Jul २८, २०१६ ०८:५४ Asia/Kolkata
  • मैक्सीमिलियन रोबेस्पियर
    मैक्सीमिलियन रोबेस्पियर

28 जुलाई सन 1794 ईसवी को फ़्रांस में मैक्सीमिलियन रोबेस्पियर और उसके साथियों को मृत्युदंड दिए जाने के बाद भय और आतंक का काल समाप्त हुआ।

  • 28 जुलाई सन 1585 को इंग्लैंड से वापस लौटने पर सर थामस हेरिओट ने यूरोप को आलू से अवगत कराया।
  • 28 जुलाई सन 1858 को उंगलियों के निशान को पहचान बनाने वाले ब्रिटिश विलियम जेम्‍स हर्शेल का जन्म हुआ।
  • 28 जुलाई सन 1914 को प्रथम विश्‍व युद्ध की शुरुआत हुई।
  • 28 जुलाई सन 1925 को हेपेटाइटिस का टीका खोजने वाले बारुक ब्‍लमर्ग का जन्‍म हुआ। इसी दिन विश्‍व हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है।
  • 28 जुलाई सन 1976 को रिक्टर पैमाने पर 8.3 की तीव्रता के भूकंप से चीन में लाखों लोगों की मौत हो गई।

 

28 जुलाई सन 1794 ईसवी को फ़्रांस में मैक्सीमिलियन रोबेस्पियर और उसके साथियों को मृत्युदंड दिए जाने के बाद भय और आतंक का काल समाप्त हुआ। एक वर्ष तक जारी रहने वाली यह स्थिति उस समय आरंभ हुई जब फ़्रांस में क्रान्ति की सफलता के बाद क्रान्ति के विरोधियों का मुक़ाबला करने के लिए एक विशेष नयायालय का गठन किया गया। रोबेस्पियर ने जो क्रान्ति के मुख्य नेताओं में था और सत्ता पर पूर्ण अधिकार करना चाहता था इस अवसर का दुरुपयोग करते हुए अपने विरोधियों का दमन आरंभ कर दिया उस काल में 1 लाख 20 हज़ार लोग बिना मुक़द्दमा चलाए मार दिये गये जिनमें लावाज़िए जैसे रसायन शास्त्री और आंद्रे सीने जैसे शायर भी शामिल थे।

 

28 जुलाई सन 1821 ईसवी को पेरु को स्पेन से स्वतंत्रता मिली और आज के दिन को इस देश का राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया। 16वीं शताब्दी के आरंभ में स्पेन के साम्राज्यवादी इस देश में प्रविष्ट हुए और उन्होंने स्थानीय रेड इंडियन्स का जनसंहार करके इसे स्पेन के नियंत्रण में कर लिया। साम्राज्यवादियों ने पेरु के प्राकृतिक संसाधनों को लूटा और जनता का शोषण किया। इसी कारण पेरु की जनता का स्वतंत्रता संग्राम चरम सीमा पर पहुँच गया और यह देश स्वतंत्र हुआ।

यह देश दक्षिणी अमरीका के उत्तर पश्चिम में स्थित है और इक्वाडोर कोलम्बिया, चिली, ब्राज़ील और बोलीविया इसके पड़ोसी देश हैं।

28 जुलाई सन 1878 ईसवी को बर्लिन सम्मेलन के समापन पर रुस जर्मनी, फ़्रांस, ब्रिटेन और ऑस्ट्रिया के बीच बर्लिन समझौते पर हस्ताक्षर हुए। यह सम्मेलन जर्मनी के तत्कालीन राष्ट्राध्यक्ष बीसमार्क के आहवान पर आयोजित हुआ था। इस समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद जर्मनी की राजनैतिक और सैनिक शक्ति बहुत अधिक हो गयी तथा जर्मनी के लिए विस्तारवादी नीतियों को लागू करने की भूमिका समतल हो गयी। वस्तुत: यही समझौता प्रथम विश्व युद्ध की भूमिका था।

28 जुलाई सन 1914 ईसवी को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ऑस्ट्रिया ने इस देश के उत्तराधिकारी की सर्बिया में हत्या के बहाने सर्बिया पर आक्रमण कर दिया किंतु इस आक्रमण का वास्तविक कारण सर्बिया के आंतरिक मामलो में ऑस्ट्रिया के हस्तक्षेप के विरुद्ध जनता के विद्रोह को कुचलना था। प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी, ऑस्ट्रिया और उसमानी शासन एक ओर थे तो दूसरी ओर रुस, फ़्रांस, ब्रिटेन और सार्बिया थे।

 

28 जुलाई सन 1976 ईसवी को पूर्वी चीन के तांग शान नगर में भीषण भूकम्प आया जिसमें 6 लाख हताहत और कई लाख घायल हुए किंतु सरकारी रिपोर्ट के अनुसार मरने वालों की संख्या दो लाख चालीस हज़ार थी। इस भूकम्प की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7 दशमव 9 मापी गयी।

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7 मुरदाद वर्ष 1375 हिजरी शमसी को ईरान के सुलेखन कला के उस्ताद कहे जाने वाले अब्दुल्लाह फ़ुरादी का देहॉंत हुआ।

वर्ष 1306 हिजरी शमसी में उन का जन्म हुआ। उनको बचपन से इस कला से रूचि थी। फ़ुरादी ने युवावस्था से इस कला को सीखना आरम्भ किया और उन्होंने क़ानून एवं साहित्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और शिक्षा को जारी रखने के लिए वे फ़्रांस चले गए किन्तु कभी भी सुलेखन कला को नहीं भूले। फ़ुरादी प्रसिद्ध समकालीन सुलेखकों के पास उपस्थित हुए और उन्होंने इस कला की उन्नति में बहुत प्रयास किया यहां तक कि स्वंय इस कला में दक्ष बन गए।

उन्होंने बड़ी संख्या में सुलेखकों का प्रशिक्षण किया और अपनी सुन्दर इस्तलीपि में विभिन्न पुस्तकें एवं लेख लिखे।

 

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7 ज़िलहिज्जा 11 हिजरी क़मरी पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम 57 साल की आयु में शहीद हो गये।  हिजरी क़मरी में इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम का जन्म पवित्र नगर मदीने में हुआ।

इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम ऐसे समय में थे जब उमवी शासकों की अत्याचारी सरकार थी। अपने पिता इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम ने लोगों के मार्ग दर्शन का ईश्वरीय दायित्व संभाला। इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम ने विभिन्न ज्ञानों की अलग-अलग आधार शिला रखी इसीलिए उनकी एक प्रसिद्ध उपाधि बाक़िर है जिसका अर्थ है ज्ञान को गुत्थियो खोलने वाला। इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम का पावन रौज़ा सऊदी अरब के पवित्र नगर मदीने के बकी कब्रिस्तान में था जिसे धर्मभ्रष्ट वहाबियों ने शहीद कर दिया।