार में व्यस्त हो गये। उन्होंने विभिन्न मस्जिदों का निर्माण कराया और विभिन्न पुस्तकों की रचना की। उनकी पुस्तक अरबाईन हदीस को विशेष महत्त्व प्राप्त है। उनका स्वर्गवास 94 वर्ष की आयु में हुआ।
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12 शव्वाल सन 384 हिजरी क़मरी को इराक़ के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार इबराहीम बिन हेलाल साबी का निधन हुआ। वे बग़दाद नगर में पैदा हुए थे। उन्हें शायरी के अतिरिक्त गणित, खागोल शास्त्र और दूसरे विषयों का भी व्यापक ज्ञान प्राप्त था। उन्होंने विभिन्न विषयों में कई पुस्तकें लिखीं।
12 शौवाल सन 1030 हिजरी क़मरी को इस्लामी जगत के विख्यात धर्मगुरु गणितज्ञ और खगोल शास्त्री शैख बहाई का ईरान के इस्फहान नगर में निधन हुआ। वे वर्ष 952 हिजरी क़मरी में लेबनान के बालबक नगर में एक ईरानी परिवार में जन्मे थे। उनहोंने बड़े ही कम समय में गणित, खगोल शास्त्र और इसी प्रकार इस्लामी विषयों जैसे फिक़ह, हदीस और तफ़सीर में दक्षता प्राप्त कर ली। शैख़ बहाई की दसियों पुस्तकों से आज भी लोग लाभान्वित हो रहे हैं।