रविवार - 14 जून
14 जून सन 1907 ईसवी को महिलाओं के मतदान अधिकार पर रोक लगा दी गई।
14 जून सन 1955 ईसवी को कम्युनिस्ट सरकारों ने वार्सा संधि पर हस्ताक्षर किए।
14 जून 1973 ईसवी को अमरीका ने अंतरिक्ष स्टेशन स्काई लैब वन अंतरिक्ष में रवाना किया।
14 जून सन 1820 ईसवी को मिस्र के सैनिकों ने मोहम्मद अली पाशा के नेतृत्व में सूडान पर आक्रमण किया और इस देश के उत्तरी भाग पर अधिकार कर लिया। इसके साथ ही ब्रिटेन की सेना ने सूडान के दक्षिणी भाग पर आक्रमण करके उसे अपने अधिकार में ले लिया किंतु सूडान की जनता ने मेहदी सूडानी के नेतृत्व में सन 1881 से मिस्र और ब्रिटेन के अतिग्रहण के विरुद्ध संघर्ष आरंभ किया । सन 1885 में अतिग्रहणकारियों को भारी पराजय का सामना करना पड़ा और सूडानियों ने अतिग्रहित भूमि का बड़ा भाग स्वतंत्र करा लिया। किंतु सन 1898 में मेहदी सूडानी को मिस्र और ब्रिटेन की संयुक्त सेना से पराजय हुई। इसके एक वर्ष बाद ब्रिटेन तथा मिस्र के बीच होने वाले समझौते के आधार पर सूडान का संचालन दोनो देशों ने संयुक्त रूप से संभाल लिया। सन 1956 में सूडान को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता मिली।
14 जून सन 1830 को फ्रांसीसी सेना अफ्रीका महाद्वीप के अलजीरिया देश के तट पर उतरी। यह क़दम अलजीरिया पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए फ्रांस की सैनिक कार्रवाई का आरंभ था। इस अतिग्रहण के बाद अलजीरिया की जनता ने कड़ा प्रतिरोध किया और हथियार भी उठा लिये। किंतु इसके बावजूद सन 1910 में अलजीरिया, फ़्रांस का उपनिवेश बन गया द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अलजीरिया की जनता का फ़्रांस के अतिग्रहण के विरुद्ध संघर्ष चरम सीमा पर पहुंच गया और सन 1962 ईसवी में फ़्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल डीगाल ने इस संघर्ष के दबाव और फ्रांस के भीतर तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विरोध के दृष्टिगत अलजीरिया को स्वतंत्र कर दिया।

14 जून सन 1886 ईसवी को रुस के विख्यात लेखक एलेग्ज़ेन्डर नीकलायोविच इस्ट्रोफ़िस्की का निधन हुआ। वे सन 1823 में एक निर्धन परिवार में जन्मे थे किंतु उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी शिक्षा पूरी की। ड्रामे लिखने में उन्हें विशेष दक्षता प्राप्त थी। उन्होंने कई विख्यात ड्रामे लिखे जिनमें बूरान आदि का नाम लिया जा सकता है।
14 जून सन 1986 ईसवी को लैटिन अमेरिका के विख्यात लेखक ख़ोरख़ा लुईस बोरख़्स का निधन हुआ। वे अर्जेन्टाइना में पैदा हुए थे उन्होंने अपनी जवानी एडगर एलेन पू चार्ल्ज़ डिकेन्ज़ और सर वाल्ट्स जैसे लेखकों की रचनाओं का अध्ययन करने में बिताई। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी गम्भीरता के साथ लेखन आरंभ कर दिया और धीरे-धीरे लैटिन अमरीका के एक विख्यात कटाक्ष लेखक बन गये। वे अपनी नेत्रहीनता के कारण अपनी समस्त रचनाओं को उपन्यास का रुप नहीं दे सके अत: उन्होंने अपने विचारों को शेरों के रूप में प्रस्तुत किया।

***
25 ख़ुरदाद वर्ष 1230 हिजरी शम्सी को प्रसिद्ध विद्वान आयतुल्लाह सैयद मुस्तफ़ा का ईरान के काशान नगर में जन्म हुआ। उनके पिता सैयद हुसैन मुज्तहिद काशान में धार्मिक शिक्षा दिया करते थे। आयतुल्लाह सैयद मुस्तफ़ा ने आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पिता से पढ़ना आरंभ किया और फ़िक्ह, उसूले फ़िक़्ह और तार्किक विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के बाद इस्फ़हान चले गये और वहां पर साहेबे मआलिम के नाम से प्रसिद्ध शैख़ मुहम्मद तक़ी से ज्ञान प्राप्त करने लगे और मुजतहिद बने। आप अभी पच्चीस वर्ष के ही थे कि उसूले फ़िक़्ह, दर्शनशास्त्र, पवित्र क़ुरआन की व्याख्या, गणित में निपुण हो गये। फिर वह तेहरान आ गये जहां से बाद में इराक़ चले गये वहां काज़मैन में रहे और काज़मैन में ही उनका 64 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया और उन्हें वहीं दफ़्न कर दिया गया।
***
22 शव्वाल सन 341 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध कवि अबू इसहाक़ किसाई मरवज़ी का जन्म हुआ। वे पहले तो तत्कालीन राजाओं की प्रशंसा में शेर लिखते थे किंतु बाद में उनके विचारों में भारी परिवर्तन आया और वे ईश्वर और पैग़म्बरे इस्लाम के ध्यान में लीन हो गये। साथ ही वे एक बड़े उपदेशक बन गये। उन्होंने अपनी शयरी के माध्यम से इस महान कार्य को बड़े ही अच्छे ढंग से अंजाम दिया। और कुछ लोगों के मतानुसार उन्होंने नासिर ख़ुसरो जैसे ईरान के विख्यात शायरों के लिए अपनी क्षमता पेश करने के लिए भूमिका प्रशंस्त की। 394 हिजरी क़मरी को उनका निधन हो गया। उनके पद्य संकलन को फ़ार्सी साहित्य में विशेष महत्व प्राप्त है।
22 शव्वाल सन 1151 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध बुद्धिजीवी मोहम्मद हुसैन ख़ातूनाबादी का निधन हुआ। उन्हें साहित्य और धार्मिक विषयों की व्यापक जानकारी थी। उन्होंने कई लाभदायक पुस्तकें लिखीं। अल अलवाहुस समविया, नजमुस साक़िब और शरेह लुमा पर नोट उनकी उल्लेख्नीय किताबें हैं।