Jun ११, २०१६ ०६:४५ Asia/Kolkata

11 जून वर्ष 1776 ईसवी को प्रसिद्ध चित्रकार जान कान्स्टेबल का जन्म हुआ।

वह ब्रिटेन के क्षेत्र सफ़क में जन्मे थे और 19 वर्ष की आयु में लंदन चले गये। 1799 ईसवी में उन्होंने रॉयल एकेडमी में प्रवेश लिया। थोड़े ही समय में एकेडमी की प्रदर्शनियों में उनके चित्र पेश किए जाने लगे। सन 1816 ईसवी तक जान कान्स्टेबल ने बड़ा कठिनाई भरा जीवन व्यतीत किया। 1816 ईसवी में विवाह के बाद उन्होंने गांव के दृश्यों को अपनी चित्रकारिता का विषय बनाया और जल्द ही उनकी गिनती अच्छे चित्रकारों में होने लगी। उनके कुछ चित्रों को स्वर्ण पदक भी दिया गया। फ़्रांस में कान्सटबल का काम इतना पसंद किया गया कि वहां एक पूरा विचार पंथ अस्तित्व में आ गया। उनका निधन 31 मार्च वर्ष 1837 ईसवी को हुआ। 

  • 11 जून सन् 1770 में कैप्टन जेम्स कूक ने ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट बैरियर रीफ की खोज की।
  • 11 जून सन् 1776 में अमेरिका की स्वतंत्रता का घोषणा पत्र तैयार करने के लिए समिति बनाई गई।
  • 11 जून सन् 1866 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना हुई। इसे पहले आगरा उच्च न्यायालय के नाम से जाना जाता था।
  • 11 जून सन् 1901 में न्यूज़ीलैंड ने क्रुक द्वीप पर कब्ज़ा किया।
  • 11 जून सन् 1921 में ब्राज़ील में महिलाओं को चुनाव में मत देने का अधिकार प्रदान किया गया।
  • 11 जून सन् 1935 में एडविन आर्मस्ट्रांग ने पहली बार एफ़एम का प्रसारण किया।
  • 11 जून सन् 1955 में पहले मैग्निशियम जैट हवाई जहाज़ ने उड़ान भरी।
  • 11 जून सन् 1964 में प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की इच्छानुसार उनकी अस्थियों की भस्म पूरे देश में बिखेरी गई।
  • 11 जून सन् 1987 को पहली बार अश्वेत समुदाय के एबट, पॉल बोटेग और बर्नी को ब्रिटेन में संसद सदस्य चुना गया।

11 जून सन 1855 ईसवी को सूर्य के प्रकाश का वैज्ञानिक पद्धतियों से विश्लेषण किया गया और उसके रंगों को निर्धारित किया गया। यह काम विज्ञान के इतिहास में पहली बार जर्मनी के दो वैज्ञानिकों किर्शचोफ़ और बेन्सन ने किया। उल्लेखनीय है कि बादल होने की स्थिति में सूर्य की चमक और इंद्र धनुष का बन जाना तथा उसके कई रंग हमेशा से मनुष्य के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। अनुसंधान के अनुसार इंद्र धनुष बादलों में मौजूद जल की बूंदों के माध्यम से सूर्य के प्रकाश के विभाजन से अस्तित्व में आता है। इंद्र धनुष के बारे में विख्यात यूनानी दार्शनिक अरस्तू का विचार बहुत प्राचीन है जिसका बाद में पता चला। अबु अली सीना इब्ने हैसम और क़ुत्बुददीन शीराज़ी जैसे विद्वानों ने इस विचार का उल्लेख किया और इसे स्वीकार्य रूप में परिवर्तित किया। अंतत: जर्मनी के उक्त दोनों वैज्ञानिकों ने सूर्य के प्रकाश का विश्लेषण करने में सफलता प्रप्त की।

11 जून सन 1975 ईसवी को उत्तरी ब्रिटेन के समुद्री तेल क्षेत्र से पम्प द्वारा तेल निकालने का काम आरंभ हुआ। महारानी एलिज़ाबेथ ने नवम्बर के महीने में सरकारी तौर पर पहली पाइपलाइन का उदघाटन किया।

11 जून सन 2001 ईसवी को टिमोथी मैकवे नामक व्यक्ति को ओकलाहोमा सिटी में अमरीका की सरकारी इमारत के बाहर बम धमाका करने के अपराध में मृत्युदंड दिया गया। इस धमाके में 168 लोग मारे गये थे।

 

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22 ख़ुरदाद वर्ष 1374 हिजरी शम्सी को ईरान के महान धर्मगुरू आयतुल्लाह मिर्ज़ा काज़िम दिनवरी का देहान्त हुआ । वह तबरेज़ के एक धार्मिक घराने में पैदा हुए। आरंभिक शिक्षा के बाद वे इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ चले गये और आयतुल्लाह सैयद अबुल हसन इस्फ़हानी, आयतुल्लाह ज़ियाउद्दीन इराक़ी, आयतुल्लाह नाईनी और आयतुल्लाह मुहम्मद हुसैन ग़रवी इस्फ़हानी जैसे महान धर्मगुरूओं से शिक्षा प्राप्त की। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे स्वदेश लौट आए और शिक्षा और प्रशिक्षण में व्यस्त हो गये। 93 वर्ष की आयु में उनका स्वर्गवास हुआ और उन्हें तबरेज़ में दफ़्न किया गया।

 

22 ख़ुरदाद वर्ष 1369 हिजरी शम्सी को आयतुल्लाह शैख़ अली मिश्कात इस्फ़हानी का स्वर्रगवास हुआ। वह इस्फ़हान के एक गांव ख़ूज़ान में जन्मे। वे इस्फ़हान में आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद पवित्र नगर क़ुम चले गये और वहां के प्रसिद्ध धर्मगुरूओं जैसे आयतुल्लाह हायरी यज़्दी, आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद हुज्जत कूह कुमरई और आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद तक़ी ख़ुन्सारी से ज्ञान प्राप्त किया। उसके बाद वह इराक़ के पवित्र नगर नजफ चले गये और वहां के कई प्रसिद्ध धर्मगुरूओं से ज्ञान प्राप्त करने लगे और स्वयं भी धर्म शास्त्र और उसूले फ़िक़्ह पढ़ाने लगे। उसके बाद आयतुल्लाह अली मिश्कात सेदेही इस्फ़हानी स्वदेश लौट आए और चहार बाग़ व सद्र मदरसे में पढ़ाने लगे। किफ़ायतुल उसूल पर नोट उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में है। उनका स्वर्गवास 89 वर्ष की आयु में हुआ।

 

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19 शव्वाल सन 265 हिजरी क़मरी को ईरान में सफ़्फारियान शासन श्रृंखला के संस्थापक याक़ूब लैस सफ़ारी का निधन हुआ। सफ़्फारी अपने आकर्षक व्यतित्व के कारण बहुत लोकप्रिय थे। इसलिए ईरान के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र सीसतान के लोगों ने उन्हें अपना शासक चुना। सफ़्फ़ारी की शक्ति धीरे धीरे बढ़ती गयी और उन्होंने ईरान के कई दूसरे क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। और 261 हिजरी क़मरी को सफ़्फ़ारी ने एक बड़ी सेना के साथ तत्कालीन अब्बासी शासक की राजधानी बग़दाद का रुख़ किया। किंतु अब्बासी सेना ने उन्हें पराजित कर दिया। इस पराजय के बाद सफ़्फ़ारी दोबारा अपनी सेना को संगठित करने में व्यस्त थे कि बीमार हो गये और इसी बीमारी में उनकी मृत्यु हो गयी।

 

19 शव्वाल सन 434 हिजरी क़मरी को अबू ज़करिया बिन मोहम्मद नामक ईरानी मूल के इतिहासकार का जन्म हुआ। उन्होंने इतिहास का व्यापक अध्ययन किया और इस विषय में कई पुस्तकें लिखीं वे इसी प्रकार एक वरिष्ठ धर्मगुरु भी थे।