शुक्रवार - 6 जून
6 जून सन 1596 में सिख समूदाय के छठें गुरु, गुरु हरगोविंद की का जन्म हुआ।
6 जून सन 1903 में हीरालाल सेन ने पहली भारतीय प्रचार फिल्म शूट की।
6 जून सन 1909 में फ्रांस की सेना ने वर्तमान में चाड कहे जाने वाले देश पर क़ब्ज़ा कर लिया और एक कठपुतली राजा को सिंहासन पर बिठा दिया।
6 जून सन 1946 में बॉस्केट बॉल एसोसिएशन आफ अमेरिका की न्यूयॉर्क में स्थापना हुई।
6 जून सन 1996 को पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने भारत के साथ व्यापार संबंध के आरंभ को हरी झंडी दिखाई।
6 जून सन 1755 ईसवी को फ्रांसीसी लेखक लुई सेन साइमन का 80 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
सन 1691 से 1723 ईसवी के बीच अस्तित्व में आने वाली उनकी रचनाएं उस समय फ्रांस और योरोप की राजनैतिक और सामाजिक घटनाओं का वर्णन करती हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में दरबारियों के जीवन और उनके क्रियाकलापों को बयान किया है।
6 जून सन 1799 ईसवी को रुस के विख्यात कवि व लेखक एलेग्ज़ेन्डर पोशकीन का मॉस्को में जन्म हुआ। उन्होंने सन 1820 ईसवी में अपना एक संकलन प्रकाशित करके भारी ख्याति प्राप्त की । इसके कुछ समय बाद उन्होंने स्वतंत्रता के बारे में एक कविता लिखी जो उन्हें देशनिकाला दिए जाने का कारण बनी। उनहोने अपनी इस कविता में स्वतंत्रता का ज़ोरदर समर्थन किया। उनके द्वारा लिखे गये ड्रामे, शेर, और दोहे सब कुछ रुसी साहित्य का मूल्यवान भाग समझे जाते हैं। इस महान लेखक का मात्र 38 वर्ष की आयु में निधन हुआ।

6 जून सन 1809 ईसवी को स्वीडन पहली बार संविधान वाला देश बना। इसीलिए आज के दिन को स्वीडेन मे राष्ट्रीय पर्व के रुप में मनाया जाता हैं। उल्लेखनीय है कि शताब्दियों से यह देश योरोप की बड़ी शक्तियों में गिना जाता था। 19वीं शताब्दी के आरंभ में स्वीडन, नेपोलियन के विरुद्ध अस्तित्व में आने वाले गठबंधन में शामिल हो गया। किंतु इस गठबंधन की पराजय के बाद फ्रांस की सेना ने स्वीडन के पश्चिमी भागों को अपने नियंत्रण में कर लिया। इसी प्रकार रुसियों ने सन 1808 ईसवी में फ़िनलैंड को अपने देश में मिला लिया जो उस समय स्वीडेन का भाग था। यह घटनाएं स्वीडन के नरेश के त्यागपत्र देने और चार्ल 13वें के सत्ता में पहुंचने का कारण बनीं। जिसके बाद इस देश में सविंधान की रचना हुई। इस संविधान के आधार पर स्वीडन नरेश के अधिकार बहुत सीमित कर दिए गए।
6 जून वर्ष 1982 को ज़ायोनी शासन की सेना ने एक बार फिर लेबनान पर आक्रमण किया। ज़ायोनी शासन की सेना इस आक्रमण में लेबनान की राजधानी बैरूत तक पहुंच गयी। ज़ायोनी सेना ने इस अतिक्रमणकारी आक्रमण में बहुत से लोगों को मार डाला और लेबनान के आर्थिक प्रतिष्ठानों को नष्ट कर दिया। फिर इसी वर्ष सितम्बर में बैरूत के निकट सबरा और शतीला के कैंपो पर पाश्विक आक्रमण किया और लोगों का जनसंहार किया किन्तु लेबनान की प्रतिरोधी जनता ने ज़ायोनी सैनिकों का डटकर मुक़ाबला किया और ज़ायोनी सेना को कई बार भारी हानि पहुंचाई और अंततः वर्ष 2000 में अतिग्रहणकारी ज़ायोनी दक्षिणी लेबनान से पराजित होकर निकलने पर विवश हुए।
