Jun ११, २०१६ ०६:०० Asia/Kolkata
  • शनिवार- 13 जून

13 जून वर्ष 1955 ईसवी को भारतीय उपमहाद्वीप के प्रसिद्ध लिपिकार मुन्शी ताजुद्दीन ज़र्री क़लम का निधन हुआ।

1420, जलालुद्दीन फ़िरोजशाह दिल्ली के शासक बने।

1625, ब्रिटेन के राजा हेनरी प्रथम ने फ्रांस की राजकुमारी हिनरीती से विवाह किया।

1757, बंगाल, बिहार और उड़ीसा के नवाब सिराजुद्दौला से युद्ध करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के रॉबर्ट क्लाइव ने मुर्शिदाबाद की तरफ़ कूच किया।

1774, ब्रिटिश अमेरिका के उपनिवेश रोड आयरलैंड ने दास प्रथा पर प्रतिबंध लगाया। वह ऐसा करने वाला पहला उपनिवेश था।

1940, जालियाँवाला बाग़ हत्याकांड के समय पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ डायर की हत्या कर उस हत्याकांड का बदला लेने वाले भारतीय ऊधम सिंह को लंदन में फाँसी दे दी गई।

1960, राजकुमार नरोत्तम सिंह आलोक कंबोडिया के राष्ट्रपति बने।

1997, दिल्ली के उपहार सिनेमाघऱ में आग लगने से 59 लोगों की मृत्यु हो गई तथा 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

 

वह भारतीय उपमहाद्वीप में लिपि की नई कार्यशैली के गुरू माने जाते थे। उस्ताद ताजुद्दीन ज़र्री क़लम सन 1904 ईसवी में जन्मे थे। उन्होंने लिपि की शिक्षा अपने मामा और उस काल के प्रसिद्ध लिपिकार हाजी नूर मुहम्मद से प्राप्त की और शीघ्र ही अपनी शैली आरंभ की। उन्होंने स्पष्ट और अस्पष्ट दोनों ही क्षेत्र में दक्षता प्राप्त की और लिपिकारों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया। उन्होंने वर्ष 1936 ईसवी में मुरक़्क़ा ज़र्री के नाम से लिपिकला की एक पुस्तक लिखी जो बहुत प्रसिद्ध हुई। वर्ष 1936 में उन्होंने लिपिकारों का संघ बनाया और निरंतर 12 वर्षों तक इसके अध्यक्ष रहे। अपनी आयु के अंतिम दिनों में वह लिपिकला की एक और पुस्तक मुरक़्कए ताज लिख रहे थे जो पूरी न हो सकी।

 

13 जून सन 1695 ईसवी को फ़्रांस के लेखक कवि जॉन डोला फोन्टन का निधन हुआ। वे सन 1621 ईसवी में जन्मे थे उन्हें प्राचीन कहानियां पढ़ने में बहुत आनंद आता था। उन्होंने फ़्रांस की लेखक संस्था में भी अपनी जगह बना ली थी जिसके बाद से उन्होंने बड़े ही सराहनीय काम किए। उनकी कई पुस्तकें अब भी सुरिक्षत हैं।

 

13 जून सन 1906 ईसवी को आयरलैंड में लोकतंत्र वादी सेना की राजनैतिक शाखा शेनफिन की स्थापना हुई। आयरलैंड ब्रिटेन का उपनिवेश था और यह संस्था आयरलैंड के एक वरिष्ठ पत्रकार आर्थर ग्रिफ़िथ ने इस क्षेत्र को ब्रिटेन से स्वतंत्र कराने के लिए बनाई थी। इस संस्था ने ब्रिटेन और उसके सरकारी कारिंदों के मुकाबले में प्रतिरोध किया और अंतत: सन 1921 में निरंतर संघर्ष के बाद इस संस्था को दक्षिणी आयरलैंड को ब्रिटेन से स्वतंत्र कराने में सफलत मिल गयी किंतु इसके बाद से उत्तरी आयरलैंड के प्रजातंत्रवादियों के सैनिक संघर्ष के साथ ही शेनफिन संस्था उत्तरी और दक्षिणी आयरलैंड के एकीकरण के  लिए राजनैतिक लड़ाई लड़ती रही यहॉ तक कि ब्रिटेन की सरकार और उत्तरी आयरलैंड के ब्रिटेन समर्थक दलों से दो वर्ष की बातचीत के बाद अप्रैल सन 1998 में शेनफिन के नेताओं ने ब्रिटेन के साथ एक  शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। जिसके आधार पर उत्तरी आयरलैंड ब्रिटेन के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र हो गया किंतु इसके बावजूद उत्तरी आयरलैंड का मामला हल नहीं हुआ है।

 

 

13 जून सन 1921 ईसवी को फिलिस्तीन पर ब्रिटेन के अतिक्रमण के आरंभिक वर्ष में ज़ायोनियों के विरुद्ध फिलिस्तीनियों का पहला देश व्यापी आंदोलन आरंभ हुआ। फ़िलिस्तीनी जनता का रक्तरंजित विद्रोह ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा जायोनियों के अवैध समर्थन के विरोध का चिन्ह था। ब्रिटेन ने जायोनियों के समर्थन में यह नीति अपनायी थी कि विश्व के कोने कोने से यहूदी पलायन करके फिलिस्तीन आएं ताकि बेलफ़ोर घोषण पत्र के आधार पर फिलिस्तीन में एक जायोनी शासन की स्थापना हो सके और इस्राईल को अस्तित्व दिया जाए । इस नीति के परिणाम स्वरुप फिलिस्तीन के यहूदियों की संख्या 35 हज़ार से बढ़कर 1923 में 6 लाख हो गयी। और 1948 तक यह संख्या तीन गुना बढ़ गयी।

 

 

13 जून सन 1944 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी ने वी7-1 नामक पहला प्रक्षेपास्त्र ब्रिटेन पर दागा उस समय तक जर्मनी ब्रिटेन पर हवाई आक्रमण कर रहा था। किंतु धरती से धरती पर मार करने वाला यह प्रक्षेपास्त्र जर्मनी के लिए सस्ता और आकमण का सुरक्षित साधन था। वी 7वन विश्व में धरती से धरती पर मार करने वाला पहला प्रक्षेपास्त्र था द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बहुत से देशों ने इसी तकनीक को विकसित करके वर्तमान समय के प्रक्षेपास्त्र बनाने में सफलता प्राप्त की।

 

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21 शव्वाल सन 92 हिजरी क़मरी को वर्तमान स्पेन में स्थित आंदालुसिया क्षेत्र पर तारिक़ बिन ज़्याद के नेतृत्व में मुसलमान सेना का अधिकार हुआ। तारिक़ ने लगभग 12 हज़ार सैनिको के साथ मोरक्को और स्पेन के बीच जलडमरु महय को नौकाओं के माध्यम से पार किया। इस तरह वह स्पेन में घुस गये दाख़िल हुए और सभी नौकाओं को जला देने का आदेश दिया ताकि उनके सैनिक पीछे हटने का विचार भी मन में न ला सकें। इसके परिणाम स्वरुप उनके सैनिकों ने अपने लिए एक मात्र मार्ग समझकर स्पेन की सेना का डटकर मुक़ाबला किया और स्पेन को जीत लिया। 8 शताब्दियों तक इस क्षेत्र में मुसलमान शासकों का राज रहा। किंतु नवीं हिजरी क़मरी के अंतिम वर्षों में स्पेन के कुछ राजधाओं ने मुसलमान शासकों को पराजित किया और इस क्षेत्र पर मुसलमानों का शासन समाप्त हो गया।