Jun १९, २०१६ ०८:०७ Asia/Kolkata

21 जून सन 1970 ईसवी को इंडोनेशिया में स्वतंत्रता अभियान के संस्थापक डॉक्टर अहमद सुकार्नो का निधन हुआ।

1756, जॉन जेड हॉलवेल के नेतृत्व वाली अतिक्रमणकारी अंग्रेज़ सैन्य टुकड़ी के बंगाल के नबाव सिराजउद्दौला के समक्ष आत्मसमर्पण के बाद 146 अंग्रेज़ों को एक कमरे में बंद किया गया। उनमें से 123 की मौत हो गई थी।

1862, ज्ञानेंद्र मोहन टैगोर ‘लिंकन्स इन’से वकालत की डिग्री हासिल करने वाले प्रथम भारतीय बने।

1898, अमरीका ने स्पेन को हराकर गुआम पर कब्जा किया।

1948, सी. राजगोपालाचारी भारत के अंतिम गर्वनर जनरल बने।

1975, वेस्टइंडीज़ टीम ने पहला क्रिकेट विश्व कप जीता।

1991, पी.वी. नरसिम्हाराव ने भारत के नौंवे प्रधानमंत्री बनें।

2001, पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने आतंकवादी विरोधी क़ानून बहाल किया।

2003, जेके रोलिंग की पांचवी किताब हैरी पॉटर एंड द ऑर्डर ऑफ़ द फ़ीनिक्स ​जारी।

2009, भारत की बैडमिंटन स्टार खिलाड़ी साइना नेहवाल सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब ​जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

2015, 2015 से प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।

वे सन 1901 में जन्मे। सुकार्नो ने शिक्षा के दौरान ही हॉलैंड के अतिग्रहण से अपने देश को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से संघर्ष आरंभ कर दिया। जिसके कारण हॉलैंड के साम्राज्यवादियों ने उन्हें गिरफतार करके चार वर्ष तक जेल में डाल दिया। स्वतंत्र होने के बाद भी वे एक बार और गिरफतार किए गये और उन्हें देश निकाला दे दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने इंडोनेशिया पर अधिकार कर लिय था।

21 जून 1905 को फ़्रान्स के प्रख्यात दार्शनिक व लेखक जान पाल सार्टर का पेरिस में जन्म हुआ। उन्होंने दर्शनशासत्र के विषय में अपनी पढ़ाई पूरी की और फ़िर देश के विश्वविद्यालयों में पढ़ाने लगे। सार्टर एग्ज़िस्टेन्शियलिज़्म या अस्तित्ववाद के मत के समर्थकों में से एक थे। अस्तित्ववाद में विचार की अपेक्षा व्यक्ति के अस्तित्व को अधिक महत्त्व दिया जाता है। इस मत के मानने वालों के अनुसार सारे विचार या सिद्धांत व्यक्ति के चिंतन का ही परिणाम हैं। अतः व्यक्ति का अस्तित्व ही प्रमुख है। इस मत में समाज, धर्म और सामाजिक परंपराओं पर मनुष्य की निर्भरता को रद्द किया जाता है। सार्टर ने 1964 में साहित्य का नोबल पुरस्कार लेने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और 1980 में उनका निधन हुआ।

 

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पहली तीर सन 1360 हिजरी शम्सी को ईरान में इस्लामी क्रान्ति के संस्थापाक हज़रत इमाम ख़ुमैनी ने देश की संसद मजलिसे शूराए इस्लामी द्वारा पारित किए गये उस प्रस्ताव की पुष्टि की जिसमें सांसदों ने अबुल हसन बनी सद्र की अयोग्यता पर बल दिया था। और उन्हें अपदस्थ कर दिया। बनी सद्र उन लोगों में थे जिन्होंने सन 1357 हिजरी शम्सी को इमाम ख़ुमैनी के पेरिस पलायने के बाद स्वयं को क्रान्ति का बड़ा ही शुभचिंतक घोषित किया। और अपनी चालों तथा हथकंडों द्वारा ही वे इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद राष्ट्रपति चुनाव में बहुमत प्राप्त करने में सफल हुए। कुछ समय बाद इमाम ख़ुमैनी ने संयुक्त सेना प्रमुख के उत्तराधिकारी का पद भी उन्हें सौंप दिया ।
किंतु बनी सद्र ने, जो देशद्रोही और विश्वासघाती व्यक्ति था कुछ ही समय बाद ईरान में इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था को समाप्त करने के लिए इस्लामी क्रान्ति के विरोधियों से सांठ गाठ आरंभ कर दी। इमाम ख़ुमैनी ने ख़तरे का आभास करके संयुक्त सेना प्रमुख के उत्तराधिकारी का पद बनी सद्र से ले लिया। जिसके बाद संसद ने भी बनी सद्र ने अयोग्यता की पुष्टि कर दी। इसके कुछ समय बाद बनी सद्र ने अपने लिए ख़तरा देखकर फ़्रांस का रास्ता लिया।

 

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29 शव्वाल सन 1228 हिजरी क़मरी को क़फ़क़ाज़ में स्थित क़राबाग़ के गुलिस्तान नामक गांव में ईरान और रुस के मध्य एक समझौता हुआ। यह समझौता दोनों देशों के बीच दस वर्षीय युद्ध का परिणाम था जिसमें क़ाज़ार शासकों की अयोग्यता के कारण ईरान को पराजय का सामना करना पड़ा था।

इस समझौते के आधार पर पश्चिमोत्तरी ईरान के गन्जे, शीरवान, बाकू दाग़िस्तान आदि क्षेत्र, रुस के अधिकार में चले गये।