रविवार- 26 जुलाई
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पियर कोर्नी
26 जूलाई सन 1614 मुगल राजा जहांगीर ने मेवाड़ को राना अमर सिंह से ले लिया ।
26 जूलाई सन 657 को पहली बार हज़रत अली अलैहिस्सलाम और विद्रोही गर्वनर मुआविया की सेना का टकराव हुआ
26 जूलाई सन 1614 मुगल राजा जहांगीर ने मेवाड़ को राना अमर सिंह से ले लिया ।
26 जूलाई सन 1745 पहले महिला क्रिकेट मैच का आयोजन
26 जूलाई सनn 1814 स्वीडन और नार्वे के मध्य युद्ध आरंभ हुआ।
26 जूलाई सन 1892 दादाभाई नौरोज़ी ब्रिटेन के सांसद बनने वाले पहले भारतीय बने
26 जूलाई सन 1936 स्पेन के गृहयुद्ध में जर्मनी और इटली ने कूदने का निर्णय लिया।
26 जूलाई सन 1941 मे द्वतीय विश्य युद्ध के दौरान, जब जापान ने फ्रांस के अधिकार वाले क्षेत्र इन्डोचाइना पर क़ब्ज़ा कर लिया तो अमरीका, ब्रिटेन और हालैंड ने जापान की सारी संपत्ति ज़ब्त कर ली और तेल के जहाज़ों पर रोक लगा दी।
26 जूलाई सन1999 में करगिल युद्ध समाप्त हुआ और भारत ने पाकिस्तान की घुसपैठ को पूर्ण रूप से खत्म कर देने का एलान किया।
26 जुलाई सन 1686 को फ़्रांसीसी लेखक और कवि पियर कोर्नी का 78 वर्ष की आयु में निधन हुआ।उन्हे ड्रामे लिखने से विशेष लगाव था और इस क्षेत्र में उन्होंने इतनी प्रगति की कि बाद में उन्हें ड्रामा लेखन और क्लासिक थियेटर का जनक कहा जाने लगा। उनके शेर भी अत्यंत सादे किंतु रोचक होते थे इसी कारण उनके शेर फ़्रांस के लोगों में कहावत और नसीहत के रूप में प्रचलित हैं।
26 जुलाई सन 1856 ईसवी को आयरलैंड के आलोचक और प्रसिद्ध लेखक जॉर्ज बरनार्ड शॉ का जन्म हुआ। उन्होंने पहले ड्रामा और कहानियां लिखना आरंभ कीं। वे अपने ड्रामों में लोगों की समस्याओं और कठिनाइयों की समीक्षा करते थे। उन्हें इस्लाम धर्म से विशेष लगाव था। अपने लेखनों में उन्होंने कई बार इस धर्म की महानता को स्वीकार किया है। उनका कहना था कि हज़रत मोहम्मद का धर्म एकमात्र धर्म है जो मानव जीवन के प्रत्येक चरण के लिए अनुकूल है। इसमें हर जाति के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता है। मैं भविष्यवाणी करता हूँ कि आने वाले समय में पूरा योरोप इस्लाम धर्म को गले लगाएगा। बर्नार्ड शॉ को उनके निधन के दो वर्ष बाद सन 1952 में नोबल पुरूस्कार दिया गया। उनकी रचनाओ को विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त है।
26 जुलाई सन 1956 ईसवी को मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर ने स्वेज़ नहर को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया और उससे संबंधित कार्यों की देख भाल के लिए एक संस्था की स्थापना की। ब्रिटेन ने सन 1896 में मिस्र पर अधिकार करने के बाद स्वेज़ नहर बनवाई थी और इस प्रकार से योरोप और एशिया के बीच जलमार्ग बहुत छोटा हो गया। इस नहर पर ब्रिटेन और इसी प्रकार फ़्रांस का अधिकार जारी रहा यहॉं तक कि राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नसिर ने इन दोनों सरकारों का स्वेज़ नहर से अधिकार समाप्त करने के लिए इस नहर का राष्ट्रीयकारण कर दिया। इस घोषणा के बाद ब्रिटेन फ़्रांस और ज़ायोनी शासन की सेनाओं ने मिलकर मिस्र पर धावा बोल दिया। किंतु अतिक्रमणकारी सरकारों पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव और मिस्र के कड़े प्रतिरोध के कारण इन सेनाओं को पीछे हटना पड़ा।
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5 मुर्दाद सन 1359 हिजरी शम्सी को ईरान के अंतिम शासक मोहम्मद रज़ा पहलवी का मिस्र की रजधानी क़ाहेरा में निधन हुआ। उसका जन्म 1298 हिजरी शम्सी में हुआ था। अपने पिता रज़ाख़ान के ब्रिटेन द्वारा अपदस्थ किये जाने के बाद वह ईरान का शासक बना। वह अपनी सरकार को ब्रिटेन का उपहार जानता था इसी लिए वह ईरान में ब्रिटेन के हितों का संरक्षक था किंतु 1329 में जनता के विद्रोह और तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के अभियान की सफलता के बाद ईरान में ब्रिटेन के हित ख़तरे में पड़ गये। इसके तीन वर्ष बाद ब्रिटेन और अमरीका ने ईरान में विद्रोह करवाया जिससे डॉक्टर मुसद्दिक़ की सरकार का पतन हुआ और विद्रोह से तीन दिन पहले ईरान से भाग जाने वाला मोहम्मद रज़ा फिर तेहरान वापस आ गया। इसके बाद से अमरीका ने ईरान की राष्ट्रीय सम्पत्ति को लूटना आरंभ किया। यहॉ तक कि 1357 हिजरी शम्सी को इमाम ख़ुमैनी के नेत्रेत्व में ईरान में इस्लामी क्रान्ति सफल हुई। इस प्रकार ईरान में शाह के शासन और अमरीका के हितों का अंत हुआ।
5 मुर्दाद सन 1367 हिजरी शम्सी को ईरान में आतंकवादी गुट एम के ओ के विरुद्ध सफल सैनिक कार्रवाही हुई और इस गुट के तेहरान पर अधिकार के षडयंत्र को ईरानी सेना ने मिट्टी में मिला दिया।
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5 ज़िल्हिज्जा सन 1361 हिजरी क़मरी को विख्यात मुसलमान दार्शनिक व धर्मगुरु मोहम्मद हुसैन कम्पानी का इराक़ के नजफ़ नगर में निधन हुआ।
दर्शनशास्त्र, तत्वदर्शिता, इतिहास भूगोल, शायरी और साहित्य का उनहें व्यपाक ज्ञान था। इसी प्रकार उनकी चिंतन शक्ति की भी उन्हें श्रेष्ठतम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका थी। अल्लामा कम्पनी की लिखी हुई कई पुस्तकें अब भी सुरक्षित हैं जिनसे लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें फ़ल्सफ़ा व हिकमत, इजतेहाद व तक़लीद, आदि का नाम लिया जा सकता है। इसी प्रकार उनका एक पद्य संकलन भी सुरक्षित है।