Jun १५, २०१६ ०५:१५ Asia/Kolkata
  • सोमवार- 15 जून

15 जून सन 1848 ईसवी को जर्मनी के चान्सलर बिसमार्क ने विख्यात ऐतिहासिक नगर बर्लिन को इस देश की राजधानी के रुप में चुना।

बर्लिन को राजधानी बनाने का क़दम जर्मनी के एकीकरण के बाद उठाया गया। जिसके मुख्य योजनाकार स्वयं बिसमार्क थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बर्लिन जर्मनी की तरह दो भगों पूर्वी भाग और पश्चिम भाग में बंट गया था। किंतु सितम्बर सन 1990 में बर्लिन दीवार गिरा दी गयी जिससे दोनों जर्मनी के एक होने की भूमि समतल हो गयी। इसके कुछ ही समय बाद पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन एक नगर के रुप में जर्मनी की राजधानी बन गया।

 

15 जून सन 1708 ईसवी को स्कॉटलैंड की जनता का, अपने देश को ब्रिटेन के अतिग्रहण से स्वतंत्र कराने के लिए जारी विद्रोह, बड़ी निर्ममता से कुचल दिया गया।

ब्रिटेन सदैव ही इस प्रयास में रहा कि स्कॉटलैंड को अपना भाग बना ले। सन 1603 ईसवी में जिस समय स्कॉटलैंड में पैदा होने वाले जेम्ज़ प्रथम स्कॉटलैंड और ब्रिटेन के नरेश बने उस समय वास्तव में ब्रिटेन का स्वमित्व स्कॉटलैंड पर स्थापित हो चुका था। किंतु स्कॉटलैंड की जनता का निरंतर संघर्ष इस बात का चिन्ह था कि इस देश की जनता ब्रिटिश वर्चस्व से सहमत नहीं है। किंतु इसके बावजूद सन 1707 ईसवी में दोनों देशों की संसदें एक कर दी गयीं। जिसके बाद स्कॉटलैंड के नागरिकों में भारी आक्रोष फैल गया और फिर इस देश की जनता ने पुन: संघर्ष आरंभ कर दिया। जो आज के दिन कुचल दिया गया।किंतु स्कॉटलैंड की जनता का विरोध जारी ही रहा। इस प्रकार से कि अंतत: सन 1999 में लंदन सरकार स्कॉटलैंड में एक स्थानीय संसद स्थापित करने पर विवश हो गयी।15 जून सन 1979 ईसवी को बड़े हथियारों को नियंत्रित करने के उददेश्य से तत्कालीन रुसी और अमरीकी राष्ट्रध्यक्षों ल्यूनिड ब्रिज़नेफ़ और जिमी कार्टर के बीच साल्ट दो नामक समझौता हुआ। यह दोनों देश महाविनाशक परमाणु हथियारों के उत्पादन में लम्बी प्रतिस्पर्धा के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अपने हितों के दृष्टिगत इन शस्त्रों को नियंत्रित किया जाए। इससे पहले भी इसी उद्देश्य से सन 1972 में भी दोनों देशों के बीच साल्ट एक नामक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। किंतु दोनों देशों ने उन मार्गों से जिनका उक्त समझौते में उल्लेख नहीं किया गया था परमाणु हथियारों के उत्पादन और भंडारण का क्रम जारी रखा। इसी कारण दोनो देश इन हथियारों पर और अधिक नियंत्रण पाने के लिए सन 1979 में साल्ट 2 नामक समझौता करने पर विवश हुए। किंतु इस सबके बाद भी दोनों देशों में से किसी ने भी परमाणु हथियारों पर नियंत्रण पाने के लिए उक्त समझौते का तनिक भी पालन नहीं किया।

 

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26 ख़ुर्दाद सन 1344 हिजरी शम्सी को ईरान में मोतलफ़ए इस्लामी दल के चार सदस्य मोहम्मद बोख़ाराई सादिक़ अमानी सफ्फार हरंदी और मुर्तज़ा नेक नेज़ाद अत्याचारी शासक शाह के आदेश पर मार दिए गये। यह चारों ईरानी राष्ट्र के वीर सुपुत्र थे जिन्होने इस्लामी शिक्षाओं और मान्यताओं तथा ईरान की संप्रभुता की रक्षा के लिए अपनी जानें न्योछावर कर दीं। जब शाह ने 15 खुर्दाद सन 1342 हिजरी शम्सी को भारी संख्या में ईरानी नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया तो साहसी युवाओं के एक गुट ने हैएते मोतलफ़ए इस्लामी नामक एक संस्था की स्थापना का प्रयास आरंभ कर दिया। यह क़दम उठाए जाने का उद्देश्य शाह के विरुद्ध राजनैतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को संगठित करना तथा ईरानी स्वतंत्रता और स्वाधीनता की रक्षा करना था। इस गुट ने इमाम ख़ुमैनी को देश निकाला दे दिए जाने के बाद अपनी सैनिक शाखा भी बनाई और शाही सरकार के विश्वासघाती और देशद्रोही अधिकारियों को दंडित करने का प्रयास किया। इस गुट ने इस संदर्भ में पहले क़दम के रुप में तत्कालीन ईरानी प्रधान मंत्री हसनअली मन्सूर की दिया करदी जिसने ईरान में अमरीकियों को न्यायिक कार्रवाई से सुरक्षित रखने संबंधी क़ानून बनवाया था। यह काम वैसे तो सफलतापूर्वक हो गया किंतु इसके बाद शाह ने उक्त संस्था के लगभग 100 सदस्यों को पकड़ कर सैनिक न्यायालय में उनपर मुक़द्दमा चलवाया और ग़लत रुप से उन्हें दंडित किया। आज ही के दिन इस संस्था के उक्त चार सदस्यों को मृत्युदंड और दूसरों को लम्बे कारवास का दंड दिया गया।

 

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23 शव्वाल वर्ष 749 हिजरी क़मरी को मिस्र के प्रसिद्ध लेखक, गणितज्ञ एवं चिकित्सक इब्ने साएद अन्सारी का जन्म हुआ। उन को तर्कशास्त्र, चिकित्सा एवं गणित में दक्षता प्राप्त थी और उन्हें अपने समय के इतिहास एवं महापुरूषों के बारे में विस्तृत जानकारी थी। उनकी रचनाओं की संख्या लगभग 40 हैं जिन में इरशायुलक़ासिद सब से महत्वपूर्ण है जो विज्ञान के इतिहास के बारे में है।