Jun १०, २०१६ ०६:०३ Asia/Kolkata

10 जून सन 110 ईसवी को ईरान और रोम के बीच 50 वर्षों की शांति के बाद रोम के नरेश ट्रोजान के आदेश पर इस देश की सेना ने पश्चिमोत्तरी ईरान के आरमीनियाई भाग पर जो अब अलग देश है आक्रमण किया।

ईरानी सेना ने दो वर्षों तक प्रतिरोघ किया किंतु बाद में वो अरमीनिया से पीछे हटने पर विवश हो गयी किंतु अशकानी शासक ख़ुसरो ने अरमीनिया में ईरान के समर्थकों को उकसा कर अरमीनिया को रोम की सेना के नियंत्रण से छुड़ाने की भूमिका प्रशस्त की अंतत: यह क्षेत्र स्वतंत्र होकर पुन: ईरान का भाग बन गया।

  • 10 जून सन् 1190 में तीसरे धर्मयुद्ध के दौरान रोम के सम्राट फ़ेडरिक बार्बेरोज़ा की मौत हो गई थी।
  • 10 जून सन् 1246 में नसीरुद्दीन मुहम्मद शाह प्रथम दिल्ली का शासक बना।
  • 10 जून सन् 1624 में हालैंड और फ्रांस के बीच स्पेन विरोधी संधि पर हस्ताक्षर किये गये।
  • 10 जून सन् 1786 को चीन के सिजुआन प्रांत में भूकंप के कारण दादू नदी पर बना बाँध टूट गया जिसमें एक लाख लोग मारे गए थे।
  • 10 जून सन् 1829 में ब्रिटेन की ऑक्सफ़ोर्ड और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के बीच पहली बोट रेस हुई थी।
  • 10 जून सन् 1848 में न्यूयॉर्क और शिकागो के बीच पहला टेलीग्राफ़ लिंग शुरू हुआ।
  • 10 जून सन् 1907 में फ्रांस और जापान के बीच चीन की स्वतंत्रता और अखंडता को बरकरार रखने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये गये।
  • 10 जून सन् 1931 को नार्वे ने पूर्वी ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा किया।
  • 10 जून सन् 1940 में नार्वे ने नाजी के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
  • 10 जून सन् 1940 में कनाडा ने इटली के ख़िलाफ़ लड़ाई की घोषणा की।
  • 10 जून सन् 1946 में राजशाही खत्म होने के बाद इटली गणतांत्रिक राष्ट्र बना।
  • 10 जून सन् 1960 को नासिक में रूसी युद्धक विमान मिग का उत्पादन शुरु हुआ।
  • 10 जून सन् 1994 में चीन ने लोकनोर इलाक़े में गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किया।
  • 10 जून सन् 1995 को यूरोप के विक्सलेट इलाक़े में दुनिया की सबसे वज़नी 5,100 किलोग्राम की घड़ी स्थापित की गई।
  • 10 जून सन् 1996 को बग़दाद में जैविक हथियारों का एक कारखाना नष्ट किया गया।
  • 10 जून सन् 2002 में पाकिस्तान ने विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी “K-2” का नाम बदलकर ‘चोगोरी’ अथवा ‘शाहगोरी’ कर दिया।
  • 10 जून सन् 2003 में नासा का मंगलयान रोवर लॉन्च किया गया।

10 जून वर्ष 940 ईसवी को प्रसिद्ध  गणितज्ञ व खगोल शास्त्री अबुल वफ़ा बूज़जानी का जन्म हुआ। उनका असली नाम मुहम्मद बिन यहया बिन इस्माईल बिन अब्बास था। बूज़जानी  वर्ष 959 ईसवी में इराक़ चले गये और वहीं अपने देहान्त तक रहे। उनका देहान्त वर्ष 998 ईसवी में हुआ था। बूज़जानी ने गणित और खगोल शास्त्र पर विभिन्न पुस्तकें लिखी हैं। अरबी और यूनानी पुस्तकों के अनुवादकों और व्याख्याकर्ताओं में उन्हें विशेष महत्तव प्राप्त था। गणित में उनकी प्रसिद्ध पुस्तक अलकामिल है जो त्रिकोणमीति  के पिषय पर एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। बूज़जानी ने खगोल शास्त्र के साथ चंद्रमा के परिवर्तनों की भी खोज की और बतलीमयूस के चंद्रमा के सिद्धांत को भी सही किया। उनकी दूसरी पुस्तक ओम्माल मिन इल्मिल हिसाब और उनकी तीसरी पुस्तक अलहेन्देसा है जो अरबी और फ़ारसी भाषा में है।

 

10 जून वर्ष 1610 ईसवी को इटली के प्रसिद्ध गणितज्ञ और प्रकृति विशेषज्ञ गैलीलियो शनि ग्रह के दूसरे घेरे की खोज करने में सफल हुए। वे अपने इस काम में आरंभिक और कम क्षमता वाले टेलीस्कोप को प्रयोग करने के कारण इस घेरे की सही प्रवृत्ति का पता लगाने में सफल न हो सके जिसके कारण उन्होंने उसे एक अतिरिक्त वस्तु समझा जो शनिग्रह के साथ एक संयुक्त कक्षा में परिक्रमा करती है किन्तु बाद के विद्वानों ने इस कक्षा पर अधिक शोध किए और इसे शनिग्रह के दूसरे घेरे का नाम दिया।

 

10 जून सन  1790 ईसवी को ब्रिटेन के सैनिको ने मलेशिया पर आक्रमण किया। उस समय इस देश पर हॉलैंड का अधिकार था और वह इसके स्रोतों को लूट रहा था। किंतु मलेशिया में ब्रिटिश सैनिकों के आगमन के बाद हॉलैंड को इस देश से पीछे हटना पड़ा। वर्ष 1824 ईसवी में हॉलैंड इस पर राज़ी हुआ कि वह मलेशिया में अपनी विशिष्टताओं को हाथ से जाने देगा किंतु इस शर्त के साथ कि ब्रिटेन की सेना मलेशिया से बाहर निकल जाए। इस साम्राज्यवादी सौदे के परिणाम स्वरूप ब्रिटेन और हॉलैंड ने एक दूसरे की ओर से निश्चिंत होकर मलेशिया के स्रोतों को लूटना आरंभ कर दिया। मलेशिया को 1957 में स्वतंत्रता मिली।

 

10 जून वर्ष 1947 ईसवी को मुस्लिम लीग कौन्सिल ने भारत के विभाजन की योजना को स्वीकार लिया। इस योजना की घोषणा लार्ड माउंट बेटेन ने 3 जून वर्ष 1947 को कीया थी जिसकी पुष्टि जवाहर लाल नेहरू सहित कुछ नेताओं ने भाषण द्वारा की थी किन्तु पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जेनाह ने अपने भाषण में कहा था कि इस योजना को मुस्लिम लीग कौन्सिल की बैठक में पास किया जाएगा। इसीलिए 9 और 10 जून को दिल्ली में मुस्लिम लीग कौन्सिल की बैठक हुई और मुस्लिम लीग कौन्सिल ने मुहम्मद अली जेनाह को भारत के विभाजन की योजना को स्वीकार करने का अधिकार दे दिया जिसके आधार पर उन्होंने योजना को पास कर दिया।

10 जून सन 2000 ईसवी को सीरिया के राष्ट्रपति हाफ़िज़ असद एक लम्बी बीमारी के बाद चल बसे। वे सन 1930 ईसवी में जन्मे थे। उन्होंने सन 1964 में वायु सेना प्रमुख का पद संभाला और तीन वर्ष सीरिया के रक्षा मंत्री बने रहे। 1970 में एक विद्रोह करके उन्होंने देश का नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया और फिर बास पार्टी के प्रमुख बने। इसके एक वर्ष बाद देश में जनमत संग्रह द्वारा वे राष्ट्रपति चुने गये और फिर अपनी आयु के अंतिम दिन तक वे सीरिया के राष्ट्रपति रहे।

1967 ईसवी में ज़ायोनी शासन और अरब देशों के युद्ध के दौरान हाफ़िज़ असद सीरिया के रक्षा मंत्री थे इस युद्ध में जायोनी शासन ने सीरिया के गोलान पहाड़ी क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया था। हाफ़िज़ असद ने सीरिया की सेना को मज़बूत किया और सन 1973 में सीरिया की सेना ने इस क्षेत्र के कुछ भागों को ज़ायोनी शासन से वापस ले लिया। हाफ़िज़ असद ने ज़ायोनी शासन से सांठ गांठ कभी भी स्वीकार नहीं की और अतिग्रहणकारी शासन के विरोधियों जैसे ईरान और दूसरे देशों से अपने संबंधों को प्रगाढ़ किया।

 

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21 ख़ुर्दाद वर्ष 1353 हिजरी शम्सी को ईरान में नेत्रहीनों की मदद के लिए गठित संस्था के संस्थापक डा मोहम्मद ख़ज़ाएली का निधन हुआ।

बचपन में चेचक से उनकी आंखों की रौशनी चली गयी थी। उन्होंने नेत्रहीनों के स्कूल में शिक्षा हासिल की। वह बहुत मज़बूत स्मरण शक्ति के स्वामी थे इसलिए उन्होंने बहुत तेज़ी से शिक्षा में प्रगति की यहां तक कि तेहरान यूनिवर्सिटी से क़ानून के विषय में डॉक्ट्रेट की डिग्री हासिल की। डॉक्टर ख़ज़ाएली अरबी, फ़्रांसीसी और अंग्रेज़ी भाषाओं में भी माहिर थे। उन्होंने कई किताबें लिखीं हैं। इसी प्रकार उन्होंने अनेक किताबों का अनुवाद भी किया है। उन्होंने जिन किताबों का अनुवाद किया है उनका हिन्दी रूपान्तर है ‘क़ुरआनी ज्ञानों में शोध’, ‘सअदी की बूस्तान व गुलिस्तान की व्याख्या’ और ‘साहित्य की शैली’। डॉक्टर ख़ज़ाएली दुनिया भर में नेत्रहीनों के कल्याण लिए भी काम करते रहे। वह अंतर्राष्ट्रीय नेत्रहीन संघ के सदस्य भी थे।

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18 शव्वाल सन 598 हिजरी क़मरी को इस्लामी जगत के विख्यात धर्मगुरु मोहम्मद बिन इदरीस हिल्ली का निधन हुआ। वे सन 543 हिजरी क़मरी में इराक़ के हिल्ला नगर में पैदा हुए। उन्होंने बचपन से ही धार्मिक शिक्षा ग्रहण करना आरंभ किया।और युवावस्था तक पहुंचते वे एक महान धर्मगुरु बन गये। उनका मानना था कि सही मार्ग का पता लगाने के लिए सोच विचार एवं चिंतन करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। और जो भी सोच विचार की शक्ति का प्रयोग नहीं करता वो मानो ईश्वर की विभूतियों का अनादर करता है। इसी कारण उनके समकालिक एवं उनके बाद के धर्मगुरुओं ने इब्ने इदरीस की वैचारिक शक्ति और साहस एवं आम लोगों में वैचारिक क्रान्ति उत्पन्न करने के लिए प्रशंसा की है। इब्ने इदरीस ने कई मुल्यवान पुस्तकें लिखीं है।

 

18 शव्वाल सन 1254 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध मुस्लिम धर्मगुरु मिर्ज़ा हुसैन नूरी का उत्तरी ईरान के नूर नगर में जन्म हुआ। उन्होंने धार्मिक शिक्षा कठिन परीश्रम करके ग्रहण की। और कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं।