रविवार - 7 जून
7 जून वर्ष 1631 ईसवी को मुग़ल सम्राट शाहजहां की रानी मुमताज़ महल का निधन हुआ जिसकी याद में शाहजहां ने विश्व की सबसे सुन्दर इमारत ताज महल का निर्माण कराया।
मुमताज़ महल मुग़ल सम्राट जहांगीर के महामंत्री आसिफ़ ख़ान की पुत्री और महारानी नूरजहां की भतीजी थी। उनका असली नाम अरजुमंद बानो था। वह बचपन से ही बहुत चतुर थीं। सन 1611 ईसवी में उनकी बुआ नूर जहां का विवाह जहांगीर से हुआ तो उनके पिता दरबार से निकट हुए और 10 मई सन 1612 ईसवी को जहांगीर के पुत्र शहज़ाद ख़ुर्रम से उनका विवाह हुआ। बाद में शहज़ादा ख़ुर्रम शाहजहां के नाम से सिंहासन पर बैठा तो अपनी महारानी अरजुमंद बानो को मुमताज़ महल की उपाधि दी। मुमताज़ महल के देहान्त के बाद शाहजहां ने दूसरा विवाह नहीं किया बल्कि अपना सारा ध्यान उनकी याद में एक भव्य इमारत के निर्माण पर लगाया कि जो आज पूरे विश्व में ताज महल के नाम से प्रसिद्ध है।
- 7 जून सन् 1413 में नेपल्स के राजा लैडिसलाव ने रोम पर कब्ज़ा किया।
- 7 जून सन् 1539 में बक्सर के पास चौसा की लड़ाई में अफ़गान शेरशाह सूरी ने मुग़ल बादशाह हुमायूं को हराया।
- 7 जून सन् 1546 में इंग्लैंड ने स्कॉटलैंड/आयरलैंड के साथ आंद्रेस शांति समझौता किया।
- 7 जून सन् 1557 में इंग्लैंड ने फ्रांस के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
- 7 जून सन् 1780 को एंटी-कैथोलिक दंगा लंदन में शुरू हुआ जिसमें क़रीब 100 लोगों की मौत हुई।
- 7 जून सन् 1863 में फ्रांसीसी सेना ने मेक्सिको शहर पर कब्ज़ा किया।
- 7 जून सन् 1893 में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ़्रीक़ा में प्रथम बार सविनय अवज्ञा का प्रयोग किया।
- 7 जून सन् 1929 में वेटिकन सिटी एक संप्रभु देश बना।
- 7 जून सन् 1975 में पहले क्रिकेट विश्व कप का पहला मैच भारत-इंग्लैंड के बीच लंदन के लॉडर्स स्टेडियम में खेला गया।
- 7 जून सन् 1995 में नार्मन थैगार्ड अंतरिक्ष की कक्षा में सबसे लम्बे समय तक रहने वाले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बने।
7 जून सन 1848 ईसवी को फ़्रांसीसी चित्रकार पॉल गॉगोइन का पेरिस में जन्म हुआ। चित्रकला के एक गुरु से विवाह के बाद गॉगोइन को इस कला से लगाव पैदा हुआ और फिर उन्होंने इस क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया। गॉगोइन ने अपनी चित्रकला कौशल दिखाने के लिए प्रशांत महासागर के ताहीटी द्वीप की यात्रा की और सन 1903 में अपनी मृत्य तक उन्होंने अपना समय इसी द्वीप में बिताया।
उनहोंने प्राकृतिक दृश्यों और स्थानीय लोगों के बड़े जीवंत चित्र बनाए हैं।

7 जून सन 1879 ईसवी को प्रॉस चिली और बोलीविया देशों के बीच 5 वर्षीय युद्ध आरंभ हुआ। इतिहास में यह युद्ध ताकनावारीका युद्ध के नाम से जाना जाता है। बोलीविया की सरकार ने चिली की एक कम्पनी से किए गये अपने समझौते को तोड़ दिया। जिसके बाद चिली ने बोलीविया पर आक्रमण कर दिया। इस युद्ध में चिली को विजय हुई और उसने बोलीविया तथा प्रॉस के साथ एक समझौते पर हस्तक्षर किए जिसके आधार पर बोलीविया का सारा तटवर्ती क्षेत्र और प्रॉस का एक भाग चिली के अधिकार में चला गया।

7 जून सन 1980 ईसवी को अमरीकी लेखक हेनरी मिलर का निधन हुआ। वे सन 1891 में जन्में थे। आरंभ में उन्हें लेखन के क्षेत्र में अधिक सफलता नहीं मिली किंतु पेरिस में 9 वर्ष तक ठहरने और पूर्वी एशिया के कुछ देशों की यात्रा करने के बाद मिलर धीरे धीरे लेखन में निपुण होते गये। उनकी रचनाओं में हृदय की तत्वर्दिशता, और काली बहार का नाम लिया जा सकता है।

7 जून सन 1980 ईसवी को ज़ायोनी शासन के युद्धक विमानों ने अतिक्रमण करते हुए इराक़ की राजधानी बग़दाद के निकट इराक़ के तमूज़ परमाणु प्रतिष्ठान पर बम्बारी करके उसे नष्ट कर दिया। इराक़ द्वारा ईरान पर किये गये अतिक्रमण का लाभ उठाकर ज़ायोनी शासन ने यह निन्दनीय हमला किया। हालॉकि ज़ायोनी शासन के इस हमले पर विश्व जनमत ने आपत्ति जताई और सुरक्षा परिषद में इसकी आलोचना की गयी किंतु तेलअविव सरकार के विरूद्ध कोई व्यवहारिक कार्रवाई नहीं की गयी। इराक़ के तमूज़ परमाणु प्रतिष्ठान पर जायोनी शासान ने ऐसी स्थिति में आक्रमण किया जब यह अवैध शासन अधिक से अधिक परमाणु हथियार बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस समय ज़ायोनी शासन के पास 2 सौ से अधिक परमाणु वॉरहेड्स हैं और क्षेत्र में परमाणु हथियारों के भंडार का स्वामी यह एकमात्र शासन है। ज़ायोनी शासन ने अब तक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी को, जो संयुक्त राष्ट्र से संबंधित एक संस्था है इस बात की अनुमति नहीं दी है कि उसके परमाणु प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करे।

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18 खुर्दाद सन 1274 हिजरी शम्सी को ईरान के विख्यात लेखक और कुशल अनुवादक सईद नफीसी का तेहरान में जन्म हुआ। उनके पिता का नाम अली अकबर नफीसी था जो बड़े बुद्धिजीवी समझे जाते थे। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा के बाद क़ानून और राजनीति के विषय की शिक्षा पूरी की। उन्होंने तेराहन विश्व विद्यालय में इतिहास और साहित्य की शिक्षा दी। वह यूरोप के कई देशों के सांस्कृतिक केंद्रों के सदस्य भी थे। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं जिनमें तारीखे इजतेमाइए ईरान, अहवाले रुदकी आदि की ओर संकेत किया जा सकता है। सन 1345 हिजरी शम्सी में उनका निधन हुआ।
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15 शव्वाल सन 252 हिजरी क़मरी को हज़रत अब्दुल अज़ीम हसनी शहीद हुए। वे पैग़म्बरे इसलाम के नवासे इमाम हसन के वंश से थे। वे एक महान मार्गदर्शक थे। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन अब्बासी शासक मोअतज़्ज़ के अत्याचार से तंग आ कर हज़रत अब्दुल अज़ीम तेहरान के दक्षिण में स्थित रै नगर पलायन कर गये और लौगों का मार्गदर्शन करना आरंभ किया। रै शहर में उनका मज़ार आज भी मुसलमान श्रद्दालुओं से भरा रहता है।