सोमवार- 20 जुलाई
20 जुलाई सन 1810 ईसवी को कोलम्बिया ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
15वीं ईसवी शताब्दी के अंतिम वर्षों में इस देश की स्पेन के नाविकों ने खोज की और उसी समय से इस देश में स्पेन का साम्राज्य आरंभ हुआ। स्पेन पर नेपोलियन का अधिकार होते ही कोलम्बिया सहित इस देश के उपनिवेशों की स्वतंत्रता को गम्भीरता से आगे बढ़ाने का अवसर मिल गया। 1810 में कोलम्बिया में साम्राज्य के पिटठू शासक के विरूद्ध विद्रोह किया गया और देश की स्वतंत्रता की घोषणा कर दी गई। हालॉकि बाद में स्पेन की सेना के व्यापक आक्रमण से यह विद्रोह विफल हो गया किंतु दक्षिणी अमरीका के विख्यात स्वतंत्रता सेनानी साइमन बोलिवर ने 1819 में स्पेन की सेना पर आक्रमण करना आरंभ किया और ग्रेटर कोम्बिया का नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया जिसमें एक्वाडोर, वेनेज़ोएला और कोलम्बिया शामिल थे। कुछ समय बाद यह देश विभाजित हो गया और उसके दूसरे भागों की तरह कोलम्बिया में स्वतंत्र सरकार का गठन हुआ। वर्ष 1903 में पनामा देश कोलम्बिया से अलग हो गया और कोलम्बिया वर्तमान रूप में आ गया।
20 जुलाई1866 ईसवी को जर्मनी के गणितज्ञ बरनार्ड रीमैन का टीबी के रोग में निधन हुआ । वे जर्मनी के हैनूवर नगर में जन्में और आरंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने गणित की ओर पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया। वे 28 वर्ष की आयु में विश्वविद्यालय में गणित के शिक्षक बने। उन्होंने गणित की सराहनीय सेवा की है।

20 जुलाई सन 1937 ईसवी को गोलैलिमों मारकोनी नामक आविष्कारक का 63 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्होंने रेडियो का अविष्कार किया। वे इटली के एक व्यापारी के पुत्र थे। सन 1874 में उनका फ़्रांस में जन्म हुआ। उन्हें वचपन से ही तकनीकी कामों से लगाव था। उन्होंने ध्वनि की लहरों के बारे में गहन अध्ययन किया। उन्होंने कुछ समय बाद रेडियो और फिर वायरलेस का आविष्कार किया।

20 जुलाई सन 1969 ईसवी को मनुष्य ने पहली बार चंद्रमा पर कदम रखा।
अमरीकी अंतरिक्ष यात्रियों नील आर्म्सट्रांग और एडविन आल्डीन ने आज के दिन अपोलो 11 नामक अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर उतारा। कुछ समय तक चंद्रमा पर चलने फिरने और पत्थरों और मिटटी का नमूना लेने के बाद वे पृथ्वी की ओर लौटे। इस प्रकार मनुष्य के चंद्रमा पर पहुंचने के लम्बे प्रयास का फल मिला और पता चला कि इस ग्रह पर जीवन नहीं है।

20 जुलाई सन 1974 ईसवी को तुर्की की सेना ने साइप्रस के तुर्क क्षेत्रों पर जो इस क्षेत्र का उत्तरी भाग है कब्ज़ा कर लिया । साइप्रस में तुर्क और यूनानी नागरिकों के बीच लम्बे समय से विवाद जारी रहा। इस बीच तुर्की ने साइप्रस के तुर्की और यूनान ने यूनानियों का समर्थन किया। उल्लेखनीय है कि साइप्रस के राष्ट्रीय गारद के विद्रोह और यूनानियों के शासक असक़फ़ माकारयोस के अपदस्थ हो जाने के कारण तुर्की की सेना के बहाना मिल गया और उसने उत्तरी साइप्रस के तुर्क क्षेत्रों पर जो देश के क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत है, कब्ज़ा कर लिया।
इस प्रकार यह क्षेत्र तुर्क और यूनानी दो भागों में बॅट गया। उत्तरी भाग पर अब भी तुर्की का अधिकार है दोनों ही भागों के एकीकरण के लिए प्रयास निरंतर जारी हैं।

***
30 तीर सन 1331 को तेहरान सहित ईरान के पिभिन्न नगरों में व्यापक प्रदर्शन हुए। डॉक्टर मुसद्दिक़ के प्रधान मंत्री पद से त्यागपत्र और क़ेवामुस्सल्तनह की प्रधान मुत्री पद पर नियुक्ति का आदेश जारी होने के बाद संघर्षकर्ता धर्मगुरु आयतुल्ला काशानी ने एक बयान में केवामुस्सल्तनह को प्रधान मंत्री बनाए जाने का कड़ा विरोध किया। केवामुस्सल्तनह साम्राज्यवादी शक्तियों के पिटठू थे प्रधान मंत्री बनते ही उन्होंने धर्म के राजनीति से अलग होने का नारा दिया। आयतुल्ला काशानी ने अपने बयान में जनता से मांग कीकि वह अत्याचारी सरकार के विरुद्ध संघर्ष के लिए उठ खड़ी हो। इसी प्रकार देश केविभिन्न नगरों में जनता ने सड़कों पर निकल कर प्रदर्शन किए। शाही सेना ने प्रदर्श नकर्ताओं पर पाश्विक आक्रमण किए किंतु फिर भी यह प्रदर्शन जारी रहे और शाह को विवश होकर डॉक्टर मुसद्दिक़ को पुन: प्रधान मंत्री पद सौंपना पड़ा। इस बार डॉक्टर मुसद्दिक़ की सरकार 13 महीने ही चल सकी क्योंकि अमरीका ने 28 मुर्दाद अर्थात 19 अगस्त को विद्रोह करवा कर सरकार का तथ्ता उलट दिया।
***
28 ज़ीक़ादा सन 360 हिजरी क़मरी को ईरान में वरिष्ठ धर्मगुरु अबुल कासिम तबरानी का इस्फ़हान नगर में निधन हुआ। उन्होंने इस्लामी ज्ञान की प्राप्ति के लिए विश्व के अनेक इस्लामी क्षेत्रों का दौरा किया और 33 वर्षों के अध्ययन और शोधकार्य के बाद उन्होंने शिक्षा देनी आरंभ की और अपने शिष्यों को इस्लामी विषयों में दक्ष किया। तबरानी ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। पैग़म्बरे इस्लाम के कथनों के बारे में लिखी गयी उनकी तीन पुस्तकें विशेष रुप से प्रसिद्ध हैं।