शुक्रवार - 5 जून
5 जून वर्ष 1883 ईसवी को विश्व की सबसे प्रसिद्ध ट्रेन ओरिएंट एक्सप्रेस ने अपनी पहली यात्रा आरंभ की।
ओरिएंट एक्सप्रेस विश्व की सबसे लंबी यात्रा आरंभ करने वाली पहली ट्रेन थी जिसका एक सिरा क़ुस्तुनतुनिया और दूसरा सिरा पेरिस था। इन दोनों महाद्वीपों के दौरान यात्रा में बहुत से नगर और देश आते थे जिनमें बुलग़ारिया, रोमानिया, हंग्री, आस्ट्रिया और जर्मनी के नाम शामिल हैं। इस लंबी यात्रा और इससे संबंधित कहानियों के कारण कभी कभी इस ट्रेन को king of trains and train of kings भी कहा जाता था। यह ट्रेन जब पांच जून वर्ष 1883 ईसवी को क़ुस्तुनतुनिया से अपनी पहली यात्रा पर रवाना हुई तो इसके यात्रियों में तुर्क नरेश के कूटनयिक प्रतिनिधि भी शामिल थे। इस ट्रेन में यात्रा करने का मज़ा लेने वालों में कई नरेश भी शामिल थे। अंतिम बार यह ट्रेन 20 मई वर्ष 1977 को फ़्रांस से चली और 22 मई सन 1977 को इस्तांबोल पहुंची।
- 5 जून सन् 1659 में मुग़ल साम्राज्य के शासक औरंगज़ेब आधिकारिक रूप से दिल्ली की गद्दी पर बैठे।
- 5 जून सन् 1661 में महान वैज्ञानिक आइजक न्यूटन ने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में एडमिशन लिया।
- 5 जून सन् 1664 को मुस्तफ़ा द्वितीय तुर्की का सुल्तान बना।
- 5 जून सन् 1752 में बेंजामिन फ्रेंकलिन ने यह दर्शाने के लिए पहली बार पतंग उड़ाई कि बिजली विद्यत का एक स्त्रोत है।
- 5 जून सन् 1827 में ग्रीक की स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान तुर्कों ने एक्रोपोलिस और एथेंस पर कब्ज़ा किया।
- 5 जून सन् 1846 में अमेरिका में फिलाडेल्फिया और बाल्टीमोर के बीच टेलीग्राफ़ लाइन की शुरुआत हुई।
- 5 जून सन् 1875 में अमेरिका के सेन फ्रांसिस्को में पैसिफिक स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत हुई।
- 5 जून सन् 1882 को बॉम्बे (अब मुंबई) में तूफ़ान और बाढ़ से करीब एक लाख लोगों की मौत हुई थी।
- 5 जून सन् 1912 में अमेरिकी नौसेना ने क्यूबा पर तीसरी बार हमला किया।
- 5 जून सन् 1915 को डेनमार्क ने अपने संविधान में संशोधन कर महिलाओं को वोट का अधिकार दिया।
- 5 जून सन् 1924 में अर्नेस्ट एलेक्ज़ेंडरसन ने अटलांटिक महासागर के पार पहला फैक्स भेजा।
- 5 जून सन् 1942 में अमेरिका ने बुल्गारिया, हंगरी तथा रोमानिया के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
- 5 जून सन् 1953 को डेनमार्क में नया संविधान अंगीकार किया गया।
- 5 जून सन् 1967 को इस्राईल ने मिस्र पर हमला कर उसके करीब चार सौ लड़ाकू विमान नष्ट कर दिए।
- 5 जून सन् 1972 में विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई।
- 5 जून सन् 1984 को ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत सिखों के धर्म स्थल पंजाब के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना ने प्रवेश किया।
- 5 जून सन् 1990 को सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
5 जून वर्ष 1723 ईसवी को स्काटलैंड के प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री और अर्थशास्त्री एडम स्मिथ, एडंबरा में जन्मे। सन 1740 से 1746 तक आक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की। आक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह स्वदेश लौट गये जहां सन 1748 ईसवी में अंग्रेज़ी साहित्य के लेक्चर्स का क्रम आरंभ किया । लेक्चरों का यह क्रम इतना अधिक प्रसिद्ध हुआ कि सन 1751 में उन्हें ग्लास्गो विश्वविद्यालय में तर्कशास्त्र पढ़ाने की नौकरी मिल गयी। अगले वर्ष उन्होंने नैतिकता के मूल सिद्धांतों का पाठ देना आरंभ कर दिया। एडम स्मिथ ने विभिन्न पुस्तकें लिखीं। उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण पुस्तक का अनुवाद है राष्ट्रों की संपत्ति जो अर्थव्यवस्था के विषय पर विश्व की पहली पुस्तक है और पूंजीवादी व्यवस्था की बाइबिल समझी जाती है।

5 जून वर्ष 1967 ईसवी को ज़ायोनी शासन और अरब देशों के मध्य तीसरा युद्ध आरंभ हुआ। इस दिन ज़ायोनी शासन की नौसेना ने अचानक आक्रमण किया और मिस्र, सीरिया और जार्डन की नौसना पर दो घंटे तक निरंतर बमबारी करके उन्हें लगभग नष्ट कर दिया। इसके बाद इस्राईल की थल सेना ने अमरीका और ब्रिटेन के सहयोग से आधुनिक सैन्य उपकरणों का प्रयोग करते हुए व्यापक आक्रमण किया और तीन दिनों के भीतर तीनों देशों की सेना को पराजित कर दिया और मिस्र के सीना मरुस्थल और स्वेज़ नहर के पूर्वी तट के क्षेत्रों और सीरिया की गोलान की पहाड़ियों पर क़ब्ज़ा कर लिया। पश्चिमी तट को जार्डन से अलग करके और बैतुल मुक़द्दस पर नियंत्रण करने के बाद संघर्ष विराम स्वीकार किया किन्तु फिर अक्तूबर वर्ष 1973 ईसवी में मिस्र और सीरिया ने ज़ायोनी शासन के विरुद्ध अचानक विस्तृत पैमाने पर युद्ध आरंभ कर दिया और मिस्र की सेना ने स्वेज़ नगर पार करके ज़ायोनी सेना को भारी जानी माली हानि पहुंचाई।

5 जून वर्ष 1972 ईसवी को पर्यावरण के संबंध में पहली अंतर्राष्ट्रीय कांफ़्रेस स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में आयोजित हुई। इस कांफ्रेंस में विश्व के 113 देशों के 1300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया कांफ़्रेंस ने “केवल एक ही धरती है” के नारे के साथ अपना कार्य आरंभ किया। इस कांफ़्रेंस का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा के दृष्टिगत आवासी केन्द्रों का निर्माण,पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले पदार्थों की पहचान और उनका निर्धारण और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की रक्षा का कार्यक्रम बनाना शामिल था। इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ़्रेंस का परिणाम एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में निकला जो पर्यावरण की रक्षा, समुद्रों में प्रदूषण उत्पन्न करने वाले पदार्थों को फेकने से रोकने और रासायनिक पदार्थों के प्रयोग और उनके निर्माण पर रोक लगाने वाली संस्था बन कर उभरी। दूसरी ओर यह स्टाकहोम कांफ़्रेंस वास्तव में पर्यावरण की रक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में महत्त्वपूर्ण मोड़ समझी जाती थी। उसके बाद विभिन्न देशों ने पर्यावरण की रक्षा और प्रदूषण को रोकने के लिए लिए विभिन्न कार्यक्रम बनाए।

5 जून वर्ष 1984 को भारतीय सेना ने आप्रेशन ब्लू स्टार करके पंजाब प्रांत के नगर अमृतसर में सिख समुदाय के सबसे बड़े उपासना स्थल स्वर्णमंदिर पर आक्रमण कर दिया। भारतीय सेना के इस आक्रमण में लगभग एक हज़ार सिख छापामार मारे गये। भारतीय सरकार का कहना था कि सिखों ने स्वर्णमंदिर में भारी हथियार और गोले बारूद एकत्रित कर रखे थे जिन्हें वह ख़ालिस्तान आंदोलन में केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध प्रयोग करने का इरादा रखते थे किन्तु भारतीय सेना के आप्रेश्न ब्लूस्टार के कारण उनकी यह योजना सफल न हो सकी और सिखों का भारत से अलग होने का आंदोलन कमज़ोर हो गया ख़ालसा अलगाववादियों ने आप्रेश्न ब्लू स्टार का बदला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या करके लिया जिनके आदेश पर सेना ने स्वर्ण मंदिर पर आक्रमण किया था। पंजाब समस्या की शुरुआत 1970 के दशक से अकाली राजनीति में खींचतान और अकालियों की पंजाब संबंधित माँगों को लेकर शुरु हुई थी. पहले वर्ष 1973 में और फिर 1978 में अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया। मूल प्रस्ताव में सुझाया गया था कि भारत की केंद्र सरकार का केवल रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा पर अधिकार हो जबकि अन्य विषयों पर राज्यों को पूर्ण अधिकार हों. अकाली ये भी चाहते थे कि भारत के उत्तरी क्षेत्र में उन्हें स्वायत्तता मिले। अकालियों की पंजाब संबंधित माँगें ज़ोर पकड़ने लगीं।अकाली कार्यकर्ताओं और निरंकारियों के बीच अमृतसर में 13 अप्रैल 1978 को हिंसक झड़प हुई. इसमें 13 अकाली कार्यकर्ता मारे गए और रोष दिवस में सिख धर्म प्रचार की संस्था के प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरांवाले ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अनेक पर्यवेक्षक इस घटना को पंजाब में चरमपंथ की शुरुआत के तौर पर देखते है। कहा यह जाता है कि सिख समुदाय में अकाली दल के जनाधार को घटाने के लिए काँग्रेस ने सिख प्रचारक जरनैल सिंह भिंडरांवाले को परोक्ष रूप से प्रोत्साहन दिया। उद्देश्य ये था कि अकालियों के सामने सिखों की माँगें उठाने वाले ऐसे किसी संगठन या व्यक्ति को खड़ा किया जाए जो अकालियों को मिलने वाले समर्थन में सेंध लगा सके. लेकिन इस दावे को लेकर ख़ासा विवाद है।
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16 ख़ुर्दाद सन 1368 हिजरी शम्सी को ईरान की इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के पवित्र शव उनके दसियों लाख चाहने वालों की छलकती आंखों के बीच तेहरान में दफ़नाया गया। इस अवसर पर लगभग एक करोड़ लोग ईरान के विभिन्न क्षेत्रों और दूसरे देशों से एकत्रित हुए थे। इस अद्वितीय संस्कार की सबसे बड़ी विशेषता इसका जनता के हाथों होना था। इमाम ख़ुमैनी के मज़ार को, थोपे गये युद्द के दौरान शहीद होने वाले ईरानी जियालों की क़ब्रों के निकट बनाया गया है।
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13 शव्वाल सन 1323 हिजरी क़मरी को इस्लामी जगत के प्रसिद्ध बुद्धिजीवी और धर्मगुरु शैख़ मोहम्मद ताहा का 83 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उनका जन्म इराक़ के नजफ़ नगर में हुआ। उन्होंने तत्कालीन वरिष्ठ धर्मगुरुओं जैसे शैख़ मुर्तज़ा अन्सारी आदि से शिक्षा ली। उन्होंने इस्लामी विषयों में कई पुस्तकें भी लिखीं हैं।